
मानसून की सुस्त चाल से भारत में 35% वर्षा की कमी, कोलंबिया में भारी बारिश का अलर्ट
अल नीनो के प्रभाव से भारत में मानसून की बेहद धीमी शुरुआत और कोलंबिया में तीव्र वर्षा का दोहरा संकट, उपग्रह तस्वीरों ने बढ़ाई चिंता।
भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून की बेहद सुस्त चाल ने चिंता गहरा दी है। सामान्यतः 8 जून तक मुंबई पहुंचने वाला मानसून अब तक महाराष्ट्र और कोंकण तट पर थमा हुआ है, जिससे देशभर में वर्षा की कमी 35 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यूरोपीय और अमेरिकी मौसम उपग्रहों की ताजा तस्वीरों में मध्य जून के बावजूद भारत के बड़े हिस्से पर मानसूनी बादलों का असामान्य रूप से विरल आवरण दिखाई दे रहा है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, केवल उत्तर-पश्चिम भारत में सामान्य से 5 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है, जबकि मध्य भारत में 63 प्रतिशत, पूर्व और पूर्वोत्तर में 43 प्रतिशत और दक्षिणी प्रायद्वीप में 14 प्रतिशत की भारी कमी दर्ज की गई है। छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, ओडिशा और तेलंगाना के कुछ हिस्सों में इस सप्ताह लू चलने की संभावना ने जल संकट और तापमान वृद्धि की आशंका को और बढ़ा दिया है। विशेषज्ञ इस विलंब को मजबूत होते अल नीनो से जोड़ रहे हैं, जो प्रशांत महासागर के तापमान में वृद्धि कर भारतीय मानसून को कमजोर करता है।
इसके विपरीत, दक्षिण अमेरिका में कोलंबिया इस समय भारी बारिश की चपेट में है। कोलंबिया के मौसम एवं पर्यावरण अध्ययन संस्थान (आइडियम) के अनुसार, 16 से 19 जून के बीच कैरेबियाई और प्रशांत तटीय क्षेत्रों में सर्वाधिक वर्षा होने का अनुमान है, जबकि उष्णकटिबंधीय लहर संख्या 14 के आगे बढ़ने से कई नदी घाटियों में आकस्मिक बाढ़ का खतरा बना हुआ है। राजधानी बोगोटा में हल्की बारिश, विशेषकर दोपहर और रात के समय, जारी रहने की संभावना है। आइडियम ने ओरिनोकिया, अमेज़ोनिया और उत्तरी एंडियन क्षेत्रों में आंशिक से पूर्ण बादल छाए रहने और कई स्थानों पर तीव्र वर्षा की चेतावनी जारी की है। अल नीनो के चलते अमेज़न क्षेत्र के अत्यधिक प्रभावित होने की आशंका भी जताई गई है, जो वैश्विक जलवायु पैटर्न की जटिलता को रेखांकित करता है।
हालांकि, भारत के लिए राहत की कुछ संभावनाएं भी नजर आ रही हैं। भारतीय मौसम विभाग ने बताया है कि एक पश्चिमी विक्षोभ के कारण 18 से 22 जून के बीच पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र और उत्तर-पश्चिम भारत के हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड के साथ-साथ पूर्वी राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली और पंजाब में छिटपुट वर्षा की संभावना है। विभाग का यह भी कहना है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून के अगले कुछ दिनों में पूर्वी और मध्य भारत की ओर आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं। फिलहाल मानसून दक्षिणी महाराष्ट्र और ओडिशा के कुछ हिस्सों तक पहुंचा है, लेकिन इसकी गति अभी भी सामान्य से काफी पीछे है।
आगे का विश्लेषण मिला-जुला संकेत देता है। अल नीनो के प्रभाव से भारत में मानसून की कुल वर्षा सामान्य से कम रहने की आशंका है, हालांकि जून के अंत तक इसके पुनर्जीवित होने के पूर्वानुमान से कृषि और जल भंडारण को कुछ सहारा मिल सकता है। दूसरी ओर, कोलंबिया में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बरकरार है, और अधिकारी निगरानी बनाए हुए हैं। दोनों ही स्थितियां इस बात का प्रमाण हैं कि कैसे एक वैश्विक जलवायु घटना – अल नीनो – विभिन्न भूगोलों में विपरीत चरम मौसम को जन्म दे सकती है। भारत और दक्षिण एशिया के लिए आने वाले सप्ताह महत्वपूर्ण होंगे, जब मानसून की वापसी की गति और तीव्रता तय करेगी कि गर्मी और जल संकट कितना गहराता है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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भारत में मानसून गंभीर रूप से विलंबित है, जून के मध्य तक 35% वर्षा की कमी दर्ज की गई। उपग्रह चित्रों में असामान्य रूप से कम बादल दिखाई दे रहे हैं, जबकि लू और जल संकट बड़े क्षेत्रों को चिंता में डाल रहे हैं। जून के अंत तक स्थिति में सुधार की उम्मीद है, लेकिन चिंता बनी हुई है।
कोलंबिया में इस सप्ताह व्यापक वर्षा का पूर्वानुमान है, जिसमें कैरेबियन और प्रशांत क्षेत्रों में सबसे अधिक वर्षा होगी। राष्ट्रीय मौसम संस्थान ने बादल छाए रहने और संभावित तूफानों की सूचना दी है, अचानक बाढ़ की चेतावनी जारी है। जनता को अपडेट का पालन करने की सलाह दी गई है।
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