
अमेरिका के 250वें जन्मदिन पर दो समानांतर आयोजन, गहराता राजनीतिक विभाजन
व्हाइट हाउस के फ्रीडम 250 और कांग्रेस के अमेरिका250 आयोग के बीच प्रतिस्पर्धा ने राष्ट्रीय एकता के प्रतीक उत्सव को दो खेमों में बांट दिया है।
संयुक्त राज्य अमेरिका की स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ पर वाशिंगटन डी.सी. और लॉस एंजेलिस में दो अलग-अलग आधिकारिक आयोजन हो रहे हैं, जो प्रशासन और द्विदलीय आयोग के बीच गहरी दरार को दर्शाते हैं। व्हाइट हाउस द्वारा गठित फ्रीडम 250 ने नेशनल मॉल पर ‘ग्रेट अमेरिकन स्टेट फेयर’ और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रैली का आयोजन किया है, जबकि कांग्रेस द्वारा 2016 में स्थापित अमेरिका250 आयोग ने लॉस एंजेलिस में क्वीन लतीफा, क्रिस स्टेपलटन और स्मैशिंग पम्पकिन्स जैसे कलाकारों के साथ एक गैर-राजनीतिक संगीत कार्यक्रम रखा है। रॉयटर्स/इप्सॉस के एक सर्वेक्षण के अनुसार, पांच में से एक अमेरिकी इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस नहीं मनाएगा, और दो-पांचवें लोगों को संदेह है कि देश अगले 250 वर्षों तक बचा रहेगा।
व्हाइट हाउस के फ्रीडम 250 ने राजधानी में सभी योजनाओं को अपने नियंत्रण में ले लिया, जिससे अमेरिका250 आयोग को केवल अन्य क्षेत्रों के कार्यक्रमों पर ध्यान केंद्रित करना पड़ा। टाइम पत्रिका की रिपोर्ट के अनुसार, आयोग की मूल योजना में स्मिथसोनियन द्वारा सांस्कृतिक उत्सव और विविध झांकियों वाली परेड शामिल थी, लेकिन फ्रीडम 250 ने इसे ट्रंप के राजनीतिक संदेशों से जोड़ दिया। कम से कम नौ डेमोक्रेटिक शासित राज्यों ने स्टेट फेयर में सीधे भाग लेने से इनकार कर दिया, और मार्टिना मैकब्राइड, यंग एमसी व द कमोडोर्स जैसे कलाकारों ने इसे ‘अत्यधिक राजनीतिक’ बताते हुए अपनी प्रस्तुतियां रद्द कर दीं। दूसरी ओर, ट्रंप समर्थकों का मानना है कि यह आयोजन अमेरिकी गौरव का प्रतीक है और राष्ट्रपति ने इसे ‘सबसे शानदार ट्रंप रैली’ करार दिया है।
इस विभाजन के ठोस परिणाम सामने आए हैं। एसोसिएटेड प्रेस की तस्वीरों में मेले के कई हिस्से खाली दिखे, और एक ईसाई संगीत कार्यक्रम में मात्र दो दर्शक मौजूद थे। उद्घाटन के अगले दिन फूड हॉल की बिजली गुल होने से आइसक्रीम पिघल गई। वहीं, 860,000 आतिशबाजी इकाइयों वाले रिकॉर्ड प्रदर्शन की पर्यावरणीय लागत और खर्च पर आलोचना हुई है। येल विश्वविद्यालय की इतिहासकार बेवर्ली गेज के अनुसार, ‘जश्न मनाने का विचार ही राजनीतिक और पक्षपातपूर्ण हो गया है।’ पेंसिल्वेनिया के बक्स काउंटी जैसे स्विंग क्षेत्रों में नागरिकों ने बताया कि वे या तो उत्साह से भाग ले रहे हैं या पूरी तरह से दूर रह रहे हैं, जो राष्ट्रीय मनोदशा का सूक्ष्म रूप है।
यह निराशावादी रुख उन आंकड़ों के विपरीत है जो दर्शाते हैं कि 1976 की तुलना में अमेरिकी जीवन कई मापदंडों पर बेहतर हुआ है। वॉक्स की रिपोर्ट के अनुसार, 1976 में औसत जीवन प्रत्याशा 72.6 वर्ष थी जो 2024 में 79 वर्ष हो गई, शिशु मृत्यु दर गिरी है, और धूम्रपान दर 37% से घटकर 10% रह गई है। फिर भी, 1976 के द्विशताब्दी समारोह में भारी भीड़ और आशावाद था, जबकि आज 77% अमेरिकी मानते हैं कि संस्थापक देश की वर्तमान स्थिति से निराश होंगे। एनबीसी न्यूज के एक सर्वेक्षण में झंडे के प्रदर्शन को लेकर भी गहरी बेचैनी पाई गई, जहां कुछ लोग इसे देशभक्ति का प्रतीक मानते हैं तो अन्य इसे राजनीतिक दबाव का संकेत।
फिलहाल, 4 जुलाई को ट्रंप की रैली और लॉस एंजेलिस का संगीत कार्यक्रम दोनों होंगे, और स्टेट फेयर 10 जुलाई तक जारी रहेगा। अमेरिका250 आयोग की अध्यक्ष रोजी रियोस ने कहा कि वे व्हाइट हाउस के साथ समानांतर रूप से काम कर रहे हैं, लेकिन आंतरिक दस्तावेजों के अनुसार दोनों समूहों के बीच बजट और विपणन को लेकर तनाव बना हुआ है। आगामी चुनावी मौसम में यह प्रतीकात्मक लड़ाई राष्ट्रीय पहचान पर बहस को और तेज कर सकती है।
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