
वेनेज़ुएला में भूकंप के बाद विपक्षी नेता की वापसी पर अमेरिकी रोक: तनाव और कूटनीतिक समीकरण
मारिया कोरिना मचाडो की स्वदेश लौटने की कोशिशों को वाशिंगटन ने राजनीतिक अवसरवाद बताकर खारिज किया, जिससे विपक्ष और अमेरिकी प्रशासन के बीच खुली दरार उभरी है।
वेनेज़ुएला में 24 जून को आए दो विनाशकारी भूकंपों के बाद विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो की स्वदेश लौटने की लगातार कोशिशों को अमेरिकी प्रशासन ने यह कहते हुए रोक दिया है कि उनकी मौजूदगी से हालात और बिगड़ सकते हैं और यह राजनीतिक अवसरवाद है। न्यूयॉर्क टाइम्स और एक्सियोस की रिपोर्टों के अनुसार, व्हाइट हाउस और विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने मचाडो के अनुरोधों को 'परेशान करने वाला' और 'भड़काऊ' बताया, जबकि खुफिया एजेंसियों ने चेतावनी दी कि उनकी वापसी डेल्सी रोड्रिगेज़ के नेतृत्व वाली वर्तमान सरकार को अस्थिर कर सकती है। भूकंप में अब तक 2,200 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और हज़ारों घायल हैं, जिसके चलते अमेरिका राहत कार्यों पर ध्यान केंद्रित करना चाहता है।
वाशिंगटन के रुख के पीछे कई कारण सामने आए हैं। एक्सियोस से बात करने वाले एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने कहा, 'यह राजनीतिक अवसरवाद है और घिनौना है।' प्रशासन का मानना है कि मचाडो अमेरिकी मदद बांटते हुए तस्वीरें खिंचवाना चाहती हैं, जिससे ऐसा लगेगा कि वह सत्ता में आ रही हैं। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि अगर वह अमेरिकी मरीन के साथ खड़ी होंगी तो उन पर हमला नहीं होगा, लेकिन इससे यह संदेश जाएगा कि अमेरिका उन्हें सत्ता में बिठा रहा है। न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, व्हाइट हाउस ने काराकास के मौजूदा अधिकारियों के साथ सहयोग को प्राथमिकता दी है, क्योंकि ट्रंप प्रशासन डेल्सी रोड्रिगेज़ सरकार पर लगभग पूर्ण नियंत्रण रखता है और किसी भी ऐसे बदलाव से बचना चाहता है जो उसकी पकड़ को कमज़ोर करे। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने सार्वजनिक रूप से कहा कि 'इस त्रासदी के समय संवेदनशील राजनीतिक मुद्दों को जोड़ना हमारे राहत प्रयासों के लिए प्रतिकूल है।'
दूसरी ओर, पनामा में मौजूद मचाडो ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर आरोप लगाया कि वेनेज़ुएला सरकार ने उनकी वापसी रोकने के लिए हवाई क्षेत्र बंद कर दिया और मदद करने वालों को धमकाया। उन्होंने कहा कि वह 'हर संभव प्रयास' करने को तैयार हैं और पीड़ितों के साथ खड़ी होना चाहती हैं। हालांकि, वेनेज़ुएला के विपक्षी खेमे में भी मतभेद हैं। टोडो नोटिसियास की रिपोर्ट के अनुसार, काराकास में एक विपक्षी नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कई लोगों का मानना है कि यह सही समय नहीं है, क्योंकि भूकंप प्रभावित आबादी में असंतोष के चलते 'सविनय विद्रोह' की आशंका है। विश्लेषक पिएरो ट्रेपिसिओने के अनुसार, ट्रंप का वेनेज़ुएला की सरकार और विपक्ष दोनों पर भारी प्रभाव है और वह मचाडो की वापसी से अपनी योजनाओं के बाधित होने का जोखिम नहीं लेना चाहते।
इस पूरे प्रकरण ने अमेरिका और उसके कभी समर्थित विपक्षी नेता के बीच खुली दरार को उजागर कर दिया है। मचाडो, जो नोबेल शांति पुरस्कार विजेता हैं और जिन्होंने अपना पदक ट्रंप को भेंट किया था, अब वाशिंगटन के लिए 'विकर्षण' बन गई हैं। लेंटा.रू की रिपोर्ट के अनुसार, वाशिंगटन और काराकास में मचाडो के विरोधियों ने व्हाइट हाउस के वरिष्ठ अधिकारियों को सफलतापूर्वक समझाया कि उनका आगमन भूकंप के बाद पहले से तनावपूर्ण माहौल को और खराब कर सकता है और संयुक्त राहत प्रयासों को खतरे में डाल सकता है। इस बीच, अंतरराष्ट्रीय बचाव दल हवाई अड्डों पर फंसे हुए हैं और सरकार पर राहत सामग्री के वितरण में बाधा डालने के आरोप लगे हैं।
फिलहाल मचाडो पनामा में ही हैं और उनकी वापसी का कोई स्पष्ट रास्ता नहीं दिखता। अमेरिकी प्रशासन ने भविष्य में उनकी वापसी का समर्थन करने की बात कही है, लेकिन अभी उनके प्रयासों को 'राजनीतिक चाल' करार दिया है। नीदरलैंड के अधिकारियों ने भी कुराकाओ के रास्ते उनके प्रवेश को अस्वीकार कर दिया, क्योंकि अमेरिका ने उनकी ज़मानत देने से इनकार कर दिया। यह मामला अब एक कूटनीतिक गतिरोध में बदल गया है, जहां मानवीय संकट के बीच भू-राजनीतिक समीकरण हावी हैं।
| ईरानी और संबद्ध प्रेस | −0.70 | critical |
|---|---|---|
| रूसी और सीआईएस प्रेस | −0.50 | critical |
Washington uses the earthquake as an excuse for political interference, while the real agenda is to silence the voice of the Venezuelan people.
It builds a narrative of Western hypocrisy by contrasting the US humanitarian rhetoric with its repressive action, leveraging the emotional context of the natural disaster to heighten the contrast.
It omits that Machado is a polarizing figure in Venezuela and does not mention accusations of political destabilization that could justify the US decision.
Washington acts according to its usual script in Latin America, using humanitarian pretexts for geopolitical ends.
It presents the US action as predictable and systemic, placing it within a long series of interventions, thereby downplaying its novelty and highlighting the continuity of American foreign policy.
It does not delve into Machado’s role as an opposition leader or internal Venezuelan dynamics, reducing the event to a mere reflection of US geopolitics.
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