
जर्मनी से 7-1 की करारी हार के बाद भी कुराकाओ के कोच को गर्व, बोले- 'अभी बाकी है कमाल'
फीफा विश्व कप 2026 में ऐतिहासिक पदार्पण करने वाले कुराकाओ को जर्मनी ने बुरी तरह हराया, लेकिन 78 वर्षीय कोच डिक एडवोकाट का मानना है कि टीम अभी भी बाकी मैचों में सरप्राइज दे सकती है।
ह्यूस्टन के एनआरजी स्टेडियम में रविवार को कुराकाओ के लिए एक ऐतिहासिक शाम का सपना किसी बुरे सपने में बदलता दिखा, जब चार बार की विश्व विजेता जर्मनी ने उसे 7-1 से रौंद दिया। फीफा विश्व कप में पहली बार उतरी इस कैरिबियाई टीम के लिए यह स्कोरलाइन भले ही क्रूर लगे, लेकिन 78 वर्षीय मुख्य कोच डिक एडवोकाट ने हार के बाद भी अपने खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाया। टूर्नामेंट के सबसे उम्रदराज कोच बने एडवोकाट मैच से पहले भावुक हो गए थे और जब लिवानो कोमेनेसिया ने फेलिक्स नमेचा के शुरुआती गोल के बाद बराबरी का गोल दागा, तो वह अपनी सीट से उछल पड़े। लेकिन यह खुशी क्षणभंगुर साबित हुई और जर्मनी ने निको श्लोटरबेक, काई हैवर्ट्ज (दो गोल), जमाल मुसियाला, नथानिएल ब्राउन और डेनिज उंडाव के जरिए लगातार छह गोल दागकर किसी भी बड़े उलटफेर की संभावना खत्म कर दी।
दक्षिण अमेरिका से लेकर दक्षिण-पूर्व एशिया और दक्षिण एशिया तक की मीडिया रिपोर्टों में इस हार के बाद एडवोकाट के बयानों को केंद्रीय महत्व दिया गया। ब्राजील के मीडिया ने इस बात पर जोर दिया कि अनुभवी डच कोच ने हार के बावजूद अपनी टीम को 'खूबसूरत टूर्नामेंट' में बदलने की बात कही। इंडोनेशियाई मीडिया ने उनके गर्व और 'शर्मिंदा न होने' वाले संदेश को रेखांकित किया, जबकि भारतीय मीडिया ने कुराकाओ के 'विश्व कप सपने' के जिंदा रहने की कहानी को प्रमुखता दी। सभी ने एक स्वर में बताया कि एडवोकाट ने स्कोरलाइन पर ध्यान देने से इनकार करते हुए कहा, "हमें इस पर शर्मिंदा होने की जरूरत नहीं है, हम दुनिया के सबसे बड़े फुटबॉल टूर्नामेंट का हिस्सा बनकर खुश हैं।"
विश्लेषकों का मानना है कि एडवोकाट का यह रुख महज भावनात्मक सांत्वना नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। कुराकाओ ने डेब्यू मैच में कई गलतियां कीं, जिनका जर्मनी ने बेरहमी से फायदा उठाया, लेकिन कोच का मानना है कि ये गलतियां सीखने का मौका हैं। उन्होंने साफ कहा कि टीम अभी भी ग्रुप ई के अपने दूसरे और तीसरे मुकाबले में 'सरप्राइज' दे सकती है। यह बयान कैरिबियाई फुटबॉल के लिए एक बड़े मनोवैज्ञानिक सहारे की तरह देखा जा रहा है, जहां संसाधनों और अनुभव की भारी कमी के बावजूद विश्व मंच पर पहचान बनाने की जिद्द साफ झलकती है।
आगे की राह कठिन जरूर है, लेकिन एडवोकाट का आत्मविश्वास इस बात की याद दिलाता है कि विश्व कप में डेब्यूटेंट टीमों की कहानियां अक्सर हार से नहीं, बल्कि अप्रत्याशित जीत और जज्बे से लिखी जाती हैं। कुराकाओ के लिए अगले दो मैच न केवल सम्मान बचाने का मौका हैं, बल्कि वैश्विक फुटबॉल मानचित्र पर अपनी छाप छोड़ने का अवसर भी हैं। एडवोकाट का यह विश्वास कि 'हम अभी भी इसे एक खूबसूरत विश्व कप बना सकते हैं', पूरी टीम के लिए एक नई ऊर्जा का स्रोत बन सकता है, और शायद यही वह भावना है जो खेल के सबसे बड़े मंच पर छोटे देशों को बड़े सपने देखने की हिम्मत देती है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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विश्व कप में पदार्पण पर जर्मनी से 7-1 की कठोर हार के बाद, कुराकाओ के कोच, जो टूर्नामेंट के इतिहास में सबसे उम्रदराज हैं, इस बात पर जोर देते हैं कि टीम के पास अभी भी सरप्राइज में विश्वास करने के कारण हैं और वह अभियान को पलट सकती है। परिणाम उम्मीदों से कम रहा, लेकिन खिलाड़ियों को निराश नहीं होना चाहिए।
जर्मनी द्वारा 7-1 से कुचले जाने के बावजूद, कुराकाओ दुनिया के सबसे बड़े फुटबॉल टूर्नामेंट का हिस्सा बनने पर गर्व और खुशी महसूस करता है। कोच डिक एडवोकेट का कहना है कि शर्मिंदा होने की कोई जरूरत नहीं है, और वे अगले मैचों में अभी भी सरप्राइज दे सकते हैं।
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