
ईरान ने लेबनान से इज़रायली सेना की बिना शर्त वापसी के लिए समय-सीमा की माँग की
तेहरान ने अमेरिका के साथ हुए समझौता ज्ञापन के तहत क्षेत्रीय स्थिरता के लिए इज़रायली कब्ज़े की समाप्ति को अंतिम समझौते की अनिवार्य शर्त बताया।
ईरान ने अमेरिका के साथ हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तहत लेबनान से इज़रायली सेना की पूर्ण और बिना शर्त वापसी को किसी भी अंतिम एवं टिकाऊ समझौते के लिए अनिवार्य शर्त बताया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने रविवार को कहा कि यह वापसी क्षेत्रीय स्थिरता स्थापित करने के लिए आवश्यक है और इसके लिए शीघ्र ही एक समय-सीमा निर्धारित की जानी चाहिए।
ईरानी पक्ष के अनुसार, 18 जून को हुए समझौता ज्ञापन की पहली धारा में लेबनान के विरुद्ध सैन्य कार्रवाइयों की समाप्ति के साथ-साथ ईरान के विरुद्ध युद्ध की समाप्ति भी शामिल है। तेहरान का कहना है कि अमेरिका इस धारा के तहत इज़राइल को सभी लेबनानी क्षेत्रों में आक्रमण रोकने के लिए बाध्य करने हेतु सभी आवश्यक कदम उठाने के लिए प्रतिबद्ध है। ईरानी संसद अध्यक्ष एवं मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाकर कलीबाफ ने लेबनानी समकक्ष नबीह बेरी से बातचीत में कहा कि तेहरान युद्ध समाप्त करने, विस्थापितों की वापसी और इज़रायली कब्ज़े की समाप्ति के लिए दृढ़ता से प्रयासरत है।
इज़रायली सरकार लगातार दक्षिणी लेबनान से अपनी सेना हटाने से इनकार करती रही है, उसका तर्क है कि ईरान समर्थित हिज़्बुल्लाह उत्तरी इज़राइल के समुदायों के लिए लगातार ख़तरा बना हुआ है। शुक्रवार को इज़राइल और लेबनान के बीच एक प्रक्रिया पर सहमति बनी, जिसके तहत लेबनानी सशस्त्र बल (एलएएफ) धीरे-धीरे दक्षिणी क्षेत्रों का नियंत्रण संभालेंगे। हालाँकि, लेबनानी सैन्य सूत्रों के अनुसार, एलएएफ अब तक हिज़्बुल्लाह को निःशस्त्र करने या उसके लड़ाकों को दक्षिणी लेबनान से हटाने में सफल नहीं हो पाई है। समझौता ज्ञापन के मूल पाठ में स्पष्ट रूप से इज़रायली सेना की वापसी की माँग नहीं की गई है, जिससे व्याख्या को लेकर मतभेद बना हुआ है।
पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव भारत जैसे दक्षिण एशियाई देशों के लिए ऊर्जा सुरक्षा, प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा और क्षेत्रीय व्यापार मार्गों की स्थिरता से जुड़े जोखिम पैदा करता है। भारत की बड़ी संख्या में आबादी खाड़ी देशों में कार्यरत है और उसकी ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है। ईरान-अमेरिका वार्ता में लेबनान मुद्दे का केंद्रीय होना यह दर्शाता है कि क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में तेहरान की भूमिका को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
वार्ता के अगले चरण में ईरान, अमेरिका और लेबनान को शामिल करते हुए एक 'संघर्ष नियंत्रण इकाई' के गठन पर सहमति बनी है, जो युद्धविराम उल्लंघनों की निगरानी करेगी। ईरानी पक्ष ने स्पष्ट किया है कि बिना शर्त वापसी की समय-सीमा तय हुए बिना कोई अंतिम समझौता संभव नहीं होगा। आने वाले दिनों में स्विट्ज़रलैंड में हुई वार्ता के बाद तकनीकी स्तर पर बैठकें जारी रहने की संभावना है, जिनमें इस माँग पर ठोस प्रगति की उम्मीद की जा रही है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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तेहरान ने सभी कब्जे वाले लेबनानी क्षेत्रों से ज़ायोनी इकाई की बिना शर्त वापसी के लिए एक स्पष्ट समय-सारिणी की माँग की है। प्रवक्ता का कहना है कि केवल यही लेबनान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा कर सकता है और किसी भी समझौते को टिकाऊ बना सकता है।
ईरान ने संयुक्त राज्य अमेरिका से लेबनान से इज़राइल की बिना शर्त वापसी के लिए एक समय-सीमा निर्धारित करने का आग्रह किया है। सैन्य अभियानों की समाप्ति और कब्ज़ाधारियों की वापसी को अंतिम समझौते और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए आवश्यक शर्तों के रूप में वर्णित किया गया है।
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