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भू-राजनीति और राजनीतिशुक्रवार, 26 जून 2026

इटली ने ईरान संघर्ष में भागीदारी से इनकार किया, नाटो प्रमुख के बयान पर विवाद

प्रधानमंत्री मेलोनी ने स्पष्ट किया कि इटली ने केवल तकनीकी और सैन्य-तार्किक सहायता दी थी, जबकि नाटो महासचिव रूते ने 500 अमेरिकी उड़ानों का उल्लेख कर भ्रम पैदा कर दिया।

इतालवी प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने 25 जून 2026 को फ्रांस के साथ एक शिखर बैठक के दौरान स्पष्ट किया कि इटली ने ईरान के विरुद्ध अमेरिकी-इज़राइली सैन्य अभियान ‘एपिक फ्यूरी’ में कोई प्रत्यक्ष भागीदारी नहीं की। उनका यह बयान नाटो महासचिव मार्क रूते के उस दावे के बाद आया जिसमें कहा गया था कि इस ऑपरेशन के लिए इतालवी ठिकानों से लगभग 500 अमेरिकी सैन्य विमानों ने उड़ान भरी। मेलोनी के अनुसार, रूते ने अपने ‘उत्साही विवरण’ में अधिकृत तकनीकी और सैन्य-तार्किक उड़ानों को युद्धक कार्रवाइयों से जोड़ दिया, जिसे बाद में स्वयं रूते और नाटो प्रवक्ता ने सुधारते हुए कहा कि यह सहायता द्विपक्षीय समझौतों के तहत केवल गैर-युद्धक प्रकृति की थी।

इस विवाद ने कई पक्षों की स्थितियाँ सामने ला दीं। इतालवी सरकार ने रक्षा मंत्री गुइदो क्रोसेतो और विदेश मंत्री एंतोनियो तायानी के माध्यम से दोहराया कि संविधान और अमेरिका के साथ मौजूदा संधियों के तहत इतालवी क्षेत्र से ईरान पर किसी हमले की अनुमति नहीं दी गई। तायानी ने ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची से फ़ोन पर बातचीत में इस बात की पुष्टि की और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता बहाल करने का आग्रह भी किया। दूसरी ओर, ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बक़ाई ने रूते के प्रारंभिक बयान को ‘स्पष्ट और दोषसिद्ध करने वाली स्वीकारोक्ति’ बताते हुए नाटो की सक्रिय संलिप्तता का आरोप लगाया और इटली से औपचारिक खंडन की माँग की।

इस प्रकरण ने ट्रान्साटलांटिक संबंधों में पहले से मौजूद तनाव को उजागर किया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पूर्व में कई बार इटली और अन्य यूरोपीय सहयोगियों की ईरान के ख़िलाफ़ कार्रवाई में कथित निष्क्रियता पर नाराज़गी जताई थी और नाटो से हटने की धमकी भी दी थी। मेलोनी ने स्वयं इसी नाराज़गी का हवाला देते हुए तर्क दिया कि यदि इटली ने संघर्ष में भाग लिया होता तो अमेरिकी राष्ट्रपति की बार-बार दोहराई जाने वाली निराशा की कोई व्याख्या नहीं होती। विश्लेषकों के अनुसार, रूते का बयान संभवतः आगामी अंकारा नाटो शिखर सम्मेलन से पहले गठबंधन की एकजुटता प्रदर्शित करने का प्रयास था, लेकिन इसने इटली की क़ानूनी बाध्यताओं और यूरोपीय राजधानियों में सैन्य सहायता की सीमाओं को लेकर बहस छेड़ दी।

इटली की स्थिति एक व्यापक कूटनीतिक संतुलन को दर्शाती है। रोम ने एक ओर अमेरिकी ठिकानों को तकनीकी सहायता दी, वहीं दूसरी ओर ईरान के साथ राजनयिक संवाद जारी रखा—तेहरान में अपना दूतावास फिर से खोलने की प्रक्रिया इसी का हिस्सा है। इसके साथ ही, इटली ने फ्रांस के साथ असैन्य परमाणु ऊर्जा सहयोग और लेबनान में यूनिफ़िल के बाद एक नए गठबंधन की घोषणा कर यह संकेत दिया कि वह अपनी विदेश नीति में बहुआयामी जुड़ाव चाहता है। नाटो प्रवक्ता के स्पष्टीकरण के बावजूद, यह प्रकरण आने वाले शिखर सम्मेलन में सहयोगियों के बीच सैन्य अभियानों में भागीदारी की परिभाषा और पारदर्शिता को लेकर चर्चा का विषय बना रहेगा।

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 3 भाषाएँ

44%
लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
ईरानी और संबद्ध प्रेसदक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस
ईरानी और संबद्ध प्रेस/ शासन
संदेहआक्रोश

इटली की प्रधानमंत्री ने नाटो प्रमुख के दावों को दृढ़ता से खारिज करते हुए कहा कि रोम ने ईरान के खिलाफ संघर्ष में कोई हिस्सा नहीं लिया और केवल तकनीकी व साजो-सामान संबंधी सहायता दी। विदेश मंत्री की तेहरान से फोन पर बातचीत के साथ यह खंडन, व्यापक सहयोगी भागीदारी की पश्चिमी कहानी को ध्वस्त करता है। यह घटना अटलांटिक एकता में दरारें उजागर करती है और मध्य पूर्व में सैन्य कार्रवाइयों के प्रति संदेह को बढ़ावा देती है।

दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस
उदासीनताव्यावहारिकता

इटली के विदेश मंत्री ने अपने ईरानी समकक्ष को स्पष्ट किया कि इटली ने ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य पहल में हिस्सा नहीं लिया और न ही अपने ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमति दी। यह स्पष्टीकरण नाटो महासचिव की कथित इतालवी संलिप्तता वाली टिप्पणियों के बाद आया है। रोम वाशिंगटन के साथ द्विपक्षीय समझौतों के पालन की पुष्टि करता है।

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अमेरिकी मध्यस्थता पर मैक्रों के बयान से विवाद, रूस ने वाशिंगटन से भूमिका स्पष्ट करने को कहा·26 जून: जब एक जादुई किताब ने दुनिया बदल दी और अरियाना ग्रांडे का जन्म हुआ·लेबनान में युद्धविराम के बीच इज़राइल ने सेना हटाने से किया इनकार, अमेरिका-ईरान वार्ता पर संकट·गुआदालाहारा में उरुग्वे-स्पेन की करो या मरो की टक्कर, ग्रुप एच का हर समीकरण दांव पर·रूसी सैनिक का वायरल वीडियो: पुतिन से मिलने की मांग, सेना द्वारा क्रेमलिन पर हथियार उठाने की धमकी·विनीसियस के निरस्त गोल पर ब्राजील का फीफा को पत्र, मेसी वाला उदाहरण देकर जताई आपत्ति·दक्षिणी फिलीपींस में 6.4 से 6.7 तीव्रता का भूकंप, सुनामी की चेतावनी जारी नहीं·एप्पल की मूल्य वृद्धि से तकनीकी शेयरों में बिकवाली, वैश्विक बाजार लाल निशान में·अमेरिकी मध्यस्थता पर मैक्रों के बयान से विवाद, रूस ने वाशिंगटन से भूमिका स्पष्ट करने को कहा·26 जून: जब एक जादुई किताब ने दुनिया बदल दी और अरियाना ग्रांडे का जन्म हुआ·लेबनान में युद्धविराम के बीच इज़राइल ने सेना हटाने से किया इनकार, अमेरिका-ईरान वार्ता पर संकट·गुआदालाहारा में उरुग्वे-स्पेन की करो या मरो की टक्कर, ग्रुप एच का हर समीकरण दांव पर·रूसी सैनिक का वायरल वीडियो: पुतिन से मिलने की मांग, सेना द्वारा क्रेमलिन पर हथियार उठाने की धमकी·विनीसियस के निरस्त गोल पर ब्राजील का फीफा को पत्र, मेसी वाला उदाहरण देकर जताई आपत्ति·दक्षिणी फिलीपींस में 6.4 से 6.7 तीव्रता का भूकंप, सुनामी की चेतावनी जारी नहीं·एप्पल की मूल्य वृद्धि से तकनीकी शेयरों में बिकवाली, वैश्विक बाजार लाल निशान में·
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इटली ने ईरान संघर्ष में भागीदारी से इनकार किया, नाटो प्रमुख के बयान पर विवाद

प्रधानमंत्री मेलोनी ने स्पष्ट किया कि इटली ने केवल तकनीकी और सैन्य-तार्किक सहायता दी थी, जबकि नाटो महासचिव रूते ने 500 अमेरिकी उड़ानों का उल्लेख कर भ्रम पैदा कर दिया।

इतालवी प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने 25 जून 2026 को फ्रांस के साथ एक शिखर बैठक के दौरान स्पष्ट किया कि इटली ने ईरान के विरुद्ध अमेरिकी-इज़राइली सैन्य अभियान ‘एपिक फ्यूरी’ में कोई प्रत्यक्ष भागीदारी नहीं की। उनका यह बयान नाटो महासचिव मार्क रूते के उस दावे के बाद आया जिसमें कहा गया था कि इस ऑपरेशन के लिए इतालवी ठिकानों से लगभग 500 अमेरिकी सैन्य विमानों ने उड़ान भरी। मेलोनी के अनुसार, रूते ने अपने ‘उत्साही विवरण’ में अधिकृत तकनीकी और सैन्य-तार्किक उड़ानों को युद्धक कार्रवाइयों से जोड़ दिया, जिसे बाद में स्वयं रूते और नाटो प्रवक्ता ने सुधारते हुए कहा कि यह सहायता द्विपक्षीय समझौतों के तहत केवल गैर-युद्धक प्रकृति की थी।

इस विवाद ने कई पक्षों की स्थितियाँ सामने ला दीं। इतालवी सरकार ने रक्षा मंत्री गुइदो क्रोसेतो और विदेश मंत्री एंतोनियो तायानी के माध्यम से दोहराया कि संविधान और अमेरिका के साथ मौजूदा संधियों के तहत इतालवी क्षेत्र से ईरान पर किसी हमले की अनुमति नहीं दी गई। तायानी ने ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची से फ़ोन पर बातचीत में इस बात की पुष्टि की और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता बहाल करने का आग्रह भी किया। दूसरी ओर, ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बक़ाई ने रूते के प्रारंभिक बयान को ‘स्पष्ट और दोषसिद्ध करने वाली स्वीकारोक्ति’ बताते हुए नाटो की सक्रिय संलिप्तता का आरोप लगाया और इटली से औपचारिक खंडन की माँग की।

इस प्रकरण ने ट्रान्साटलांटिक संबंधों में पहले से मौजूद तनाव को उजागर किया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पूर्व में कई बार इटली और अन्य यूरोपीय सहयोगियों की ईरान के ख़िलाफ़ कार्रवाई में कथित निष्क्रियता पर नाराज़गी जताई थी और नाटो से हटने की धमकी भी दी थी। मेलोनी ने स्वयं इसी नाराज़गी का हवाला देते हुए तर्क दिया कि यदि इटली ने संघर्ष में भाग लिया होता तो अमेरिकी राष्ट्रपति की बार-बार दोहराई जाने वाली निराशा की कोई व्याख्या नहीं होती। विश्लेषकों के अनुसार, रूते का बयान संभवतः आगामी अंकारा नाटो शिखर सम्मेलन से पहले गठबंधन की एकजुटता प्रदर्शित करने का प्रयास था, लेकिन इसने इटली की क़ानूनी बाध्यताओं और यूरोपीय राजधानियों में सैन्य सहायता की सीमाओं को लेकर बहस छेड़ दी।

इटली की स्थिति एक व्यापक कूटनीतिक संतुलन को दर्शाती है। रोम ने एक ओर अमेरिकी ठिकानों को तकनीकी सहायता दी, वहीं दूसरी ओर ईरान के साथ राजनयिक संवाद जारी रखा—तेहरान में अपना दूतावास फिर से खोलने की प्रक्रिया इसी का हिस्सा है। इसके साथ ही, इटली ने फ्रांस के साथ असैन्य परमाणु ऊर्जा सहयोग और लेबनान में यूनिफ़िल के बाद एक नए गठबंधन की घोषणा कर यह संकेत दिया कि वह अपनी विदेश नीति में बहुआयामी जुड़ाव चाहता है। नाटो प्रवक्ता के स्पष्टीकरण के बावजूद, यह प्रकरण आने वाले शिखर सम्मेलन में सहयोगियों के बीच सैन्य अभियानों में भागीदारी की परिभाषा और पारदर्शिता को लेकर चर्चा का विषय बना रहेगा।

स्रोतों में मतभेद

भू-राजनीति और राजनीति · 6 स्रोत · 3 भाषाएँ

44%मध्यम

स्रोत कैसे एक ही तथ्यों को अलग-अलग तरीके से बयाँ करते हैं।

विभाजन कैसे है

न्यूनत्र33%
निंदक67%

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 3 भाषाएँ

लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
ईरानी और संबद्ध प्रेसदक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस
ईरानी और संबद्ध प्रेस/ शासन
संदेहआक्रोश

इटली की प्रधानमंत्री ने नाटो प्रमुख के दावों को दृढ़ता से खारिज करते हुए कहा कि रोम ने ईरान के खिलाफ संघर्ष में कोई हिस्सा नहीं लिया और केवल तकनीकी व साजो-सामान संबंधी सहायता दी। विदेश मंत्री की तेहरान से फोन पर बातचीत के साथ यह खंडन, व्यापक सहयोगी भागीदारी की पश्चिमी कहानी को ध्वस्त करता है। यह घटना अटलांटिक एकता में दरारें उजागर करती है और मध्य पूर्व में सैन्य कार्रवाइयों के प्रति संदेह को बढ़ावा देती है।

दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस
उदासीनताव्यावहारिकता

इटली के विदेश मंत्री ने अपने ईरानी समकक्ष को स्पष्ट किया कि इटली ने ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य पहल में हिस्सा नहीं लिया और न ही अपने ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमति दी। यह स्पष्टीकरण नाटो महासचिव की कथित इतालवी संलिप्तता वाली टिप्पणियों के बाद आया है। रोम वाशिंगटन के साथ द्विपक्षीय समझौतों के पालन की पुष्टि करता है।

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