
काबो वर्दे ने रचा इतिहास, सऊदी अरब से गोलरहित ड्रॉ के बाद अर्जेंटीना से होगी भिड़ंत
विश्व कप में पदार्पण कर रहे काबो वर्दे ने तीनों ग्रुप मैच ड्रॉ खेलकर अजेय रहते हुए अंतिम-32 में जगह बनाई और अब मियामी में सुपरस्टार लियोनेल मेसी की अर्जेंटीना से सामना होगा।
ह्यूस्टन के एनआरजी स्टेडियम में शुक्रवार रात काबो वर्दे और सऊदी अरब के बीच गोलरहित ड्रॉ ने फुटबॉल की सबसे बड़ी परीकथाओं में से एक को अंजाम दिया। मैच खत्म होने के बाद भी काबो वर्दे के खिलाड़ी मैदान पर ही मोबाइल फोनों से गुआदालाहारा में चल रहे स्पेन-उरुग्वे मुकाबले का सीधा प्रसारण देखते रहे। जैसे ही स्पेन की 1-0 की जीत की खबर आई, पूरा दल भावुक हो उठा—खिलाड़ी रो पड़े, झंडे लपेटे एक-दूसरे से लिपट गए और स्टेडियम में मौजूद प्रशंसकों ने ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न मनाया। यह ड्रॉ काबो वर्दे के लिए ग्रुप एच में दूसरे स्थान की पुष्टि कर गया, जिससे उसने अपने पहले ही विश्व कप में नॉकआउट चरण का टिकट कटा लिया।
मैच अपने आप में सतर्कता और अवसरों की कमी वाला रहा। काबो वर्दे ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया और पहले हाफ में विली सेमेदो के ज़रिए पहला बड़ा मौका बनाया, जिसे सऊदी गोलकीपर मोहम्मद अल-ओवैस ने बचा लिया। दूसरे हाफ में जामिरो मोंटेइरो और केविन पिना के प्रयास नाकाम रहे, जबकि 75वें मिनट में लारोस दुआर्ते आमने-सामने की स्थिति में अल-ओवैस को छकाने में असफल रहे। सऊदी अरब, जिसे जीत की सख्त ज़रूरत थी, आक्रमण में उल्लेखनीय रूप से निष्क्रिय रहा। उसकी ओर से मोहम्मद कन्नो का पहले हाफ के इंजरी टाइम में हेडर और अब्दुल्ला अल-हमदान का अंतिम क्षणों का शॉट ही एकमात्र उल्लेखनीय प्रयास थे, जिन्हें काबो वर्दे के 40 वर्षीय गोलकीपर वोज़ीन्हा ने सहजता से निपटा दिया।
यह ऐतिहासिक उपलब्धि तीन अजेय ड्रॉ की नींव पर खड़ी हुई। काबो वर्दे ने पहले मैच में यूरोपीय चैंपियन स्पेन को गोलरहित रोका, फिर दो बार के पूर्व विजेता उरुग्वे के खिलाफ 2-2 की बराबरी की, और अब सऊदी अरब के साथ भी अंक बांटे। अफ्रीकी मीडिया ने इसे महाद्वीप के लिए गौरव का क्षण बताया, जबकि यूरोपीय समाचार पत्रों ने ‘छोटे द्वीप, बड़े सपने’ जैसे नारों के साथ इस उपलब्धि को रेखांकित किया। एशियाई मीडिया, विशेषकर इंडोनेशियाई और भारतीय आउटलेट्स ने इस बात पर ज़ोर दिया कि कैसे एक अज्ञात टीम ने सारी भविष्यवाणियों को धता बताते हुए अंतिम-32 में जगह बनाई। भारतीय संदर्भ में, यह कहानी इस बात की याद दिलाती है कि छोटे राष्ट्र भी वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बना सकते हैं, बशर्ते उनमें अनुशासन और सामूहिक भावना हो।
काबो वर्दे महज़ पाँच लाख से कुछ अधिक आबादी वाला द्वीपसमूह है और विश्व कप के नॉकआउट चरण में पहुँचने वाला सबसे छोटा देश बन गया है। इससे पहले 1998 में चिली ने भी तीन ड्रॉ के साथ अगले दौर में प्रवेश किया था, लेकिन किसी डेब्यूटेंट का इस तरह अजेय रहते हुए आगे बढ़ना दुर्लभ है। कोच बुबिस्ता ने मैच के बाद कहा, “हमें इस मुकाम पर पहुँचने पर गर्व है और हमने दुनिया को दिखा दिया कि हम छोटे देश हैं, लेकिन जो चाहते हैं उसके लिए लड़ते हैं।” गोलकीपर वोज़ीन्हा, जिनकी माँ वीज़ा संबंधी देरी के बाद पहली बार स्टेडियम में मौजूद थीं, ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार बचाव किए और सोशल मीडिया पर उनके फ़ॉलोअर्स की संख्या लाखों में पहुँच गई।
अब काबो वर्दे का सामना 3 जुलाई को मियामी के हार्ड रॉक स्टेडियम में गत विजेता अर्जेंटीना से होगा। यह मुकाबला डेविड बनाम गोलियथ जैसा है, जहाँ एक ओर मेसी, डि मारिया जैसे दिग्गज होंगे और दूसरी ओर वो टीम जिसने अभी तक कोई मैच नहीं हारा है। दक्षिण एशियाई फुटबॉल प्रशंसकों के लिए यह मैच विशेष आकर्षण रखता है, क्योंकि यह दिखाता है कि कैसे एक छोटा राष्ट्र अनुशासित खेल और अदम्य साहस के बल पर दिग्गजों को चुनौती दे सकता है।
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | 0.00 | neutral |
|---|---|---|
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