
पहली बार द्वितारा प्रणाली में दोनों सितारों के सुपरनोवा होने के प्रमाण मिले
खगोलविदों ने एक ही बाइनरी सिस्टम के दोनों विशाल तारों के विस्फोट के अवशेष खोजे हैं, साथ ही आकाशगंगा समूह के चुंबकीय क्षेत्र का पहला संपूर्ण मानचित्र तैयार किया है।
पहली बार वैज्ञानिकों ने एक ऐसे द्वितारा प्रणाली (बाइनरी सिस्टम) की पहचान की है जिसके दोनों सदस्य तारे सुपरनोवा विस्फोट के साथ समाप्त हुए। नेचर कम्युनिकेशंस में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, पृथ्वी से लगभग 6,000 प्रकाश वर्ष दूर मिथुन तारामंडल में स्थित ‘जेलीफिश नेबुला’ (IC 443) और नव-पहचाना गया अवशेष G189.6+3.3 एक ही बाइनरी के दो विशाल तारों के अवशेष हैं। नासा के फर्मी गामा-रे टेलीस्कोप के 16 वर्षों के आंकड़ों से पता चला कि दोनों अवशेष एक ही अंतरतारकीय हाइड्रोजन बादल से टकरा रहे हैं, और संयोगवश इतने निकट होने की संभावना 1,000 में मात्र एक है। पहला तारा लगभग 20,000 से 1,10,000 वर्ष पूर्व विस्फोटित हुआ, जबकि दूसरा 8,000-9,000 वर्ष पहले; दोनों के केंद्र अब 30-50 प्रकाश वर्ष दूर हैं।
इसी दौरान, यूरोपीय लो-फ्रीक्वेंसी एरे (LOFAR) रेडियो टेलीस्कोप की 224 घंटे की अति-गहन प्रेक्षण मुहिम ने आकाशगंगा समूह एबेल 2255 के चुंबकीय क्षेत्र का पहला समग्र मानचित्र प्रस्तुत किया है। एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स में प्रकाशनार्थ स्वीकृत इस शोध में पाया गया कि चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ यादृच्छिक नहीं हैं, बल्कि समूह के निर्माण के दौरान गैस की गतियों द्वारा संगठित होती हैं—कुछ क्षेत्रों में रेडियल और शॉक वेव्स के निकट स्पर्शरेखीय। यह पहला प्रेक्षणात्मक प्रमाण है कि आकाशगंगा समूहों के विकास की यांत्रिकी सीधे चुंबकीय क्षेत्र को आकार देती है।
प्रारंभिक ब्रह्मांड की धूल निर्माण प्रक्रिया पर भी नई रोशनी पड़ी है। जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप (JWST) के NIRCam और MIRI उपकरणों ने पास की बौनी आकाशगंगा सेक्सटैन्स A का अध्ययन किया, जिसकी रासायनिक संरचना आदिकालीन आकाशगंगाओं जैसी है—इसमें भारी तत्वों की मात्रा सूर्य की तुलना में केवल 1-7 प्रतिशत है। द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में प्रकाशित नतीजों के अनुसार, लगभग 20 तारे मोटी धूल की परतों में लिपटे पाए गए, जो 2-3 अरब वर्ष पहले ‘धूल कारखानों’ के रूप में सक्रिय थे। यह खोज बताती है कि पहली पीढ़ी के तारों ने किस प्रकार अंतरतारकीय माध्यम को भारी तत्वों से समृद्ध किया होगा।
इन वैज्ञानिक उपलब्धियों के समानांतर, खगोलविदों का एक बड़ा वर्ग पृथ्वी की निचली कक्षा में उपग्रहों की तेज़ी से बढ़ती भीड़ को लेकर चिंतित है। अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ (IAU) के अनुसार, स्टारलिंक जैसे मेगा-कॉन्स्टेलेशन से ऑप्टिकल और रेडियो दोनों प्रेक्षणों में व्यवधान बढ़ रहा है, और कैसलर सिंड्रोम का जोखिम भी गहरा रहा है। इस बीच, चीन के लूडी टान्से-4 01 उपग्रह ने गैलियम नाइट्राइड जैसी दुर्लभ धातु पर निर्भरता प्रदर्शित की है, जिसके वैश्विक उत्पादन में चीन की हिस्सेदारी 95 प्रतिशत से अधिक है। अगला ठोस कदम IAU की ओर से उपग्रह ऑपरेटरों के साथ समन्वय पर निर्भर करेगा, ताकि विज्ञान और प्रौद्योगिकी के बीच संतुलन बनाया जा सके।
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | 0.00 | neutral |
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| अरब खाड़ी प्रेस | 0.00 | neutral |
| दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस | +0.20 | neutral |
यह खोज द्विआधारी सुपरनोवा को समझने में एक कदम आगे है।
रिपोर्ट पूरी तरह से वैज्ञानिक अध्ययन में प्रस्तुत तथ्यों पर आधारित है, बिना व्याख्या या बाहरी संदर्भ जोड़े।
ब्लॉक मूल शीर्षक और दक्षिण-पूर्व एशियाई ब्लॉक में मौजूद ब्रह्मांडीय धूल उत्पादन से संबंध को छोड़ देता है।
यह खोज द्विआधारी सुपरनोवा को समझने में एक कदम आगे है।
रिपोर्ट पूरी तरह से वैज्ञानिक अध्ययन में प्रस्तुत तथ्यों पर आधारित है, बिना व्याख्या या बाहरी संदर्भ जोड़े।
ब्लॉक मूल शीर्षक और दक्षिण-पूर्व एशियाई ब्लॉक में मौजूद ब्रह्मांडीय धूल उत्पादन से संबंध को छोड़ देता है।
ये खोजें तारा निर्माण और ब्रह्मांडीय धूल पर नई खिड़कियां खोलती हैं।
एक ही समाचार ब्लॉक में कई खगोलीय खोजों को एक साथ रखकर, निरंतर वैज्ञानिक प्रगति की एक कथा बनाई जाती है।
ब्लॉक इस विवरण को छोड़ देता है कि दो सुपरनोवा अपेक्षाकृत कम अंतराल में हुए, इसके बजाय अलग धूल कारखाने की खोज पर ध्यान केंद्रित करता है।
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