
स्पेन ने अतिरिक्त समय में अर्जेंटीना को हराकर दूसरी बार विश्व कप जीता, ट्रॉफी समारोह में ट्रंप की मौजूदगी बनी चर्चा का विषय
फेरान टोरेस के 106वें मिनट के गोल ने स्पेन को 2026 फीफा विश्व कप दिलाया, जबकि पुरस्कार वितरण के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मंच पर रुकने और अर्जेंटीना के खिलाड़ियों द्वारा हाथ मिलाने से इनकार करने की घटनाओं ने खेल से इतर सुर्खियां बटोरीं।
न्यू जर्सी के मेटलाइफ स्टेडियम में खेले गए 2026 फीफा विश्व कप फाइनल में स्पेन ने मौजूदा चैंपियन अर्जेंटीना को अतिरिक्त समय में 1-0 से हराकर 16 साल बाद दूसरी बार विश्व विजेता बनने का गौरव हासिल किया। कड़ी टक्कर वाले इस मुकाबले का फैसला 106वें मिनट में स्थानापन्न खिलाड़ी फेरान टोरेस के गोल से हुआ, जिसने अर्जेंटीना की लगातार दूसरा खिताब जीतने की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। अर्जेंटीना को आखिरी क्षणों में एंज़ो फर्नांडीज के लाल कार्ड के कारण दस खिलाड़ियों के साथ खेलना पड़ा, जिससे स्पेन का दबदबा और मजबूत हुआ।
पुरस्कार वितरण समारोह खेल से अधिक राजनीतिक रंग लिए रहा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो जब मैदान में उतरे तो दर्शकों ने जोरदार हूटिंग की। ट्रंप ने स्पेन के कप्तान रोड्री को ट्रॉफी सौंपने के बाद मंच छोड़ने से इनकार कर दिया और खिलाड़ियों के साथ जश्न में शामिल होने का प्रयास किया। इन्फेंटिनो ने उन्हें किनारे ले जाने की कोशिश की, लेकिन ट्रंप ने अपना प्रसिद्ध ‘ट्रंप डांस’ भी किया और तब तक वहीं खड़े रहे जब तक रोड्री ने ट्रॉफी नहीं उठा ली। बाद में स्पेनिश फुटबॉल महासंघ द्वारा साझा की गई आधिकारिक विजयी तस्वीर में ट्रंप को क्रॉप करके हटा दिया गया, जिसे सोशल मीडिया पर व्यापक प्रतिक्रिया मिली।
अर्जेंटीना के खिलाड़ियों ने भी अपने तरीके से विरोध जताया। डिफेंडर क्रिस्टियन रोमेरो ने पदक लेते समय ट्रंप से हाथ मिलाने से साफ इनकार कर दिया, हालांकि उन्होंने इन्फेंटिनो और मैक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम से हाथ मिलाया। लिसांड्रो मार्टिनेज ने भी ऐसा ही रुख अपनाया। ये घटनाएं ऐसे समय हुईं जब ट्रंप स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ के साथ नाटो खर्च और ईरान युद्ध में सहयोग को लेकर तीखे मतभेद रखते हैं, जबकि अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर मिलेई उनके करीबी सहयोगी हैं। मिलेई अंधविश्वास के कारण फाइनल में शामिल नहीं हुए।
टूर्नामेंट के दौरान ट्रंप का हस्तक्षेप विवादों से घिरा रहा। अमेरिकी स्ट्राइकर फोलारिन बालोगुन के लाल कार्ड को निलंबित कराने के लिए उन्होंने इन्फेंटिनो को फोन किया था, जिसके बाद फीफा ने प्रतिबंध हटा लिया—हालांकि अमेरिकी टीम फिर भी बेल्जियम से 4-1 से हारकर बाहर हो गई। इसके बावजूद ट्रंप ने इस आयोजन को “दुनिया का सबसे सफल खेल आयोजन” करार दिया और दावा किया कि अमेरिका अब एक फुटबॉल राष्ट्र बन गया है।
स्पेन की इस जीत ने न केवल उनके 2010 के खिताब की यादें ताजा कीं, बल्कि यह भी दिखाया कि मैदान पर प्रदर्शन ही अंततः सबसे अधिक मायने रखता है। 104 मैचों वाले इस विशाल टूर्नामेंट के समापन के साथ ही अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल का ध्यान अब अगले चक्र—2028 ओलंपिक और 2030 विश्व कप की तैयारियों—की ओर स्थानांतरित हो गया है।
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | −0.60 | critical |
|---|---|---|
| अरब खाड़ी प्रेस | +0.20 | neutral |
ट्रंप ने सुर्खियां चुराईं और मंच छोड़ने से इनकार करके खुद को शर्मिंदा किया।
सीटियों और कप्तान के इशारे पर ध्यान केंद्रित करके, कथा एक नियमित समारोह को एक घोटाले में बदल देती है।
ट्रंप ने बिना किसी घटना के ट्रॉफी सौंपी और जश्न में शामिल हुए।
समारोह को सुचारू रूप में प्रस्तुत करके और ट्रॉफी सौंपने पर ध्यान केंद्रित करके, कथा ट्रंप की उपस्थिति को सामान्य करती है और किसी भी विवाद को कम करती है।
भीड़ की सीटियाँ और स्पेनिश कप्तान का ट्रंप को हटने का इशारा नहीं बताया गया है।
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