
फेड चेयरमैन वॉर्श ने भविष्य की दरों पर मार्गदर्शन से इनकार किया, मुद्रास्फीति जोखिम घटने का संकेत
सिंट्रा में केंद्रीय बैंकरों के मंच पर केविन वॉर्श ने स्पष्ट किया कि फेड अब अग्रिम संकेत नहीं देगा, जो अमेरिकी मौद्रिक नीति की संचार रणनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव है।
फेडरल रिजर्व के नए चेयरमैन केविन वॉर्श ने पुर्तगाल के सिंट्रा में यूरोपीय सेंट्रल बैंक के वार्षिक मंच पर कहा कि हाल के सप्ताहों में मुद्रास्फीति के जोखिम कम हुए हैं, लेकिन उन्होंने भविष्य की ब्याज दरों पर कोई संकेत देने से साफ इनकार कर दिया। यह रुख फेड की उस परंपरा से पूर्ण विच्छेद है जिसमें नीतिगत दिशा का पूर्वानुमान दिया जाता था। वॉर्श ने कहा कि दरों पर निर्णय तभी होगा जब नीति निर्माता अगली बैठक में “दरवाजा बंद करके” बहस करेंगे। बाजारों ने इसके बाद सितंबर में दर वृद्धि की संभावना 70 प्रतिशत आंकी है।
वॉर्श का यह कदम फेड के ढांचे में व्यापक बदलाव का हिस्सा है। उन्होंने मुद्रास्फीति लक्ष्य निर्धारण की समीक्षा, बैलेंस शीट को छोटा करने और डॉट प्लॉट जैसे पूर्वानुमान उपकरणों के स्थान पर वैकल्पिक परिदृश्य प्रस्तुत करने के लिए पाँच कार्यबल गठित किए हैं। यह बर्नान्के-येलेन-पॉवेल युग की सहज नीति से गहरा विचलन है। फेड के भीतर ही इस पर मतभेद हैं—कुछ सदस्य वर्ष के अंत तक एक से तीन वृद्धि की अपेक्षा रखते हैं जबकि अन्य स्थिरता के पक्ष में हैं। वॉर्श ने स्वयं आगामी बैठक को “स्वस्थ पारिवारिक लड़ाई” बताया।
वैश्विक स्तर पर, वॉर्श ने फेड की स्वतंत्रता पर जोर दिया, भले ही राष्ट्रपति ट्रंप दरों में कटौती की मांग कर रहे हैं। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा फेड गवर्नर लिसा कुक को पद से हटाने के ट्रंप के प्रयास को रोकने के दो दिन बाद यह बयान आया। ईसीबी अध्यक्ष क्रिस्टीन लगार्ड ने भी ऊर्जा कीमतों में गिरावट के चलते मुद्रास्फीति जोखिमों के अधिक संतुलित होने की बात स्वीकार की। ईसीबी पहले ही दरें बढ़ा चुका है, जबकि बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक ऑफ कनाडा स्थानीय आर्थिक कमजोरी के कारण सख्ती से बच रहे हैं। दक्षिण एशिया के लिए, फेड का यह रुख पूंजी प्रवाह और मुद्रा स्थिरता को प्रभावित कर सकता है, हालांकि स्पष्ट संकेतों के अभाव में अनिश्चितता बढ़ेगी।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर वॉर्श ने कहा कि यह पूंजीगत व्यय में उछाल ला रही है और अमेरिका इसका बड़ा विजेता हो सकता है, लेकिन यह केंद्रीय बैंक का काम है कि वह तय करे कि इसका मुद्रास्फीति पर क्या प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने उत्पादकता-आधारित विकास के प्रति अमेरिकी अर्थव्यवस्था के खुलेपन को रेखांकित किया। भारत जैसे उभरते बाजारों के लिए यह तकनीकी बदलाव आपूर्ति श्रृंखलाओं और निवेश प्रवाह को नया आकार दे सकता है।
अगला ठोस पड़ाव 28-29 जुलाई को होने वाली फेड की नीतिगत बैठक है। वॉर्श ने संकेत दिया है कि अगले सप्ताह कार्यबलों के नेताओं की घोषणा होगी। बाजार अब बिना किसी पूर्व मार्गदर्शन के, आर्थिक आंकड़ों और ऊर्जा कीमतों के रुझान पर निर्भर रहेंगे।
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | 0.00 | neutral |
|---|---|---|
| दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस | 0.00 | neutral |
The gold market welcomes Warsh's words, which dispel the specter of a rate hike.
The article uses the gold price reaction as immediate proof of the speech's impact, creating a direct causal link.
It does not mention the broader rate hike expectations or the impact on the dollar.
The currency market prices in a Fed rate hike by October, with the dollar declining.
The article relies on futures prices and implied probabilities to build a narrative of market expectations.
It omits Warsh's specific speech that softened rate hike speculation.
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