
खाड़ी तनाव और तेल उछाल से सोना दबाव में, चौथी मासिक गिरावट की ओर
ईरान-अमेरिका के ताज़ा सैन्य हमलों के बाद कच्चे तेल की कीमतें चढ़ीं, जिससे मुद्रास्फीति की आशंका और फेड दर वृद्धि की संभावना बढ़ने से गैर-प्रतिफल वाली सोने की मांग घटी।
सोमवार को हाजिर सोना 1.3 प्रतिशत गिरकर 4,036 डॉलर प्रति औंस पर आ गया, जो लगातार चौथी मासिक हानि की ओर बढ़ रहा है। अमेरिकी वायदा अनुबंध भी 1.1 प्रतिशत टूटकर 4,051 डॉलर पर आ गए। यह दबाव रविवार तड़के ईरान द्वारा कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद उपजा, जिसके चलते कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया और होर्मुज जलडमरूमध्य से ऊर्जा आपूर्ति फिर धीमी पड़ गई।
पश्चिमी एशिया में यह तनाव ऐसे समय बढ़ा जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्धविराम समझौते के पालन न करने पर ईरानी नेतृत्व को समाप्त करने की धमकी दी थी। हालांकि, बाद में एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि दोनों पक्षों ने शत्रुता रोकने और होर्मुज विवाद पर वार्ता फिर शुरू करने पर सहमति बना ली है। इस भू-राजनीतिक अनिश्चितता ने बाजार की मुद्रास्फीति संबंधी चिंताओं को और गहरा दिया, क्योंकि ऊंची ऊर्जा लागत पहले ही मई में अमेरिकी उपभोक्ता मुद्रास्फीति को तीन वर्षों में पहली बार 4 प्रतिशत के पार ले गई थी।
लंदन स्थित एक्टिवट्रेड्स के विश्लेषक रिकार्डो इवांजेलिस्टा के अनुसार, निवेशक अमेरिका-ईरान शांति वार्ता की प्रगति को लेकर आशंकित हैं, और तनाव के फिर भड़कने पर ऊर्जा कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे केंद्रीय बैंकों से सख्त रुख की उम्मीदें मजबूत होंगी। सीएमई फेडवॉच उपकरण के अनुसार, बाजार इस वर्ष तीन फेडरल रिजर्व दर वृद्धियों की संभावना जता रहे हैं, जिसमें सितंबर में बढ़ोतरी की 61 प्रतिशत संभावना है। ऊंची ब्याज दरों के माहौल में बिना ब्याज वाली सोने की चमक फीकी पड़ जाती है।
भारतीय बाजार में कीमत सुधार के बाद सोना डेढ़ महीने में पहली बार प्रीमियम पर कारोबार करने लगा, जबकि शीर्ष उपभोक्ता चीन में मांग सुस्त रही। अन्य कीमती धातुओं में हाजिर चांदी 2.4 प्रतिशत गिरकर 57.73 डॉलर प्रति औंस पर आ गई, प्लैटिनम 1.4 प्रतिशत घटा, जबकि पैलेडियम 0.6 प्रतिशत चढ़ा।
अब निवेशकों की निगाह इस सप्ताह आने वाले जून के एडीपी रोजगार आंकड़ों और अमेरिकी गैर-कृषि पेरोल पर टिकी है, जो फेड की मौद्रिक नीति की दिशा के और संकेत देंगे। साथ ही, मंगलवार को दोहा में होर्मुज जलडमरूमध्य विवाद पर होने वाली बैठक पर भी बाजार की पैनी नजर रहेगी।
| अरब लेवांत-मगरिब प्रेस | −0.20 | neutral |
|---|---|---|
| भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस | 0.00 | neutral |
The Gulf and Levant watch oil price stability as a thermometer of the US-Iran conflict. The voice is that of the region absorbing shocks yet trying to normalize markets.
Plausibility is built by anchoring the narrative to a precise number ($72) and contrasting price stability with the warlike language of political statements.
This bloc omits the gold price fall and Fed rate hike expectations, focusing solely on oil and geopolitics.
The Indian financial market absorbs the shock of falling gold and Fed rate prospects. The voice is that of the investor calculating losses and margins.
Plausibility comes from precise data (current price, peak, percentage drops) and technical explanation of margin calls, constructing a picture of economic rationality.
This bloc omits the geopolitical context of US-Iran strikes and oil dynamics, treating the gold drop as purely Fed-expectation-driven.
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