
तनाव की चुपचाप बढ़ती लहर: कैसे रोज़मर्रा की आदतें दिमाग़ और शरीर को नुकसान पहुँचा रही हैं
अर्जेंटीना में 49% वयस्क खुद को तनावग्रस्त मानते हैं, और वैश्विक अध्ययन बताते हैं कि सुबह फ़ोन चेक करने से लेकर लगातार माफ़ी माँगने तक की छोटी आदतें क्रॉनिक स्ट्रेस को जन्म देकर दिल की बीमारी, याददाश्त की कमज़ोरी और रिश्तों में दरार का कारण बन रही हैं।
दुनिया भर में तनाव अब सिर्फ़ एक मनोवैज्ञानिक परेशानी नहीं, बल्कि दिल की बीमारी के बराबर एक जोखिम कारक बन चुका है। अर्जेंटीना के हृदय रोग विशेषज्ञ मारियो बोस्किस के अनुसार, क्रॉनिक स्ट्रेस से लगातार कॉर्टिसोल हार्मोन रिसता है, जो रक्तचाप बढ़ाता है, शुगर लेवल बिगाड़ता है और धमनियों की अंदरूनी परत को नुकसान पहुँचाकर हार्ट अटैक का ख़तरा लगभग दोगुना कर देता है। यह प्रक्रिया इतनी ख़ामोश होती है कि व्यक्ति को पता ही नहीं चलता—अक्सर परिवार वाले या डॉक्टर पहले पहचानते हैं।
यह जैविक तंत्र रोज़मर्रा की उन आदतों से शुरू होता है जिन्हें हम मामूली समझते हैं। ईरानी और इंडोनेशियाई मीडिया में प्रकाशित मनोवैज्ञानिक विश्लेषण बताते हैं कि सुबह उठते ही फ़ोन चेक करना दिमाग़ को रिएक्टिव मोड में डाल देता है, जिससे ध्यान भटकता है और चिंता बढ़ती है। इसी तरह, बार-बार माफ़ी माँगना, हर छोटी बात पर गुस्सा आना, या बिना सोचे-समझे साँस रोक लेना—ये सब नर्वस सिस्टम के हाइपर-अलर्ट रहने के संकेत हैं। रूसी चिकित्सक डेविड वाइनस्टीन ने चेतावनी दी है कि सुबह खाली पेट कॉफ़ी पीने से हल्का डिहाइड्रेशन और सिरदर्द होता है, जबकि नाश्ता छोड़ने से दिनभर ज़्यादा खाने की संभावना बनती है।
इस तनाव का असर सिर्फ़ शरीर पर नहीं, बल्कि सोचने-समझने की क्षमता और रिश्तों पर भी पड़ता है। भारतीय न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. नेहा पंडिता के हवाले से बताया गया है कि लगातार तनाव हिप्पोकैम्पस को प्रभावित करता है, जो सीखने और याददाश्त का केंद्र है। नतीजा, 20-30 साल के युवाओं में ‘ब्रेन फ़ॉग’ यानी ध्यान लगाने में दिक्कत और भूलने की शिकायतें बढ़ रही हैं, हालाँकि यह ज़रूरी नहीं कि यह समय से पहले बुढ़ापे का संकेत हो। स्पेन के नींद विशेषज्ञ अल्फ़्रेदो रोद्रिगेज़-मुन्योज़ के अनुसार, हमने एक ऐसा समाज बना लिया है जो जागने को पुरस्कृत करता है और आराम को शक की निगाह से देखता है। सोने से पहले मोबाइल का इस्तेमाल दिमाग़ को यह संकेत देता है कि दिन ख़त्म नहीं हुआ, जिससे मेलाटोनिन बनने में देरी होती है और नींद की गुणवत्ता गिरती है।
इस सबके बीच, समाधान की दिशा भी साफ़ हो रही है। अर्जेंटीना के ही कार्डियोलॉजिस्ट डेनियल लोपेज़ रोसेट्टी ज़ोर देते हैं कि तनाव से निपटने के लिए दवा से ज़्यादा जीवन-दर्शन की ज़रूरत है—एक स्टोइक नज़रिया जो रोज़मर्रा की निराशाओं को फ़िल्टर करना सिखाता है। वे कहते हैं, “दिन मछली पकड़ने की डोर है जिसमें कई काँटे लगे हैं; तनावग्रस्त व्यक्ति उन काँटों को निगलने में माहिर होता है, जबकि तनाव को मैनेज करने वाला उनसे बचता है।” विशेषज्ञ सुबह 20-30 मिनट बिना फ़ोन के बिताने, नियमित व्यायाम (हफ़्ते में 150 मिनट) और सोने-जागने का समय तय करने की सलाह देते हैं। अगला क़दम यह देखना है कि कैसे ‘कैल्म टेक्नोलॉजी’—जो बिना नोटिफिकेशन के कमरे की रोशनी और तापमान को अपने आप नियंत्रित करती है—इस तनाव को कम करने में मदद कर सकती है, बशर्ते हम पहले अपनी आदतों पर लगाम लगाएँ।
| रूसी और सीआईएस प्रेस | −0.30 | critical |
|---|---|---|
| ईरानी और संबद्ध प्रेस | −0.20 | neutral |
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | 0.00 | neutral |
| दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस | 0.00 | neutral |
रूस क्रोनिक तनाव को पश्चिमी आक्रमण के दुष्प्रभाव के रूप में प्रस्तुत करता है, राष्ट्रीय लामबंदी का आह्वान करता है।
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ईरान क्रोनिक तनाव को प्रतिबंधों और अमेरिकी शत्रुता का परिणाम मानता है, प्रतिरोध और पश्चिम के प्रति अविश्वास का आह्वान करता है।
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यह एक व्यक्तिगत समस्या को सामूहिक मुद्दे में बदलने के लिए 'सार्वभौमिकरण' का उपयोग करता है, राज्य के हस्तक्षेप को वैध बनाता है।
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