
गिरते स्मार्टफोन बाजार में एपल-हुआवे की दोहरे अंकों की वृद्धि, मेमोरी चिप संकट से मूल्य वृद्धि तय
वैश्विक स्मार्टफोन बिक्री लगातार नौ सप्ताह गिरी, पर एपल और हुआवे ने दो अंकों की वृद्धि दर्ज की; मेमोरी चिप की कमी और एआई मांग ने उपभोक्ता कीमतों पर दबाव बढ़ाया है।
वैश्विक स्मार्टफोन बाजार में मई 2026 के मध्य तक लगातार नौ सप्ताह गिरावट दर्ज हुई, काउंटरपॉइंट रिसर्च के अनुसार पूरा बाजार साल-दर-साल 8 प्रतिशत सिकुड़ गया। इसके विपरीत, एपल के आईफोन की बिक्री इसी अवधि में 10 प्रतिशत बढ़ी और हुआवे ने 23 प्रतिशत की छलांग लगाई, जबकि सैमसंग, ओप्पो, शाओमी और वीवो सभी की बिक्री घटी। यह विभाजन मुख्यतः आपूर्ति श्रृंखला स्थिरता और मूल्य निर्धारण क्षमता में अंतर को दर्शाता है।
इस गिरावट की जड़ में वैश्विक मेमोरी चिप की कमी है, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की विस्फोटक मांग से और गहराई है। एचबीएम (हाई बैंडविड्थ मेमोरी) उत्पादन के लिए डीआरएएम और नैंड फ्लैश की आपूर्ति सीमित हो गई है, जिससे चिप कीमतें अक्टूबर 2025 के बाद दोगुनी से अधिक हो चुकी हैं। साथ ही ईरान युद्ध के कारण हीलियम आपूर्ति बाधित हुई है, जो चिप निर्माण में अनिवार्य गैस है। निर्माताओं ने कीमतें बढ़ाकर, उत्पाद लॉन्च टालकर और कुछ फीचर हटाकर लागत दबाव झेलने की कोशिश की है, पर एपल के सीईओ टिम कुक ने वॉल स्ट्रीट जर्नल से कहा कि स्थिति “असहनीय” हो गई है और मूल्य वृद्धि “अपरिहार्य” है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर दावा किया कि एपल ने इंटेल के साथ अमेरिका में चिप डिजाइन और उत्पादन का समझौता कर लिया है। हालांकि दोनों कंपनियों ने अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, पर मई में वॉल स्ट्रीट जर्नल ने प्रारंभिक सहमति की खबर दी थी। यह कदम एपल की टीएसएमसी पर निर्भरता घटाने और अमेरिकी सेमीकंडक्टर विनिर्माण को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है; अमेरिकी सरकार पहले ही 8.9 अरब डॉलर निवेश कर इंटेल में 10 प्रतिशत हिस्सेदारी ले चुकी है। फिर भी, टीएसएमसी के एपल का प्रमुख चिप आपूर्तिकर्ता बने रहने की संभावना है।
भारत जैसे मूल्य-संवेदनशील दक्षिण एशियाई बाजारों के लिए यह घटनाक्रम दोहरी चुनौती लेकर आया है। ओम्डिया के अनुमान के अनुसार 2026 में स्मार्टफोन का औसत विक्रय मूल्य 20 प्रतिशत बढ़कर सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुँच सकता है, और आईफोन 18 की कीमत 150 डॉलर तक बढ़ सकती है। सोनी और निंटेंडो पहले ही कंसोल के दाम बढ़ा चुके हैं। भारत में प्रीमियम खंड की मांग बनी रह सकती है, परंतु व्यापक बाजार में कीमत वृद्धि मांग को और कमजोर कर सकती है।
अगला ठोस संकेत 24 जून को माइक्रोन के 2026 वित्तीय वर्ष की तीसरी तिमाही के नतीजों से मिलेगा, जहाँ एआई मेमोरी की आपूर्ति-मांग स्थिति और मूल्य रुझान स्पष्ट होंगे। साथ ही, एपल-इंटेल समझौते की आधिकारिक घोषणा पर नज़र रहेगी, जो वैश्विक चिप आपूर्ति श्रृंखला के भूगोल को प्रभावित कर सकती है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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एप्पल ने इंटेल के साथ अमेरिका में चिप डिजाइन और निर्माण करने का समझौता किया है, जो सेमीकंडक्टर उत्पादन को वापस लाने की रणनीतिक पहल है। यह कदम मेमोरी चिप की कमी से निपटता है जो स्मार्टफोन की कीमतें बढ़ा रही है और विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता घटाता है। राष्ट्रपति ट्रम्प की घोषणा राष्ट्रीय आर्थिक सुरक्षा की जीत है।
ट्रम्प का एप्पल-इंटेल साझेदारी का दावा अपुष्ट है और यह ताइवान के चिप उद्योग पर दबाव डालने का प्रयास लगता है, जिस पर उन्होंने अमेरिकी कारखाने चुराने का आरोप लगाया है। एआई-संचालित मेमोरी बूम कीमतें बढ़ा रहा है और स्मार्टफोन बाजार को नया आकार दे रहा है, लेकिन इंटेल के शेयरों में उछाल अटकलों को दर्शाता है, पक्के सौदे को नहीं। टीएसएमसी निर्विवाद नेता बना हुआ है।
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