
अर्जेंटीना की नाटकीय वापसी, मिस्र के कोच का विवादित इशारा और थूकने का आरोप
विश्व कप 2026 के प्री-क्वार्टर फ़ाइनल में अर्जेंटीना ने 0-2 से पिछड़ने के बाद मिस्र को 3-2 से हराया, लेकिन मैच के बाद मिस्र के कोच हुसाम हसन के आचरण और बयानों ने विवाद खड़ा कर दिया।
अटलांटा के मर्सिडीज़-बेंज़ स्टेडियम में मंगलवार रात अर्जेंटीना ने विश्व कप इतिहास की एक यादगार वापसी दर्ज की। मिस्र ने पहले हाफ़ में यासर इब्राहिम और मुस्तफ़ा ज़िको के गोलों से 2-0 की बढ़त बना ली थी, और लियोनेल मेसी का पेनल्टी मिस भी हो चुका था। लेकिन 79वें मिनट में क्रिस्टियन रोमेरो के हेडर, 83वें मिनट में मेसी के बराबरी के गोल और फिर इंजुरी टाइम के दूसरे मिनट में एंज़ो फ़र्नांडीज़ के हेडर ने स्कोर 3-2 कर दिया और गत चैंपियन को क्वार्टर फ़ाइनल में पहुँचा दिया।
मैच के अंतिम क्षणों में मिस्र के कोच हुसाम हसन ने फ़ीफ़ा के आधिकारिक नस्लवाद-विरोधी इशारे — कलाइयों पर बाज़ू क्रॉस कर ‘X’ बनाना — का प्रयोग करते हुए रेफ़री फ़्राँस्वा लेतेक्सिए से शिकायत की कि दर्शक दीर्घा से नस्लीय टिप्पणियाँ हो रही हैं। रेफ़री ने प्रोटोकॉल सक्रिय नहीं किया और हसन को पीला कार्ड दिखाया। इसके बाद हसन और उनके भाई इब्राहिम (सहायक कोच) ने मैदान छोड़ते समय अर्जेंटीना के कोच लियोनेल स्कालोनी को घेरकर गुस्से में कुछ कहा; स्कालोनी बिना प्रतिक्रिया दिए आगे बढ़ गए। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में हसन इज़राइल का झंडा लहरा रहे एक अर्जेंटीनी प्रशंसक की ओर थूकते भी दिखे।
मिस्र के पक्षकारों ने रेफ़री और वीएआर के कई फ़ैसलों पर सवाल उठाए। मिस्र फ़ुटबॉल महासंघ ने फ़ीफ़ा में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई और रेफ़री लेतेक्सिए को भविष्य के मैचों से हटाने की माँग की। मिस्र के खिलाड़ी मोहम्मद सलाह ने कहा कि “जब हमारा गोल रद्द करने के लिए पाँच मिनट पीछे जाकर फ़ाउल ढूँढ़ा जा सकता है, तो पेनल्टी एरिया में मुझे गिराए जाने पर रीप्ले क्यों नहीं देखा गया।” कोच हसन ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा कि “यह साफ़ तौर पर एक पूर्वनियोजित मैच था” और “शायद वे चाहते हैं कि विश्व चैंपियन और मेसी मार्केटिंग के लिए टूर्नामेंट में बने रहें।”
हसन का यह रुख़ उनके पहले के राजनीतिक प्रदर्शनों से जुड़ा है। ऑस्ट्रेलिया को हराकर अंतिम-16 में पहुँचने पर उन्होंने फ़लस्तीनी झंडा लहराया था और मैच से पहले कहा था कि “जो फ़लस्तीनी जनता के लिए कुछ महसूस नहीं करता, वह इंसान नहीं है।” इस पृष्ठभूमि में इज़राइली झंडे वाले प्रशंसक से उनकी झड़प ने घटना को खेल से परे एक क्षेत्रीय बहस में बदल दिया। मिस्र और अरब मीडिया ने हसन के आक्रोश को टीम के प्रति प्रतिबद्धता और फ़लस्तीनी समर्थन के रूप में देखा, जबकि यूरोपीय और लैटिन अमेरिकी मीडिया ने इसे हार की निराशा में असंयमित व्यवहार बताया।
यह विवाद ऐसे समय आया है जब फ़ीफ़ा नस्लवाद-विरोधी प्रोटोकॉल को सख़्ती से लागू करने का दावा करता है। हसन के ‘X’ इशारे पर रेफ़री की निष्क्रियता और फिर कोच को पीला कार्ड दिखाने ने प्रोटोकॉल की व्यावहारिकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। भारतीय फ़ुटबॉल प्रशंसकों के लिए यह प्रकरण इसलिए भी ध्यान खींचता है क्योंकि देश में विश्व कप की बढ़ती लोकप्रियता के बीच ऐसे विवाद खेल की निष्पक्षता और शासन पर बहस को जन्म देते हैं। अर्जेंटीना अब क्वार्टर फ़ाइनल में स्विट्ज़रलैंड से भिड़ेगा, जिसने कोलंबिया को पेनल्टी शूटआउट में हराया, जबकि मिस्र की ऐतिहासिक यात्रा विवादों के साथ समाप्त हुई।
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | +0.20 | neutral |
|---|---|---|
| उप-सहारा अफ़्रीकी प्रेस | −0.60 | critical |
| भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस | 0.00 | neutral |
अर्जेंटीना की जीत साफ थी; मिस्र के विरोध सिर्फ निराशा हैं और कोच का व्यवहार अनुचित था।
मिस्र के विरोधों को भावनात्मक प्रतिक्रियाओं के रूप में वर्णित करके जीत को सामान्य किया जाता है, और हसन के इशारे को नस्ल-विरोधी प्रोटोकॉल के रूप में समझाया जाता है, जिससे आरोपों का भार कम हो जाता है।
हसन द्वारा फिलिस्तीनी झंडा लहराने या इजरायली प्रशंसकों पर थूकने के आरोपों का कोई उल्लेख नहीं है, जो घटना को और अधिक राजनीतिक बना देता।
फीफा ने अर्जेंटीना का पक्ष लिया; मिस्र की हार अन्यायपूर्ण थी और हसन में इसे उजागर करने का साहस है।
एक पीड़ित-और-साहस की कथा बनाई गई है, जो सबूतों के अभाव के बावजूद आरोपों को सत्य के रूप में प्रस्तुत करती है, और हसन के स्वयं के नस्ल-विरोधी इशारे के संदर्भ को छोड़ देती है।
इस तथ्य का कोई उल्लेख नहीं है कि हसन ने स्वयं फीफा के नस्ल-विरोधी प्रोटोकॉल को सक्रिय किया, जिससे पक्षपात के उनके आरोप कमजोर हो जाते।
हसन एक विवादास्पद व्यक्ति हैं: उनके राजनीतिक कार्य और मैच के बाद का व्यवहार जनमत को विभाजित करता है।
एक तटस्थ लहजा अपनाया जाता है, बिना पक्ष लिए विभिन्न प्रतिक्रियाओं को सूचीबद्ध किया जाता है, जिससे निष्पक्षता का आभास होता है।
अर्जेंटीना के दृष्टिकोण और मैच के विवरण की रिपोर्ट नहीं की गई है, केवल हसन के कार्यों पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
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