
ईरान समझौते और चिप उछाल से वॉल स्ट्रीट में तेजी, यूरोपीय बाजार सतर्क
अमेरिका-ईरान युद्धविराम विस्तार से तेल कीमतों में गिरावट और इंटेल-एप्पल चिप साझेदारी ने वॉल स्ट्रीट को मजबूती दी, जबकि फेड के सख्त रुख पर चिंता बनी रही।
वैश्विक वित्तीय बाजारों में गुरुवार को मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली, जहां एक ओर अमेरिकी शेयर बाजार तकनीकी क्षेत्र के नेतृत्व में उछले, वहीं यूरोपीय बाजार सतर्क रहे। वॉल स्ट्रीट पर एसएंडपी 500 और नैस्डैक ने पिछले सत्र की गिरावट की भरपाई करते हुए लगभग एक प्रतिशत की बढ़त हासिल की। इस तेजी के पीछे दो प्रमुख कारण रहे: पहला, अमेरिका और ईरान के बीच एक अंतरिम समझौते पर हस्ताक्षर, जिसने अप्रैल के युद्धविराम को 60 दिनों के लिए बढ़ा दिया और होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल व अन्य मालवाहक जहाजों की आवाजाही फिर शुरू होने का मार्ग प्रशस्त किया। दूसरा, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस घोषणा ने निवेशकों का उत्साह बढ़ाया जिसमें उन्होंने कहा कि इंटेल और एप्पल अमेरिका में चिप डिजाइन और विनिर्माण के लिए साझेदारी करेंगे। इस खबर से इंटेल के शेयर 10 प्रतिशत से अधिक चढ़ गए और फिलाडेल्फिया सेमीकंडक्टर सूचकांक ने 6.4 प्रतिशत की शानदार छलांग लगाई।
होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही बहाल होने और तेल कीमतों के मार्च के आरंभिक स्तर तक फिसलने से मुद्रास्फीति संबंधी चिंताओं को कुछ राहत मिली, जो फरवरी के अंत में युद्ध शुरू होने के बाद से लगातार बढ़ रही थीं। हालांकि, ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि ईरान अपनी प्रतिबद्धताओं का पालन नहीं करता तो हमले फिर शुरू हो सकते हैं, जिससे भू-राजनीतिक अनिश्चितता बनी हुई है। दूसरी ओर, फेडरल रिजर्व की नई अध्यक्षता व्यवस्था और सख्त मौद्रिक नीति के संकेतों ने बाजार की धारणा को संतुलित रखा। पिछले सत्र में निवेशकों ने संभावित दर वृद्धि की आशंका को भुनाया था, लेकिन अब सीएमई फेडवॉच के अनुसार सितंबर में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की संभावना 50 प्रतिशत आंकी गई है। यूबीएस के मुख्य निवेश अधिकारी मार्क हेफेले का मानना है कि नीति में सार्थक बदलाव तब तक टल सकते हैं जब तक कार्यबल प्रक्रिया पूरी न हो और आर्थिक परिदृश्य स्पष्ट न हो।
यूरोपीय बाजारों ने इस सकारात्मकता को सीमित रूप में अपनाया। पेरिस, फ्रैंकफर्ट और मिलान में मामूली बढ़त या स्थिरता रही, जबकि लंदन का एफटीएसई सूचकांक 1.21 प्रतिशत की गिरावट के साथ अलग नजर आया। इसका कारण ब्रिटिश बाजार का कमोडिटी और ऊर्जा क्षेत्रों पर भारी निर्भरता है, जो तेल कीमतों में गिरावट से प्रभावित हुए। यूरोपीय निवेशक फेड की बैठक के एक दिन बाद प्रतिक्रिया दे रहे थे, इसलिए सतर्कता बनी रही। एशियाई बाजारों से स्पष्ट आंकड़े स्रोतों में उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन वैश्विक स्तर पर जोखिम धारणा में सुधार के संकेत मिले।
भारत और दक्षिण एशिया के लिए ये घटनाक्रम मिश्रित प्रभाव लेकर आए हैं। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भारत के आयात बिल में राहत मिलेगी और खुदरा मुद्रास्फीति पर दबाव कम होगा, जो रिजर्व बैंक की नीति के लिए सकारात्मक है। हालांकि, फेड के सख्त रुख से डॉलर के मजबूत होने और पूंजी प्रवाह में उतार-चढ़ाव का जोखिम बना रहता है, जिससे रुपये पर दबाव पड़ सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य से आपूर्ति श्रृंखला सामान्य होने से उर्वरक और अन्य जिंसों की उपलब्धता में सुधार होगा, जो कृषि प्रधान अर्थव्यवस्थाओं के लिए राहत की बात है।
आगे की राह अनिश्चितताओं से भरी है। अंतरिम समझौता नाजुक है और अंतिम शांति समझौते तक पहुंचने में कई बाधाएं हैं। फेड की नीति डेटा-निर्भर बनी रहेगी, और आने वाले आर्थिक आंकड़े बाजार की दिशा तय करेंगे। निवेशकों की निगाहें होर्मुज जलडमरूमध्य में यातायात की निरंतरता और फेड के अगले बयानों पर टिकी रहेंगी। फिलहाल, तकनीकी क्षेत्र की मजबूती और भू-राजनीतिक तनाव में ढील ने बाजारों को सांस लेने का मौका दिया है, लेकिन सतर्क आशावाद ही प्रमुख स्वर है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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वॉल स्ट्रीट सूचकांक सेमीकंडक्टर तेजी और अमेरिका-ईरान युद्धविराम की उम्मीद से उछलते हैं, जिससे तेल मार्च के बाद सबसे निचले स्तर पर आ जाता है। फेड की सख्ती से उत्साह कम होता है, विश्लेषक लंबी दर स्थिरता की उम्मीद करते हैं।
वॉल स्ट्रीट चिप क्षेत्र की मजबूती और ईरान युद्धविराम से चढ़ता है, लेकिन ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर तेहरान समझौते का पालन नहीं करता तो हमले फिर शुरू होंगे। यह समझौता केवल अस्थायी राहत देता है, आगे तनाव बढ़ने का जोखिम बना रहता है।
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