
ट्रंप का दावा: अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने फोन कर मांगा समझौता, लेकिन भरोसे पर संशय
अमेरिकी राष्ट्रपति ने नाटो शिखर सम्मेलन से लौटते हुए कहा कि ईरान ने संपर्क कर समझौते की इच्छा जताई, पर वे इसके योग्य हैं या नहीं, इस पर प्रश्न उठाया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंकारा में नाटो शिखर सम्मेलन से लौटते हुए एयर फोर्स वन पर पत्रकारों को बताया कि ईरानी नेतृत्व ने हाल ही में फोन कर समझौते की पेशकश की है। ट्रंप ने कहा, “वे बहुत ज़्यादा समझौता चाहते हैं, लेकिन मुझे नहीं पता कि वे इसके योग्य हैं या नहीं।” उन्होंने यह भी घोषणा की कि दोनों देशों के बीच युद्धविराम समाप्त हो चुका है और अमेरिका हर ईरानी हमले के जवाब में 20 गुना बड़ी सैन्य कार्रवाई कर रहा है।
वाशिंगटन के रुख़ के अनुसार, यह सैन्य अभियान ईरान द्वारा होर्मुज़ जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाज़ों पर हमलों की सीधी प्रतिक्रिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने बताया कि नए हमलों में लगभग 90 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिनमें वायु रक्षा प्रणालियाँ, तटीय निगरानी केंद्र और मिसाइल-ड्रोन भंडार शामिल हैं। अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया गया कि नाटो बैठक के दौरान ही ईरानी हमलों से ट्रंप विशेष रूप से नाराज़ हुए, क्योंकि इससे अंतरराष्ट्रीय मंच पर उनकी छवि प्रभावित हुई। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर चेतावनी दी कि अगर ईरान ने दोबारा हमला किया तो स्थिति “बहुत बदतर” हो जाएगी। साथ ही, अंकारा में उन्होंने यूरोपीय सहयोगियों से पर्याप्त समर्थन न मिलने पर निराशा जताई।
तेहरान के सैन्य और राजनयिक सूत्रों ने इसके विपरीत रुख़ अपनाया। ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी हमलों को “समझौतों का खुला उल्लंघन” और “दुर्भावना का प्रमाण” बताया। इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमलों की पुष्टि की और चेतावनी दी कि यदि अमेरिकी कार्रवाई जारी रही तो क्षेत्र के अन्य अड्डों को भी निशाना बनाया जाएगा। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, कोई भी समझौता तभी संभव है जब अमेरिका क्षेत्र से अपनी सेना हटाए, ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी समाप्त करे, क्षतिपूर्ति दे और सभी एकतरफा प्रतिबंध वापस ले। साथ ही, ईरान ने संकेत दिया कि यदि उस पर हमला हुआ तो वह अपनी परमाणु सिद्धांत की समीक्षा कर सकता है।
यह संकट फरवरी में अमेरिकी-इज़राइली हमलों से शुरू हुआ, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अली ख़ामेनेई मारे गए थे। 17 जून को एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए, जिसमें 60 दिनों के युद्धविराम और परमाणु मुद्दे पर बातचीत का प्रावधान था, लेकिन प्रतिबंधों और होर्मुज़ की सुरक्षा पर असहमति के चलते यह विफल हो गया। वैश्विक ऊर्जा बाज़ार पर तत्काल प्रभाव पड़ा: ब्रेंट क्रूड की कीमत 7% से अधिक उछलकर 79 डॉलर प्रति बैरल पार कर गई, और एशियाई-यूरोपीय शेयर बाज़ारों में गिरावट दर्ज की गई। दक्षिण एशिया के लिए, होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़रने वाली तेल आपूर्ति में किसी भी बाधा से ऊर्जा आयात की लागत बढ़ सकती है और मुद्रास्फीति का दबाव बन सकता है।
फ़िलहाल, कूटनीतिक रास्ता अवरुद्ध है। अमेरिकी पक्ष ईरान के पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण पर ज़ोर दे रहा है, जबकि ईरान इसे “अवास्तविक” मांग बताता है। ख़ामेनेई का अंतिम संस्कार गुरुवार को संपन्न होने वाला है, जिसके बाद ईरानी नीति में बदलाव की संभावना पर क्षेत्रीय विशेषज्ञ नज़र रखे हुए हैं। नाटो बैठक में ट्रांसअटलांटिक मतभेद उजागर हुए, जिससे अमेरिकी एकतरफा कार्रवाई की संभावना और बढ़ गई है। अगले कुछ दिनों में सैन्य टकराव के और गहराने की आशंका है, जबकि बातचीत की कोई निर्धारित तिथि सामने नहीं आई है।
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | −0.20 | neutral |
|---|---|---|
| अरब खाड़ी प्रेस | +0.40 | aligned |
| रूसी और सीआईएस प्रेस | 0.00 | neutral |
Trump tries to justify the raids, but Iran denies any contact: the official US version does not hold up against the facts.
The statements of Trump and the Iranian denial are juxtaposed without resolution, leaving the reader to judge the veracity.
Latin American media omit the proportion of retaliation (20 to 1) and Trump's insult to Iranian leaders, softening the harshness of the US position.
Iran has been brought to its knees and now begs for a deal: the United States has won on the battlefield.
The 20-to-1 force ratio is emphasized to present the Iranian request as an act of submission, not a genuine diplomatic initiative.
Gulf media omit the Iranian denial and the fact that Trump called Iranian leaders 'scum', elements that could undermine the narrative of a clean capitulation.
Trump insults Iranian leaders and doubts their word, while Tehran responds with military strikes: tension remains high and neither side is reliable.
The statements of Trump and Iranian actions are reported without filter, but the inclusion of Trump's offensive term creates an impression of personal hostility that makes a deal unlikely.
Russian media do not mention the 20-to-1 ratio nor the detailed Iranian denial, focusing instead on the confrontational rhetoric.
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