
इस्तांबुल की सड़कों पर फिर गूंजी सीटियाँ: प्रतिबंध के बीच प्राइड और एक पत्रकार की गिरफ़्तारी
रविवार को प्रशासन ने तकसीम चौक और कई मेट्रो स्टेशनों को सील कर दिया, लेकिन कोनों-कोनों से निकलकर प्रदर्शनकारियों ने सीटियों और नारों से अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।
इस्तांबुल के तकसीम चौक पर लोहे के बैरिकेड लगे थे और मेट्रो की आवाजाही रोक दी गई थी, लेकिन आस-पास की तंग गलियों में अलग ही गूँज थी। रविवार दोपहर बाद अचानक सीटियों की तेज़ आवाज़ें उठीं और इंद्रधनुषी झंडों के साथ छोटे-छोटे समूह ‘गे प्राइड’ के लिए जमा होने लगे। सादे कपड़ों में मौजूद सुरक्षाकर्मी तेज़ी से आगे बढ़े और कुछ ही मिनटों में कई लोगों को हिरासत में ले लिया। उनमें पत्रकार मुबेरा उंसाल भी थीं, जो बार-बार अपना पहचान-पत्र दिखाकर कहती रहीं कि वह सिर्फ़ कवरेज कर रही हैं, लेकिन उन्हें भी पुलिस वैन में बिठा दिया गया।
आयोजकों के अनुसार, शहर भर में कम से कम पचास लोगों को गिरफ़्तार किया गया, जबकि स्थानीय प्रशासन ने पहले ही किसी भी तरह के प्रदर्शन पर रोक लगा रखी थी। तकसीम चौक के अलावा एशियाई छोर पर बसे कादिकोय इलाके को भी प्रमुख रैली स्थल घोषित कर बैरिकेड से घेर दिया गया था। तुर्की पत्रकार संघ ने सोशल मीडिया पर लिखा, “इस्तांबुल प्राइड मार्च को कवर कर रहे पत्रकारों के साथ इस साल फिर अवैध हस्तक्षेप हुआ।” संघ ने बताया कि उंसाल के पास वैध प्रेस कार्ड मौजूद था, फिर भी उन्हें हिरासत में ले लिया गया।
तुर्की में समलैंगिकता गैर-कानूनी नहीं है, लेकिन राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोआन अक्सर एलजीबीटी समुदाय पर हमला करते हुए उसे घटती जन्मदर के लिए ज़िम्मेदार ठहराते रहे हैं। 2015 से इस्तांबुल का वार्षिक प्राइड मार्च लगातार प्रतिबंधित किया जाता रहा है, और हर बार प्रशासन ‘सुरक्षा चिंताओं’ का हवाला देता है। इस बार प्रतिबंध का दायरा और भी व्यापक था—सिर्फ़ दो दिन पहले शनिवार को प्रशासन ने इस्लामी समूहों के सोशल मीडिया विरोध के बाद शहर के एक समलैंगिक बार को बंद करने का आदेश दे दिया था। इतना ही नहीं, एक क्रूज़ कंपनी ने भी समलैंगिक यात्रियों के लिए तय इस्तांबुल स्टॉप को अपने कार्यक्रम से हटा दिया।
इन सबके बावजूद, प्रदर्शनकारियों ने हार नहीं मानी। कई मुहल्लों से छोटे-छोटे समूह निकलकर सड़कों पर आए और नारे लगाए: “दिन अभी खत्म नहीं हुआ... दरअसल, हमने तो अभी शुरुआत की है। हम हार नहीं मानेंगे। जहाँ भी होंगे, सड़कों पर उतरते रहेंगे।” इस्तांबुल बार एसोसिएशन ने इस दौरान इस्तिकलाल एवेन्यू स्थित अपने भवन पर एक बड़ा बैनर लगाया, जिस पर लिखा था: “एलजीबीटी मानवाधिकार हैं।” यह बैनर शहर के सबसे व्यस्ततम इलाके में प्रतिरोध का एक शांत प्रतीक बन गया।
शाम ढलने के साथ ही सड़कें शांत हो गईं, लेकिन इमारतों की दीवारों पर चिपके इंद्रधनुषी स्टिकर और बैरिकेड के पीछे पड़े बिखरे गुलाब उस दिन की कहानी बयाँ कर रहे थे। एक कोने से अब भी सीटी की हल्की गूँज सुनाई देती थी—मानो यह इशारा हो कि आवाज़ें दबाई तो जा सकती हैं, मिटाई नहीं।
| चीनी प्रेस | +0.70 | aligned |
|---|---|---|
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | −0.80 | critical |
China reaffirms the priority of social stability over individual rights, justifying repression as a necessary measure.
Presents police action as a technical and legal response, downplaying the political and human rights dimensions.
It omits the peaceful nature of the protest and any reported violence against activists.
Latin America stands in solidarity with the Turkish LGBTQ+ community, denouncing the repression as a universal attack on human rights.
Frames the event in a global struggle for rights, connecting local repression to broader battles.
It does not consider the public safety reasons given by authorities nor Turkey's internal political context.
अपना नज़रिया बढ़ाएँ
तेहरान में खामेनेई की अंतिम यात्रा शुरू, लाखों की भीड़; नए सर्वोच्च नेता की गैरमौजूदगी बनी सवाल
3 भाषाएँ · 15 स्रोत
Economy & Markets सेसैमसंग का मुनाफा 19 गुना बढ़ा, फिर भी शेयरों में भारी गिरावट: एआई बूम की स्थिरता पर सवाल
10 भाषाएँ · 13 स्रोत
Technology सेव्हाट्सएप का यूजरनेम फीचर भारत में अटका, सरकार ने सुरक्षा आकलन तक रोक लगाई
4 भाषाएँ · 5 स्रोत