
टॉय स्टोरी 5: जब स्क्रीन ने खिलौनों का बचपन छीना, और जेसी ने अपना खोया अस्तित्व खोजा
पिक्सर की नई फिल्म में खिलौनों और डिजिटल टैबलेट के बीच की लड़ाई, जो बच्चों की परवरिश और आत्म-स्वीकार्यता पर गहरे सवाल उठाती है।
साल 2026 की गर्मियों की एक दोपहर, काउगर्ल जेसी और उसका घोड़ा बुल्सआई एक अनजानी सी ख़ामोशी में डूबे घर के सामने ठिठक गए। अंदर बच्चे थे, पर उनकी हँसी-खेल ग़ायब थी—हर सिर झुका हुआ, हर आँख एक चमकती स्क्रीन पर टिकी। यह नज़ारा उस दुनिया का झटका था जहाँ बोनी जैसी आठ साल की बच्ची भी धीरे-धीरे अपने खिलौनों को भूल रही थी। वुडी और बज़ लाइटइयर के बाद अब बारी थी जेसी की, जिसे सिर्फ़ एक नई दुश्मन टैबलेट से नहीं, अपने अतीत के अँधेरे से भी जूझना था।\n\nबोनी के माता-पिता ने उसे लिलीपैड नाम का टैबलेट दिया, ताकि वह दूसरे बच्चों से जुड़ सके। वुडी के शब्दों में, 'यह सब कुछ कर सकता है; खिलौने तो बस खेलने के काम आते हैं।' लेकिन इस डिवाइस ने बोनी को दोस्त तो दिलाए, पर साथ ही उसे अपने भीतर की कल्पनाशीलता से दूर कर दिया। खिलौने बेबसी से देखते रहे—रेक्स, हैम, बो पीप, सब एक सिरे पर बंधे सवाल में उलझे: क्या खिलौनों का ज़माना ख़त्म हो गया? जेसी के लिए यह डर अकेला नहीं था; सालों पहले उसकी पहली मालकिन ने उसे अँधेरे बिस्तर के नीचे छोड़ दिया था। अब उसका वही पुराना घाव फिर हरा हो उठा।\n\nयह फिल्म महज़ मनोरंजन नहीं—यह उस बहस में कूदती है जो पूरी दुनिया के माता-पिता और शिक्षक कर रहे हैं। दक्षिण कोरिया, मेक्सिको, अमेरिका, हर जगह बच्चों के बढ़ते स्क्रीन टाइम पर चिंता जताई जा रही है। प्यू रिसर्च और विश्व स्वास्थ्य संगठन जैसी संस्थाएँ इसके मानसिक प्रभावों पर अलार्म बजा रही हैं। लेकिन 'टॉय स्टोरी 5' का नज़रिया सपाट नहीं है। लिलीपैड को सिर्फ़ खलनायक नहीं बनाया गया; वह भी मानती है कि बोनी का भला चाहती है। धीरे-धीरे वह खिलौनों के साथ मिलकर काम करने लगती है—टेक्नोलॉजी और इमेजिनेशन के बीच एक पुल बनता है। सह-निर्देशक मैकेना हैरिस का कहना है कि हर 'टॉय स्टोरी' अपने समय का आईना होती है, और यह किस्त डिजिटल युग की सच्चाई को बेबाकी से पेश करती है।\n\nदर्शकों ने इसे हाथों-हाथ लिया। रॉटन टोमैटोज़ पर 95% ऑडियंस स्कोर इस फ्रैंचाइज़ी का सबसे ऊँचा रिकॉर्ड बना, जबकि शुरुआती सप्ताहांत में ही 175 मिलियन डॉलर की कमाई के अनुमान हैं। लैटिन अमेरिकी बाज़ार में मशहूर गायिका बेलिंडा ने लिलीपैड को आवाज़ दी, वहीं मेक्सिको और ब्राज़ील में डब संस्करणों ने फिल्म को स्थानीय रंग से भर दिया। फिल्म खत्म होती है तो एक सुकून भरा दृश्य ठहरता है: जेसी और लिलीपैड ने मिलकर बोनी को असली दुनिया में एक सच्चा दोस्त ढूँढ़ने में मदद की। इस बार खिलौने बक्से में नहीं गए—वे वापस उसी अलमारी में लौटे जहाँ से हर सुबह खेल की शुरुआत होती है। यह कोई हार या जीत की कहानी नहीं; यह सिखाती है कि मासूमियत और मशीन के बीच एक जगह बनाई जा सकती है, जहाँ बच्चा दोनों के साथ बड़ा हो।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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टॉय स्टोरी 5 में वुडी और बज़ की वापसी एक बॉक्स-ऑफिस विजय थी, जो दर्शाती है कि खिलौने डिजिटल तकनीक का विरोध करते हैं। पहली फिल्म के तीस से अधिक वर्षों बाद, पात्र अपना करिश्मा बनाए रखते हैं और दर्शकों की पीढ़ियों को जोड़ते हैं।
टॉय स्टोरी 5 खिलौनों और डिजिटल युग के बीच संघर्ष की पड़ताल करती है, जब बच्चे टैबलेट पसंद करते हैं तो प्रासंगिक बने रहने की चुनौती को उजागर करती है। कथानक इस बात पर विचार करने के लिए आमंत्रित करता है कि तकनीक बचपन को कैसे बदल रही है।
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