
ट्रंप प्रशासन ने लुप्तप्राय प्रजातियों के आवास संरक्षण को सीमित किया, आव्रजन नियमों में भी बदलाव
अमेरिका में शुक्रवार को अंतिम रूप दिए गए नियमों के तहत लुप्तप्राय प्रजातियों के आवासों पर विकास की राह आसान हुई, जबकि एच-1बी वीज़ा और अस्थायी संरक्षित स्थिति में भी अहम संशोधन प्रस्तावित हैं।
अमेरिकी प्रशासन ने शुक्रवार को लुप्तप्राय प्रजाति अधिनियम (ईएसए) की एक केंद्रीय परिभाषा को बदलते हुए 'नुकसान' के दायरे से आवास विनाश को बाहर कर दिया। इस कदम का तात्कालिक प्रभाव यह होगा कि तेल-गैस ड्रिलिंग, खनन और कटाई जैसी गतिविधियों को अब संरक्षित प्रजातियों के महत्वपूर्ण आवासों पर तब तक अनुमति दी जा सकेगी जब तक सीधे तौर पर वन्यजीवों की मौत या चोट न हो। आंतरिक सचिव डग बर्गम ने इसे 'सामान्य ज्ञान की बहाली' और निजी संपत्ति अधिकारों का सम्मान बताया, जबकि वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक ने मछुआरों पर लंबे समय से पड़ रहे बोझ का हवाला दिया।
यह बदलाव 2024 के सुप्रीम कोर्ट के लोपर ब्राइट बनाम राइमोंडो फैसले पर टिका है, जिसने संघीय एजेंसियों की कानूनी व्याख्या की शक्ति को सीमित कर दिया था। प्रशासन का तर्क है कि 1995 से चली आ रही वह व्याख्या, जिसमें आवास में महत्वपूर्ण बदलाव को 'नुकसान' माना जाता था, कांग्रेस की मूल मंशा से परे थी। इसके विपरीत, पर्यावरण संगठन अर्थजस्टिस और सेंटर फॉर बायोलॉजिकल डायवर्सिटी ने अदालत जाने की घोषणा की है, उनका कहना है कि आवास विनाश विलुप्ति का सबसे बड़ा कारण है और इस नियम का कोई वैज्ञानिक या कानूनी आधार नहीं है।
नियम परिवर्तन के पीछे क्षेत्रीय आर्थिक दबाव साफ दिखते हैं। टेक्सास के पर्मियन बेसिन में ड्यून्स सेजब्रश लिज़र्ड और ग्रेट प्लेन्स में लेसर प्रेयरी-चिकन के संरक्षण से ऊर्जा परियोजनाओं और कृषि पर पड़ने वाले प्रतिबंधों का उद्योग जगत लंबे समय से विरोध कर रहा था। प्रशांत उत्तर-पश्चिम में उत्तरी चित्तीदार उल्लू के 1990 के संरक्षण से लकड़ी उद्योग की अनुमानित 16,000 से 32,000 नौकरियां प्रभावित हुई थीं, जिसका हवाला प्रशासन ने अत्यधिक नियमन के उदाहरण के रूप में दिया।
इसी दिन आव्रजन नीति में भी दो अलग-अलग घटनाक्रम सामने आए। गृह सुरक्षा विभाग ने हेती, सीरिया और यमन सहित सात देशों के नागरिकों के लिए अस्थायी संरक्षित स्थिति (टीपीएस) के वर्क परमिट को कुछ सप्ताह के लिए बढ़ा दिया, जो सुप्रीम कोर्ट द्वारा टीपीएस समाप्त करने की अनुमति के बाद आया है। दूसरी ओर, एच-1बी वीज़ा कार्यक्रम में प्रस्तावित बदलावों से भारतीय आईटी कंपनियों और छात्रों पर गहरा असर पड़ सकता है। नियमों के तहत तीसरे पक्ष के क्लाइंट स्थलों पर काम करने वाले वीज़ा धारकों के लिए सख्त दस्तावेज़ीकरण अनिवार्य होगा और प्रवेश स्तर की मज़दूरी सीमा 17वें से बढ़ाकर 34वें प्रतिशतक कर दी जाएगी। अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के अनुसार, भारत से जाने वाले कुल छात्रों में से 50 प्रतिशत तेलंगाना और आंध्र प्रदेश से होते हैं, जिन पर निश्चित अवधि वाले प्रवास और ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (ओपीटी) के कड़े नियमों का सीधा प्रभाव पड़ेगा।
ईएसए नियम को अदालत में चुनौती मिलना तय है, जबकि एच-1बी संशोधन अगस्त से प्रभावी होने की उम्मीद है। टीपीएस वर्क परमिट की नई समय-सीमा 24 जुलाई निर्धारित की गई है, जिसके बाद आगे की कानूनी लड़ाई या नीतिगत फैसले की राह देखनी होगी।
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | −0.40 | critical |
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| अरब खाड़ी प्रेस | −0.30 | critical |
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | −0.80 | critical |
ट्रम्प प्रशासन ने लापरवाही से लुप्तप्राय प्रजातियों के लिए एक मौलिक संरक्षण छीन लिया है, जिससे उद्योग को दण्डमुक्ति से आवासों को नष्ट करने की अनुमति मिल गई है। यह प्रजातियों को विलुप्त होने से बचाने के कानून के मूल इरादे के साथ विश्वासघात है।
ब्लॉक पिछले नियम को अतिरेक के रूप में फ्रेम करने के लिए 'हथियारीकरण' और 'बोझ' की भाषा का उपयोग करता है, लेकिन फिर प्रजातियों के अस्तित्व के बारे में वैज्ञानिक और नैतिक तर्कों का प्रतिकार करता है।
ब्लॉक अन्य ब्लॉकों में उल्लिखित कानूनी चुनौती को छोड़ देता है, इसके बजाय तत्काल पर्यावरणीय प्रभाव पर ध्यान केंद्रित करता है।
ट्रम्प प्रशासन ने लुप्तप्राय प्रजाति अधिनियम में 'नुकसान' की परिभाषा को संशोधित किया है, जिससे आवास सुरक्षा कम हो गई है, और इस बदलाव को पहले से ही अदालत में चुनौती दी जा रही है। प्रजातियों को बचाने में कानून की ऐतिहासिक सफलता पर ध्यान दिया गया है, लेकिन नया नियम विकास को प्राथमिकता देता है।
ब्लॉक एक अलग, तथ्यात्मक रिपोर्टिंग शैली अपनाता है, बिना स्पष्ट निर्णय के परिवर्तन और कानूनी चुनौती प्रस्तुत करता है, जिससे पाठक चिंता का अनुमान लगा सके।
ब्लॉक पर्यावरण समूहों की कड़ी निंदा और जोखिम में प्रजातियों के विशिष्ट उदाहरणों को छोड़ देता है, जो अन्य ब्लॉकों में मौजूद हैं।
ट्रम्प प्रशासन ने लुप्तप्राय प्रजातियों के लिए 50 साल पुरानी सुरक्षा को नष्ट कर दिया है, उनके आवासों को लॉगिंग और खनन के लिए खोल दिया है। यह पर्यावरणीय बर्बरता का एक कार्य है जो वन्यजीव अस्तित्व पर कॉर्पोरेट लाभ को प्राथमिकता देता है।
ब्लॉक निर्णय को एक भयावह प्रतिगमन के रूप में फ्रेम करने के लिए भावनात्मक भाषा और ऐतिहासिक विरोधाभास का उपयोग करता है, नैतिक आक्रोश की अपील करता है।
ब्लॉक कानूनी चुनौतियों या ट्रम्प-समर्थक औचित्य के किसी भी उल्लेख को छोड़ देता है, केवल प्रजातियों के लिए नकारात्मक परिणामों पर ध्यान केंद्रित करता है।
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