
अमेरिकी चुनाव सुरक्षा विवाद: चार राज्यों को फंडिंग रोकने की धमकी, ढाई लाख गैर-नागरिक मतदाताओं का दावा
होमलैंड सिक्योरिटी सचिव ने कैलिफोर्निया, पेंसिल्वेनिया, न्यू जर्सी और नेवादा को संघीय अनुदान से वंचित करने की चेतावनी दी, साथ ही चुनाव अधिकारियों पर जुर्माने और कारावास का दबाव बनाया।
अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (डीएचएस) ने चार राज्यों—कैलिफोर्निया, पेंसिल्वेनिया, न्यू जर्सी और नेवादा—को चेतावनी दी है कि यदि उन्होंने मतदाता सूचियों से गैर-नागरिकों को हटाने और चुनावी सुरक्षा उपायों को अनिवार्य रूप से लागू नहीं किया, तो संघीय चुनाव-संबंधी अनुदान रोक दिए जाएंगे। सचिव मार्कवेन मुलिन ने शुक्रवार को एक संवाददाता सम्मेलन में दावा किया कि विभाग ने इन चार राज्यों में लगभग 2,50,000 ऐसे लोगों की पहचान की है जो गैर-नागरिक होते हुए भी मतदाता सूची में पंजीकृत हैं। मुलिन ने यह भी कहा कि जो चुनाव अधिकारी डीएचएस द्वारा दी गई जानकारी के बाद भी सूचियों की जांच नहीं करेंगे, उन पर जुर्माना, आर्थिक दंड और “स्थिति की गंभीरता के अनुसार कारावास” तक की कार्रवाई हो सकती है।
यह कदम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक राष्ट्रीय संबोधन के ठीक एक दिन बाद उठाया गया, जिसमें उन्होंने अमेरिकी चुनाव प्रणाली में “हैरान करने वाली कमजोरियों” का आरोप लगाते हुए खुफिया दस्तावेज सार्वजनिक किए थे। ट्रंप प्रशासन के अनुसार, चीन ने 2020 के चुनाव में हस्तक्षेप किया और ईरान ने राज्य स्तरीय मतदाता फाइलों को हैक किया, हालांकि जारी दस्तावेजों में चुनाव परिणाम बदले जाने का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला। प्रशासन कांग्रेस से ‘सेव अमेरिका एक्ट’ पारित कराने पर जोर दे रहा है, जिसके तहत संघीय चुनावों में मतदान के लिए फोटो पहचान-पत्र और नागरिकता प्रमाण (जैसे जन्म प्रमाण-पत्र या पासपोर्ट) अनिवार्य कर दिया जाएगा। व्हाइट हाउस और डीएचएस का तर्क है कि ये उपाय चुनावी विश्वास बहाल करने के लिए जरूरी हैं।
दूसरी ओर, संबंधित राज्यों और चुनाव विशेषज्ञों ने इन दावों को निराधार बताया है। कैलिफोर्निया के गवर्नर गेविन न्यूसम के कार्यालय ने स्पष्ट किया कि राज्य में मतदान के लिए अमेरिकी नागरिकता अनिवार्य है और मतदाता धोखाधड़ी “अत्यंत दुर्लभ” है, जबकि प्रशासन ने अपने आंकड़ों के पीछे कोई सबूत नहीं दिया। नेवादा के शीर्ष चुनाव अधिकारी फ्रांसिस्को अगुइलर ने डीएचएस के आंकड़ों को “अत्यधिक अटकलबाजी” करार देते हुए कहा कि राज्य ने बार-बार अपनी मतदाता सूची के रखरखाव और सुरक्षा उपायों की विस्तृत जानकारी साझा की है। पेंसिल्वेनिया के राज्य सचिव अल श्मिट ने भी कहा कि राज्य सभी संघीय कानूनों का पालन करता है और गैर-नागरिक मतदान के प्रमाण अत्यंत सीमित हैं। चुनाव कानून विशेषज्ञ रिक हेसन जैसे विश्लेषकों का कहना है कि यदि प्रशासन के पास वास्तविक सबूत होते तो अब तक अभियोग दायर किए जा चुके होते।
इस टकराव का कानूनी और संस्थागत आयाम भी उतना ही महत्वपूर्ण है। डीएचएस जिस ‘सेव’ डेटाबेस के जरिए मतदाता सूचियों की जांच कराना चाहता है, उसके विस्तार पर एक संघीय न्यायाधीश ने पहले ही रोक लगा दी है, क्योंकि इसमें सामाजिक सुरक्षा आंकड़ों के दुरुपयोग और गोपनीयता कानूनों के उल्लंघन की गंभीर आशंकाएं हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि यह डेटाबेस अक्सर हाल ही में नागरिकता प्राप्त करने वाले लोगों को गलती से गैर-नागरिक दिखा देता है, जिससे योग्य मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने का खतरा बढ़ जाता है। न्याय विभाग पहले ही दो दर्जन से अधिक राज्यों पर मतदाता डेटा सौंपने का दबाव डाल चुका है, लेकिन अदालतों ने इन प्रयासों को लगातार खारिज किया है और संविधान के तहत चुनावों पर राज्यों के प्राथमिक अधिकार को दोहराया है।
नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले यह विवाद अमेरिकी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विश्वास को लेकर व्यापक बहस को जन्म दे रहा है। ट्रंप 2020 के चुनाव परिणाम को लगातार “धांधली” बताते रहे हैं, हालांकि कई अदालती समीक्षाओं और पुनर्मतगणनाओं में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी का कोई सबूत नहीं मिला। सीनेट में ‘सेव अमेरिका एक्ट’ का रास्ता फिलहाल अवरुद्ध है, क्योंकि रिपब्लिकन के पास डेमोक्रेटिक फिलिबस्टर को तोड़ने के लिए जरूरी 60 वोट नहीं हैं। डीएचएस ने चारों राज्यों के चुनाव अधिकारियों को दो सप्ताह के भीतर सहयोग की मंशा स्पष्ट करने को कहा है, जबकि प्रशासन ने आगामी 30 दिनों में एक अद्यतन चुनाव-बुनियादी ढांचा योजना जारी करने की घोषणा की है।
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | −0.70 | critical |
|---|---|---|
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | −0.30 | critical |
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