
उरुग्वे का विश्व कप अभियान ग्रुप चरण में खत्म, बिएल्सा बोले- 'मैंने कुछ नहीं छोड़ा'
स्पेन से 1-0 की हार के बाद उरुग्वे की टीम 2026 विश्व कप से बाहर, कोच मार्सेलो बिएल्सा ने पूरी जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि उनका कार्यकाल कोई विरासत नहीं छोड़ेगा।
ग्वाडलजारा के एस्टाडियो में शुक्रवार रात उरुग्वे का विश्व कप सफर ग्रुप चरण में ही थम गया। स्पेन के खिलाफ 1-0 की हार ने दो बार की विश्व विजेता टीम को टूर्नामेंट से बाहर कर दिया। गोलकीपर फर्नांडो मुस्लेरा के हाथों से 42वें मिनट में एलेक्स बाएना का शॉट फिसलकर गोल में चला गया, जो मैच का एकमात्र निर्णायक पल साबित हुआ। उरुग्वे ने ग्रुप एच में सिर्फ दो अंक बटोरे—सऊदी अरब और केप वर्डे से ड्रॉ—और सर्वश्रेष्ठ तीसरे स्थान वाली टीमों में जगह नहीं बना सका। यह लगातार दूसरा विश्व कप है जब उरुग्वे पहले दौर से आगे नहीं बढ़ पाया।
मैच के तुरंत बाद मैदान पर इंटरव्यू के दौरान कोच मार्सेलो बिएल्सा का गुस्सा कैमरे में कैद हो गया। टीवी क्रू की देरी पर वह चिल्लाए, “डाले दे उना वेज़!” (जल्दी करो!)। बाद में प्रेस कॉन्फ्रेंस में 70 वर्षीय अर्जेंटीनी कोच ने पूरी जिम्मेदारी ली। उन्होंने कहा, “हम सात अंक के हकदार थे, मिले दो। यह मेरे प्रबंधन का नतीजा है।” बिएल्सा ने स्वीकार किया कि वह उरुग्वे के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की क्षमता को एक मजबूत टीम में नहीं बदल सके। लैटिन अमेरिकी मीडिया ने इस आत्म-आलोचना को बिएल्सा के करियर की सबसे कठोर स्वीकारोक्ति बताया।
दो बड़े बदलावों ने सुर्खियां बटोरीं। मुस्लेरा ने खुद हाफटाइम पर मैदान छोड़ने का फैसला किया—बिएल्सा ने स्पष्ट किया कि यह खिलाड़ी की मर्जी थी। वहीं, कप्तान फेडेरिको वाल्वेर्डे को 60वें मिनट में फेडेरिको विन्यास की जगह उतारा गया, ताकि आक्रमण को धार मिले। वाल्वेर्डे बिना कोच से हाथ मिलाए बाहर गए, जिससे खिलाड़ियों और कोच के बीच तनाव की खबरों को बल मिला। उरुग्वे के मीडिया में पहले ही यह चर्चा थी कि वरिष्ठ खिलाड़ियों ने बिएल्सा से रणनीति बदलने का आग्रह किया था, लेकिन कोच ने किसी समझौते से इनकार किया।
बिएल्सा ने सबसे चौंकाने वाला बयान तब दिया जब उन्होंने कहा, “मैं उरुग्वे फुटबॉल को कुछ नहीं छोड़ रहा।” उनके अनुसार, बिना नतीजों के कोई भी योगदान बेमानी है—चाहे वह एलिमिनेटरी में चौथा स्थान हो या कोपा अमेरिका में तीसरा। यूरोपीय मीडिया ने इसे अपमानजनक विदाई करार दिया, जबकि एशियाई आउटलेट्स ने उनके वायरल गुस्से पर फोकस किया। बिएल्सा का अनुबंध पहले ही विश्व कप के बाद खत्म होने वाला था, और इस प्रदर्शन के बाद उनका भविष्य तय नजर आता है। उरुग्वे अब आत्ममंथन के दौर में प्रवेश करेगा, जबकि बिएल्सा का अंतरराष्ट्रीय करियर एक और ग्रुप-स्टेज निकासी के साथ संदेहों से घिर गया है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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लैटिन अमेरिकी मीडिया बिएल्सा की कठोर आत्म-आलोचना, पूरी जिम्मेदारी लेने और टीम की क्षमता का उपयोग न कर पाने की स्वीकारोक्ति पर जोर देता है। रिपोर्टर पर चिल्लाने की घटना को दबी हुई निराशा और गहरी मायूसी का संकेत माना जाता है, जो व्यक्तिगत और सामूहिक विफलता की कहानी को मजबूत करता है।
भारतीय और दक्षिण एशियाई मीडिया इस घटना को अलग-थलग अंदाज में रिपोर्ट करता है, केवल बिएल्सा द्वारा रिपोर्टर पर चिल्लाने और बाद में जिम्मेदारी स्वीकार करने का उल्लेख करता है। लहजा तटस्थ और वर्णनात्मक है, जिसमें भावनात्मक संदर्भ या उरुग्वे फुटबॉल के लिए दीर्घकालिक प्रभावों की गहराई में नहीं जाया गया है।
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