
गुआडालाहारा में आखिरी मोहरा: उरुग्वे-स्पेन की टक्कर से तय होगा ग्रुप एच का भविष्य
विश्व कप के ग्रुप एच में आज उरुग्वे को जीत अनिवार्य, जबकि स्पेन के पास बढ़त; दोनों दिग्गजों की आखिरी ग्रुप भिड़ंत से 32 के दौर की तस्वीर साफ होगी।
गुआडालाहारा के अकरॉन स्टेडियम में शुक्रवार शाम जब रेफरी की सीटी बजेगी, तो सिर्फ एक फुटबॉल मैच शुरू नहीं होगा—यह ग्रुप एच के तीन सप्ताह के उतार-चढ़ाव का आखिरी अध्याय होगा। उरुग्वे और स्पेन, दो पूर्व विश्व चैंपियन, आमने-सामने हैं। मेक्सिको की धरती पर हो रहे इस मुकाबले के साथ ही शहर की विश्व कप मेजबानी का समापन हो जाएगा। स्टेडियम के भीतर और बाहर, हर नजर इस बात पर टिकी है कि कौन सी टीम अंतिम-32 में सीधी जगह पक्की करती है, और किसे दूसरे मैदान पर होने वाले केप वर्डे-सऊदी अरब मुकाबले पर निर्भर रहना पड़ेगा।
उरुग्वे के लिए यह ‘करो या मरो’ वाली स्थिति है। मार्सेलो बिएल्सा की टीम ने अब तक सिर्फ दो ड्रॉ खेले हैं—पहले सऊदी अरब से 1-1, फिर केप वर्डे से 2-2। दो अंकों के साथ दूसरे स्थान पर मौजूद ‘ला सेलेस्ते’ को स्पेन को हराना ही होगा, वरना बाहर होने का खतरा मंडराएगा। लैटिन अमेरिकी मीडिया में बिएल्सा के उस बयान को खास तवज्जो दी गई है जिसमें उन्होंने कहा, “स्पेन के खिलाफ खेलना अरब या केप वर्डे से भिड़ने जैसा नहीं है।” टीम की मुश्किलें चोटिल रोनाल्ड अराउजो और जियोर्जियन डे अरास्काएटा की गैरमौजूदगी से और बढ़ गई हैं। ऐसे में फेडेरिको वाल्वेर्डे, रोड्रिगो बेंटानकुर और डार्विन नुनेज़ पर जिम्मेदारी का बोझ कहीं ज्यादा होगा।
दूसरी ओर, स्पेन ने शुरुआती झटके के बाद जोरदार वापसी की है। केप वर्डे से गोलरहित ड्रॉ के बाद लुइस डे ला फुएंते की टीम ने सऊदी अरब को 4-0 से रौंदा, जिसमें मिकेल ओयारसाबल के दो गोल और लामिन यामल का एक गोल शामिल रहा। यूरोपीय चैंपियन अब चार अंकों के साथ शीर्ष पर है और उसे सिर्फ एक ड्रॉ की जरूरत है, लेकिन स्पेनिश मीडिया के अनुसार टीम का इरादा पूरे तीन अंक लेकर ग्रुप विजेता बनने का है ताकि अगले दौर में अर्जेंटीना जैसी टीम से भिड़ंत टाली जा सके। यामल और निको विलियम्स की रफ्तार, रोद्री और पेड्री का मिडफील्ड नियंत्रण—यही वो हथियार हैं जिनसे ‘ला रोहा’ उरुग्वे की रक्षापंक्ति को बार-बार चुनौती देगी।
रणनीतिक लिहाज से यह मुकाबला दो विपरीत शैलियों का टकराव हो सकता है। उरुग्वे को शुरू से आक्रामक रुख अपनाना होगा, जबकि स्पेन के पास जवाबी हमलों में यामल और ओयारसाबल जैसे खिलाड़ी हैं। इंडोनेशियाई और भारतीय खेल विश्लेषकों का मानना है कि स्पेन का लगातार बेहतर होता प्रदर्शन उसे थोड़ा आगे रखता है, लेकिन उरुग्वे की जुझारू प्रवृत्ति किसी भी समीकरण को पलट सकती है। दोनों टीमों की संभावित शुरुआती ग्यारह में कई बदलाव देखने को मिल सकते हैं—उरुग्वे में नुनेज़ को आगे उतारने और स्पेन में ओल्मो व यामल को एकसाथ मैदान में लाने की चर्चा है।
इस मैच का नतीजा सिर्फ इन दो टीमों तक सीमित नहीं रहेगा। ह्यूस्टन में एक साथ खेले जाने वाले केप वर्डे-सऊदी अरब मुकाबले पर पूरे ग्रुप की गणित टिकी है। अगर केप वर्डे जीतता है और उरुग्वे हारता है, तो दक्षिण अमेरिकी टीम बाहर हो जाएगी। स्पेन की हार उसे तीसरे स्थान पर धकेल सकती है और फिर अगले दौर में मेजबान मेक्सिको या इक्वाडोर जैसी टीम से सामना हो सकता है। गुआडालाहारा की यह शाम इसलिए सिर्फ एक मैच नहीं, बल्कि पूरे ग्रुप की किस्मत का फैसला करने वाली घड़ी है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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स्पेन और उरुग्वे के बीच मैच को सीधी क्वालिफिकेशन गणित के रूप में पेश किया गया है। स्पेन चार अंकों के साथ ग्रुप में शीर्ष पर है और उसे केवल ड्रॉ की जरूरत है, जबकि उरुग्वे को जीतना अनिवार्य है। कवरेज तकनीकी बनी रहती है, संख्याओं और तात्कालिक परिदृश्यों तक सीमित।
उरुग्वे ने स्पेन के खिलाफ एक उच्च-दांव वाले मुकाबले में सब कुछ दांव पर लगा दिया है। ला सेलेस्टे को अन्य परिणामों पर निर्भर रहने से बचने के लिए जीतना अनिवार्य है, जबकि ला फुरिया रोहा पहले स्थान के सहारे आती है। कथा दक्षिण अमेरिकी तात्कालिकता को यूरोपीय चैंपियन के प्रति सम्मान के साथ मिलाती है।
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