
अमेरिका-ईरान वार्ता में प्रगति से तेल गिरा, सोना चढ़ा; दर वृद्धि की आशंका बनी अवरोध
स्विट्जरलैंड में पहले दौर की वार्ता के बाद 60 दिनों के भीतर समझौते की रूपरेखा से कच्चे तेल में गिरावट आई, जिससे सोने को समर्थन मिला, लेकिन फेड की सख्त नीति की संभावना ने बढ़त सीमित रखी।
सोमवार को सोने की कीमतों में लगभग एक प्रतिशत की रिकवरी दर्ज की गई, जो शुक्रवार को 11 जून के बाद के सबसे निचले स्तर से उबरकर 4,200 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गई। यह तेजी मुख्यतः अमेरिका-ईरान शांति वार्ता में प्रगति की खबरों से प्रेरित थी, जिसके चलते ब्रेंट क्रूड की कीमतें तीन प्रतिशत से अधिक लुढ़क गईं। मध्यस्थ देशों कतर और पाकिस्तान के संयुक्त बयान के अनुसार, दोनों पक्षों ने 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते की रूपरेखा पर सहमति जताई, साथ ही लेबनान में युद्धविराम और होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए संचार तंत्र स्थापित करने पर भी बात बनी।
ऊर्जा बाजारों में गिरावट ने सोने के लिए दोहरी भूमिका निभाई। एक ओर, तेल की कीमतों में नरमी से वैश्विक मुद्रास्फीति की चिंताएं कम हुईं, जिससे सोने की मांग को मुद्रास्फीति-रोधी परिसंपत्ति के रूप में बल मिला। दूसरी ओर, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नए अध्यक्ष केविन वार्श की टिप्पणियों ने ब्याज दरों में वृद्धि की आशंकाओं को और पुख्ता कर दिया। सीएमई फेडवॉच टूल के अनुसार, दिसंबर में दर बढ़ोतरी की संभावना 61 प्रतिशत से बढ़कर 89 प्रतिशत हो गई है, क्योंकि 19 में से नौ नीति-निर्माता इस वर्ष कम से कम एक वृद्धि की आवश्यकता मानते हैं। ब्याज दरें ऊंची होने पर बिना प्रतिफल वाली परिसंपत्ति के रूप में सोने का आकर्षण घटता है, जिससे इसकी तेजी पर लगाम लगी रही।
भू-राजनीतिक मोर्चे पर, स्विट्जरलैंड में पहले दौर की बातचीत के बाद माहौल में स्पष्ट बदलाव देखा गया। सैक्सो बैंक के विश्लेषक ओले हैनसेन ने कहा कि ऊर्जा कीमतें निकट भविष्य में कीमती धातुओं की दिशा तय करेंगी, और यदि ईरान से कच्चे तेल की अतिरिक्त आपूर्ति बाजार में आती है तो सोने को और समर्थन मिल सकता है। वहीं मारेक्स के एडवर्ड मीर ने स्थिति को अस्थिर बताते हुए सतर्क रुख अपनाने की सलाह दी। अन्य कीमती धातुओं में भी तेजी रही—चांदी 2.4 प्रतिशत बढ़कर 66.46 डॉलर प्रति औंस, प्लैटिनम 1.7 प्रतिशत बढ़कर 1,691 डॉलर और पैलेडियम 1 प्रतिशत ऊपर रहा।
भारत जैसे प्रमुख तेल आयातक और सोना उपभोक्ता देश के लिए ये घटनाक्रम दोहरे प्रभाव रखते हैं। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से आयात बिल और घरेलू मुद्रास्फीति पर दबाव कम हो सकता है, जबकि सोने की ऊंची कीमतें भौतिक मांग को प्रभावित कर सकती हैं। अगला ध्यान देने योग्य पड़ाव इस सप्ताह जारी होने वाला अमेरिकी पीसीई मुद्रास्फीति आंकड़ा है, जो फेड की नीति दिशा को और स्पष्ट करेगा, साथ ही अमेरिका-ईरान वार्ता का अगला दौर भी बाजार की धारणा को आकार देगा।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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सोना अपने साप्ताहिक निचले स्तर से उछला क्योंकि अमेरिका-ईरान वार्ता में प्रगति से तेल की कीमतें गिरीं और मुद्रास्फीति की चिंताएं कम हुईं। फेड दर वृद्धि की उम्मीदों ने तेजी को सीमित कर दिया। विश्लेषकों का कहना है कि ऊर्जा कीमतें कीमती धातुओं के लिए मुख्य अल्पकालिक चालक बनी रहेंगी।
सोने की कीमतें हाल के निचले स्तर से जोरदार उछलीं, क्योंकि अमेरिका-ईरान के बीच शांति की रूपरेखा सामने आई और तेल की कीमतें गिर गईं। निवेशकों ने 60-दिवसीय वार्ता में संभावित रुकावटों से सावधान रहते हुए रणनीतिक बचाव के रूप में सोने का रुख किया। अमेरिकी मौद्रिक नीति में सख्ती के दांव ने तेजी को सीमित किया।
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