
90 के दशक की अलमारी से निकलकर फिर सड़कों पर: लंबा कोट, कैप्री और पॉलिश्ड हेयरकट की वापसी
मिलान के रनवे से लेकर ब्यूनस आयर्स की सड़कों तक, तीन दशक पुराने सिल्हूट नए कपड़ों और सोच के साथ लौट रहे हैं।
नब्बे के दशक की सर्दियों में ब्यूनस आयर्स की एक सड़क पर नज़र दौड़ाएँ तो हर उम्र की औरतें एक ही चीज़ में लिपटी दिखती थीं: घुटनों के नीचे तक जाता एक लंबा ऊनी कोट। माएँ, दादियाँ, नानियाँ — सबकी अलमारी का यह अटूट हिस्सा था। फिर धीरे-धीरे यह कोट अलमारी के पीछे खिसक गया, उसकी जगह ज़्यादा कैज़ुअल जैकेटों ने ले ली। अब, 2026 की सर्दियों से ठीक पहले, मिलान के फ़ैशन शोज़ में मैक्स मारा और टोटेम जैसे ब्रांड इसे फिर से कैटवॉक पर ले आए हैं। इटैलियन स्टाइलिस्ट इसे ‘सबसे एलिगेंट परिधान’ कह रहे हैं, लेकिन शर्त यह है कि इसे तीस साल पहले की तरह नहीं पहना जाएगा।
यही कहानी कैप्री पैंट की भी है। इंडोनेशियाई फ़ैशन मीडिया बता रहा है कि पिंडलियों पर खत्म होने वाली यह पैंट, जो कभी 90 के दशक का ‘प्राइमाडोना’ हुआ करती थी, अब मियू मियू, जैकमस और अलाइया के कलेक्शंस में नज़र आ रही है। बेला हदीद और डुआ लीपा जैसी सेलिब्रिटी इसे स्ट्रीट स्टाइल का हिस्सा बना चुकी हैं। मेक्सिको से आती स्टाइल गाइडें साफ कहती हैं: इस बार खेल जूतों का है। क्योंकि पैंट का पायँचा टखनों को पूरी तरह खुला छोड़ता है, इसलिए बैले फ़्लैट्स, किटन हील्स और म्यूल्स जैसे हल्के डिज़ाइन ही सिल्हूट को खिंचाव देते हैं। चंकी स्नीकर्स या बूट्स से परहेज़ की सलाह दी जा रही है, वरना पैर देखने में छोटे लग सकते हैं।
कपड़ों के साथ-साथ बालों की कहानी भी अतीत की ओर मुड़ी है। अर्जेंटीना के सैलूनों में ‘मीडिया मेलेना पुलिदा’ यानी पॉलिश्ड मिड-लेंथ कट की माँग बढ़ रही है, जो अस्सी के दशक का फ़ेवरिट था। स्टाइलिस्ट रोसी फ़र्नांडेज़ के अनुसार, यह कट कॉलरबोन तक आता है और बारीक बालों को घनापन और हरकत देता है। वहीं, स्पेन की स्टाइलिस्ट नोएलिया हिमेनेज़ 60 से ऊपर की गोल चेहरे वाली महिलाओं के लिए ‘बिक्सी’ कट की सिफ़ारिश कर रही हैं — यह पिक्सी और बॉब का मेल है, जो चेहरे को हल्का और उठा हुआ दिखाता है। दोनों ही कट्स का वादा एक जैसा है: कम मेंटेनेंस में ज़्यादा स्ट्रक्चर।
यह बदलाव सिर्फ़ बाहरी सजावट तक सीमित नहीं है। ब्राज़ील के एस्थेटिक क्लीनिकों में चेहरे की लेज़र हेयर रिमूवल की ओर रुख तेज़ी से बढ़ा है। विशेषज्ञ तालोना नायला डी मार्को बताती हैं कि महिलाएँ हार्मोनल बदलावों या पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम के कारण ठुड्डी और जबड़े पर उग आए मोटे बालों से छुटकारा चाहती हैं, जबकि पुरुष शेविंग से होने वाली फॉलिकुलाइटिस की जलन से बचने के लिए यह इलाज करवा रहे हैं। चेहरे की नाज़ुक त्वचा के लिए सख्त प्रोटोकॉल ज़रूरी है — रोज़ाना सनस्क्रीम और सेशन के बीच बालों को जड़ से न उखाड़ना।
इन सबके पीछे एक साझा सुर है: ‘क्वाइट लग्ज़री’ यानी खामोश विलासिता की चाहत। लंबा कोट हो या कैप्री, पॉलिश्ड हेयरकट हो या स्थायी स्किन सॉल्यूशन — हर चीज़ का रुझान ऐसे क्लासिक्स की ओर है जो मौसम और सालों से परे हों। इटैलियन स्टाइलिस्ट कहते हैं कि नया ओवरकोट हल्के फ़ैब्रिक और कम कड़े सिल्हूट के साथ आ रहा है, ताकि वह पुराने ज़माने की वर्दी न लगे। इसी तरह, कैप्री को ढीली शर्ट या बॉक्सी ब्लेज़र के साथ पहनने की सलाह दी जा रही है ताकि ‘ऊपर ढीला, नीचे चुस्त’ का अनुपात बने। यह कोई रेट्रो नकल नहीं, बल्कि अतीत के सिल्हूटों को आज की ज़रूरतों के हिसाब से ढालने की कोशिश है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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