
फेड चेयरमैन वॉर्श ने मुद्रास्फीति पर ‘शून्य सहनशीलता’ का संकल्प दोहराया, नीतिगत स्वतंत्रता पर जोर
अमेरिकी कांग्रेस में पहली पेशी के दौरान केविन वॉर्श ने कहा कि केंद्रीय बैंक लगातार ऊंची मुद्रास्फीति बर्दाश्त नहीं करेगा और संचार सुधारों से पारदर्शिता बढ़ेगी।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष केविन वॉर्श ने मंगलवार को प्रतिनिधि सभा की वित्तीय सेवा समिति के समक्ष अपनी पहली गवाही में कहा कि नीति-निर्माताओं में ‘लगातार ऊंची मुद्रास्फीति के प्रति कोई सहनशीलता नहीं है’ और मूल्य स्थिरता बहाल करना सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अधिकतम रोजगार और मूल्य स्थिरता के दोहरे जनादेश के बीच फिलहाल कोई टकराव नहीं है, जबकि पिछले महीनों में कई अधिकारी इनके आपस में उलझने की बात कर रहे थे। वॉर्श ने श्रम बाजार को संतुलित और मजदूरी वृद्धि को ठोस बताया, लेकिन मुद्रास्फीति के मोर्चे पर ‘अभी काम बाकी’ है।
वॉर्श ने फेड की संचार नीति में बड़े बदलाव की घोषणा करते हुए कहा कि भविष्य के संकेत (फॉरवर्ड गाइडेंस) हटाने और बयान को संक्षिप्त करने का उद्देश्य कुछ छिपाना नहीं, बल्कि पारदर्शिता लाना है। उन्होंने बताया कि पांच कार्यबल पर्यवेक्षण, विनियमन और भुगतान प्रणालियों सहित सभी क्षेत्रों में सुधारों की जांच कर रहे हैं, और कोई भी निर्णय सार्वजनिक रूप से लिया जाएगा। बैलेंस शीट नीति में बदलाव की अटकलों पर उन्होंने कहा कि इस बारे में उनके विचार जगजाहिर हैं, लेकिन नई कार्यबल के निर्णयों को पूर्वाग्रह से प्रभावित नहीं करेंगे और हर कदम की पूर्व सूचना दी जाएगी।
वॉशिंगटन में यह बयान ऐसे समय आया जब श्रम विभाग के ताजा आंकड़ों में जून में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में छह वर्षों में पहली बार गिरावट दर्ज हुई, जिसका मुख्य कारण अमेरिका-ईरान युद्धविराम के दौरान ऊर्जा कीमतों में नरमी थी। हालांकि, वॉर्श ने किसी एक आंकड़े को अधिक महत्व देने से इनकार करते हुए कहा कि ‘मिशन पूरा हो गया’ मान लेना उनका नजरिया नहीं है। ब्राजील के अर्थशास्त्री मार्सेलो फोंसेका के अनुसार, वॉर्श का यह सख्त रुख राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कम ब्याज दरों की मांग को निराश करेगा, लेकिन कांग्रेस और फेड के भीतर ही संस्थागत स्वतंत्रता के लिए समर्थन मौजूद है। वॉर्श ने राजनीतिक दबाव के सवाल पर कहा कि वह आर्थिक आंकड़ों के आधार पर ही निर्णय लेंगे और उनका लक्ष्य केंद्रीय बैंक के भीतर राजनीतिक प्रभाव को शून्य रखना है।
वैश्विक नजरिए से, फोंसेका ने आगाह किया कि यदि फेड को दरें बढ़ानी पड़ीं तो ब्राजील जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं में विनिमय दर और दीर्घकालिक ब्याज दरों पर दबाव बनेगा। भारतीय संदर्भ में भी यही जोखिम प्रासंगिक है, हालांकि बाजार पहले ही 2026 में दर कटौती की संभावना को कीमतों में शामिल कर चुके हैं और अब सतर्कता बरत रहे हैं। वॉर्श ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर कहा कि अल्पकाल में यह रोजगार के लिए विघटनकारी हो सकती है, लेकिन दीर्घकाल में उत्पादकता बढ़ाएगी; फेड इसके मुद्रास्फीति और श्रम बाजार पर प्रभावों पर नजर रखेगा। अगला ठोस पड़ाव 28-29 जुलाई को होने वाली फेडरल ओपन मार्केट कमेटी की बैठक है, जहां मौजूदा 3.5-3.75 प्रतिशत की दर सीमा पर यथास्थिति बनाए रखने की व्यापक उम्मीद है।
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | −0.30 | critical |
|---|---|---|
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | +0.10 | neutral |
| चीनी प्रेस | 0.00 | neutral |
| भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस | +0.40 | aligned |
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