
इज़राइल-हिज़्बुल्लाह युद्धविराम पर सहमति, पर दक्षिण लेबनान में सेना बनाए रखने की घोषणा
अमेरिका और कतर की मध्यस्थता से शुक्रवार शाम युद्धविराम लागू हुआ, लेकिन इज़राइली नेतृत्व ने स्पष्ट किया कि सेना 'सुरक्षा क्षेत्र' में तब तक रहेगी जब तक ज़रूरी हो।
दक्षिण लेबनान में चार इज़राइली सैनिकों की मौत के बाद भड़के ताज़ा संघर्ष के बीच शुक्रवार को इज़राइल और हिज़्बुल्लाह के बीच युद्धविराम पर सहमति बनी। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह समझौता स्थानीय समयानुसार शाम चार बजे से प्रभावी हुआ, जिसे वाशिंगटन और दोहा ने ईरान की सहायता से तैयार किया। हालाँकि, इसके कुछ ही घंटों पहले और बाद में इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और रक्षा मंत्री यिसराइल कात्ज़ ने अलग-अलग बयानों में कहा कि इज़राइली सेना दक्षिण लेबनान में अपने घोषित 'सुरक्षा क्षेत्र' में बनी रहेगी और किसी भी हमले का 'बहुत भारी कीमत' वसूल की जाएगी।
इज़राइली पक्ष ने इस रुख़ को उत्तरी बस्तियों की सुरक्षा के लिए आवश्यक बताया। नेतन्याहू ने सोशल मीडिया पर लिखा कि सेना हर ख़तरे को विफल करेगी और ज़रूरत पड़ने तक दक्षिण लेबनान में मौजूद रहेगी। रक्षा मंत्री कात्ज़ ने कहा कि यह क्षेत्र भूमध्यसागरीय तट से लेकर बोफ़ोर की पहाड़ियों तक फैला है और सेना वहाँ 'आतंकी ढाँचों' को नष्ट करेगी। इज़राइली सेना के प्रवक्ता ने इसकी गहराई दस किलोमीटर बताई और कहा कि वहाँ बलों को सुदृढ़ किया जाएगा। इन बयानों से संकेत मिलता है कि इज़राइल युद्धविराम को हिज़्बुल्लाह की ओर से किसी भी कार्रवाई न होने पर ही संघर्ष का अंत मानेगा, जबकि ज़मीनी उपस्थिति बनाए रखना उसकी रणनीति का हिस्सा है।
लेबनानी राष्ट्रपति जोसेफ़ आऊन ने इससे पहले व्यापक युद्धविराम को इज़राइली वापसी और लेबनानी सेना की तैनाती जैसे लंबित मुद्दों के समाधान का प्रवेश द्वार बताया था। हिज़्बुल्लाह ने इज़राइल पर पिछले महीनों के किसी भी युद्धविराम समझौते का पालन न करने का आरोप लगाया। अमेरिकी पक्ष ने, सीएनएन के सूत्रों के हवाले से, ईरान को सूचित किया कि इज़राइल लेबनान में हमले नहीं बढ़ाएगा और पहले भी कुछ उल्लंघनों को नज़रअंदाज़ कर चुका है। वाशिंगटन का मानना है कि अब हिज़्बुल्लाह को हमले रोकने की ज़िम्मेदारी लेनी होगी। यह पूरी प्रक्रिया अमेरिका-ईरान वार्ता को पटरी पर लाने के व्यापक प्रयासों से जुड़ी है, जो स्विट्ज़रलैंड में होने वाली थी लेकिन लेबनान में संघर्ष के कारण स्थगित कर दी गई थी।
ताज़ा युद्धविराम एक ऐसे दिन लागू हुआ जब दक्षिण लेबनान और बेक़ा घाटी पर इज़राइली हवाई हमलों में लेबनानी स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार कम से कम 18 लोग मारे गए और 33 घायल हुए। इससे पहले हिज़्बुल्लाह के हमले में चार इज़राइली सैनिक मारे गए थे, जिसके बाद इज़राइली सुरक्षा प्रतिष्ठान में दक्षिणी बेरूत उपनगरों पर व्यापक हमले या ज़मीनी कार्रवाई बढ़ाने पर विचार हुआ। हालाँकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सभी मोर्चों पर पूर्ण युद्धविराम की अपेक्षा जताई है, इज़राइल का 'सुरक्षा क्षेत्र' में बने रहने का आग्रह और हिज़्बुल्लाह का इसे संप्रभुता का उल्लंघन मानना समझौते की मज़बूती के लिए चुनौती बना हुआ है। अगला व्यावहारिक क़दम लेबनानी सेना की तैनाती और इज़राइली वापसी पर बातचीत का होना तय है, जिसे लेबनानी राष्ट्रपति ने अगले दौर की वाशिंगटन वार्ता के लिए प्राथमिकता बताया है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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इज़राइल ने कहा है कि वह दक्षिणी लेबनान में जब तक ज़रूरी होगा, सैन्य उपस्थिति बनाए रखेगा और अपने सैनिकों पर हमलों के लिए हिज़्बुल्लाह से भारी कीमत वसूल करेगा। प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि सेना इज़राइली बलों और क्षेत्र के लिए किसी भी ख़तरे को बेअसर करेगी।
ज़ायोनी शासन के प्रधानमंत्री ने भ्रम और अव्यवस्था की स्थिति में दावा किया कि हिज़्बुल्लाह अपने हमलों के लिए भारी कीमत चुकाएगा। उनकी धमकियाँ दक्षिणी लेबनान में इज़राइली सैनिकों की मौत के बाद आई हैं, जो प्रतिरोध के सामने शासन की घबराहट और विफलता को उजागर करती हैं।
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