
अतिरिक्त समय में फेरान टोरेस के गोल से स्पेन ने अर्जेंटीना को हराकर दूसरी बार विश्व कप जीता
न्यू जर्सी के मेटलाइफ स्टेडियम में खेले गए फाइनल में स्पेन का दबदबा रहा और टोनी क्रूस के 'फुटबॉल जीता' ट्वीट ने वैश्विक बहस छेड़ दी।
106वें मिनट में फेरान टोरेस का एकमात्र गोल स्पेन के लिए दूसरी विश्व कप ट्रॉफी लेकर आया, जबकि अर्जेंटीना पूरे 90 मिनट में एक भी शॉट ऑन टारगेट नहीं लगा सका। यह विश्व कप फाइनल के इतिहास में पहला ऐसा मौका था जब किसी टीम ने नियत समय में गोल पर कोई प्रहार नहीं किया। स्पेन ने 65 प्रतिशत गेंद पर कब्जा रखा और 20 शॉट लगाए, जबकि अर्जेंटीना केवल दो प्रयास कर सका और उसका एक्स-गोल मान मात्र 0.22 रहा।
मैच का तनाव अतिरिक्त समय से पहले ही चरम पर पहुंच गया था। 90+6वें मिनट में एंज़ो फर्नांडीज को दूसरा पीला कार्ड दिखाकर बाहर भेज दिया गया, जिससे अर्जेंटीना दस खिलाड़ियों पर सिमट गया। इसके बाद लिएंड्रो पारेडिस भी लाल कार्ड का शिकार हुए। स्पेन ने संख्यात्मक बढ़त का फायदा उठाते हुए टोरेस के गोल से खिताब पक्का किया। अर्जेंटीना के कोच लियोनेल स्कालोनी ने हार के बाद कहा, 'हार होती है और फिर उठना पड़ता है, कोई दूसरा रास्ता नहीं।'
जर्मनी के पूर्व मिडफील्डर टोनी क्रूस ने मैच खत्म होते ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'फुटबॉल जीता।' यह पोस्ट तेजी से वायरल हुई और इसे दस लाख से अधिक लाइक मिले। यूरोपीय मीडिया ने इसे स्पेन की कब्जे वाली शैली की जीत के रूप में देखा, जबकि दक्षिण अमेरिकी मीडिया ने इसे अर्जेंटीना की रक्षात्मक रणनीति पर तंज बताया। एशियाई मीडिया में यह बहस छिड़ी कि क्या क्रूस का इशारा अर्जेंटीना के अनुशासनहीन रवैये की ओर था। क्रूस 2014 में जर्मनी की उस टीम का हिस्सा थे जिसने अर्जेंटीना को ही फाइनल में हराया था, और उन्होंने मैच से पहले ही भविष्यवाणी की थी कि स्पेन के एक गोल करने पर अर्जेंटीना के पास कोई जवाब नहीं होगा।
इस जीत के साथ स्पेन ने अपना लगातार 38वां अंतरराष्ट्रीय मैच बिना हारे खेलने का विश्व रिकॉर्ड बनाया और फ्रांस तथा उरुग्वे की बराबरी करते हुए दो विश्व कप खिताब जीतने वाले देशों की सूची में जगह बनाई। स्पेन के कोच लुइस डे ला फुएंते ने स्वीकार किया कि टीम को पहले ही गोल कर लेना चाहिए था, लेकिन अर्जेंटीना के गोलकीपर एमिलियानो मार्टिनेज ने कई मौके बचाए। दूसरी ओर, लियोनेल मेसी पुरस्कार समारोह के दौरान भावुक हो गए। स्पेन के विंगर निको विलियम्स ने इसे अपने जीवन का सबसे खुशी का दिन बताया।
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | −0.70 | critical |
|---|---|---|
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | +0.70 | aligned |
| दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस | −0.20 | neutral |
Kroos strikes Argentina with a contemptuous comment, implying that their defeat was fair and deserved.
By emphasizing the harshness of the post and its media impact, a narrative of Argentine victimhood is built, presenting Kroos as a provocateur.
Omitted is the fact that many fans and commentators praised Kroos' comment as clever and that Argentina indeed played poorly, with zero shots on goal until extra time.
Kroos expresses in two words what all true fans think: football won, and Spain demonstrated superiority.
By presenting the fan reaction as enthusiastic and unanimous, Kroos' comment is universalized as a shared truth, ignoring criticisms.
Omitted is the negative reaction from Argentine fans and the controversy generated by the post, which in other contexts was seen as a provocation.
Kroos takes a jab at Argentina, sparking a heated debate on sportsmanship and the merit of the victory.
By highlighting the virality and debate, a frame of controversy is created that amplifies polarization, without taking a clear stance.
Omitted is the context of unanimous celebration by German and Spanish fans, which is predominant in other accounts.
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