
जर्मनी का विवादित गोल रद्द, फीफा ने दी सफाई; पैराग्वे ने पेनल्टी शूटआउट में पलटा मैच
फीफा रेफरी प्रमुख पियरलुइगी कोलिना ने जर्मनी के खिलाफ पैराग्वे के गोलकीपर से मामूली संपर्क पर रद्द किए गए गोल को सही ठहराया, जबकि जर्मन कोच ने इसे 'पूर्ण घोटाला' करार दिया।
अतिरिक्त समय के 102वें मिनट में जोनाथन टाह का हेडर जर्मनी को 2-1 की बढ़त दिलाने वाला था, लेकिन वीडियो असिस्टेंट रेफरी (वीएआर) के इशारे पर मोरक्को के रेफरी जलाल जायद ने उस पल को उलट दिया। नथानियल ब्राउन के कॉर्नर पर टाह ने शानदार छलांग लगाकर गेंद को जाल में पहुंचाया, मगर रीप्ले में दिखा कि इससे ठीक पहले जर्मन डिफेंडर वाल्डेमार एंटोन ने पैराग्वे के गोलकीपर ओरलांडो गिल को हल्का सा धक्का देकर जमीन पर गिरा दिया था। रेफरी ने साइडलाइन मॉनिटर पर नजर डाली और गोल रद्द कर दिया। इसके बाद मैच 1-1 की बराबरी पर खत्म हुआ और पेनल्टी शूटआउट में पैराग्वे ने 4-3 से जीत दर्ज कर जर्मनी को विश्व कप के अंतिम-32 से ही बाहर कर दिया।
फीफा के रेफरी प्रमुख पियरलुइगी कोलिना ने एक आधिकारिक बयान में इस फैसले का बचाव किया। उन्होंने कहा कि रेफरियों को पहले ही निर्देश दिया गया था कि वे उन स्थितियों पर खास नजर रखें जहां आक्रमणकारी खिलाड़ी गेंद में कोई दिलचस्पी न दिखाकर जानबूझकर, चाहे मामूली रूप से ही सही, विपक्षी खिलाड़ी की गति को बाधित करते हैं और उसे बचाव करने से रोकते हैं। कोलिना ने जोर देकर कहा कि यह सिद्धांत विशेष रूप से तब लागू होता है जब इसका मकसद गोलकीपर को प्रभावी ढंग से गोल बचाने से रोकना हो। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कोचों और खिलाड़ियों को इस बारे में पहले से सूचित किया गया था, इसलिए ऐसे फैसलों पर हैरानी नहीं होनी चाहिए।
जर्मनी में इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया हुई। राष्ट्रीय कोच यूलियन नागल्समान ने मैच के बाद कहा, “यह सिर्फ घोटाला नहीं, पूर्ण घोटाला है। यह किसी भी कोण से फाउल नहीं था।” बिल्ड अखबार के रेफरी विशेषज्ञ मानुएल ग्रेफे ने इसे “मजाक” और “तमाशा” बताया, जबकि मैगेंटा टीवी के विशेषज्ञ पैट्रिक इट्रिख ने इसे स्पष्ट गलत फैसला नहीं माना। दूसरी ओर, फॉक्स स्पोर्ट्स पर पूर्व अंग्रेज रेफरी मार्क क्लैटनबर्ग ने कहा कि यह स्पष्ट फाउल था। जर्मन चैनल जेडडीएफ के पूर्व रेफरी थोरस्टन किन्होफर ने वीएआर के हस्तक्षेप को गलत ठहराते हुए कहा कि रेफरी में गोल को बरकरार रखने का साहस नहीं था।
दक्षिण एशियाई मीडिया ने फीफा की सफाई को प्रमुखता से रखा। बांग्लादेश के प्रोथोम आलो ने कोलिना के बयान को विस्तार से छापा और बताया कि फीफा ने समय बर्बादी रोकने के लिए गोल किक, थ्रो-इन और खिलाड़ी बदलने पर सख्त समयसीमा भी लागू की है। अरब जगत में मोरक्को के हेस्प्रेस ने इस बात पर ध्यान खींचा कि मोरक्को के रेफरी जलाल जायद ने वीएआर की मदद से यह फैसला लिया और जर्मन कोच की कड़ी आलोचना को भी रेखांकित किया।
इस हार के साथ जर्मनी का विश्व कप सफर अप्रत्याशित रूप से जल्दी समाप्त हो गया, जबकि पैराग्वे ने अंतिम-16 में प्रवेश कर लिया। फीफा की नई रेफरी नीतियों पर बहस अब और तेज हो गई है, लेकिन मैदान पर नतीजा यही रहा कि एक मामूली संपर्क ने पूरे मुकाबले की तस्वीर बदल दी।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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जर्मन प्रेस ताह के अस्वीकृत गोल को लेकर हंगामे में है। कुछ आउटलेट इसे 'पूर्ण घोटाला' बता रहे हैं और कोच नागेल्समान के गुस्से को प्रमुखता दे रहे हैं, जबकि पूर्व रेफरी ग्रेफे फीफा रेफरी प्रमुख कोलिना की खिंचाई कर रहे हैं। इस फैसले को एक डकैती के रूप में पेश किया जा रहा है जिसने जर्मनी को विश्व कप से बाहर कर दिया।
फीफा ने स्पष्ट किया कि जर्मनी का गोल रद्द करने का वीएआर का फैसला सही था। रेफरी प्रमुख कोलिना ने समझाया कि नियम समय बर्बाद करने और रुकावट डालने से रोकने के लिए हैं, और यह निर्णय सौ प्रतिशत सही था। रिपोर्ट तकनीकी व्याख्या तक सीमित है, बिना कोई पक्ष लिए।
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