
ट्रंप की ईरान के 'पिकैक्स माउंटेन' पर हमले की धमकी, तेहरान ने दी 'विनाशकारी जवाब' की चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति ने नतांज़ के पास स्थित गहरी सुरंगों वाले परमाणु स्थल को निशाना बनाने की बात कही, जबकि ईरान ने अमेरिकी सैनिकों और क्षेत्रीय साझेदारों को कीमत चुकाने की धमकी दी।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को एक रेडियो साक्षात्कार में कहा कि अमेरिकी सेनाएं जल्द ही ईरान के नतांज़ यूरेनियम संवर्धन केंद्र के पास स्थित अत्यधिक सुरक्षित 'पिकैक्स माउंटेन' (कुह-ए-कोलांग गज़ ला) पर हमला कर सकती हैं। ट्रंप ने इसे 'एक अच्छे, बड़े, मोटे शॉट' का संभावित लक्ष्य बताया और कहा कि 'हम शायद जल्द ही पिकैक्स को एक मौका देंगे।' इसके जवाब में, ईरान के एक उच्च-स्तरीय सुरक्षा सूत्र ने सीएनएन को बताया कि यदि ट्रंप अपनी धमकी पर अमल करते हैं तो ईरान 'विनाशकारी जवाब' देगा और 'इसकी कीमत अमेरिकी सैनिकों और क्षेत्र में उनके साझेदारों को चुकानी पड़ेगी।' सूत्र ने अमेरिकी दावों को खारिज करते हुए कहा कि पिकैक्स माउंटेन में किसी भी परमाणु गतिविधि की बात 'गलत' है।
पश्चिमी खुफिया एजेंसियों और वाशिंगटन स्थित इंस्टीट्यूट फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी के अनुसार, यह स्थल ज़ाग्रोस पर्वत श्रृंखला में नतांज़ से लगभग डेढ़ किलोमीटर दक्षिण में स्थित है और इसमें दो गहरी सुरंग प्रणालियाँ हैं, जो सैकड़ों मीटर ठोस ग्रेनाइट चट्टान के नीचे बनी हैं। विशेषज्ञों का आकलन है कि ये सुरंगें अमेरिकी शस्त्रागार के सबसे शक्तिशाली बंकर-भेदी बमों की पहुँच से भी बाहर हैं। ईरान ने 2020 में निर्माण शुरू होने पर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) को बताया था कि यह केवल सेंट्रीफ्यूज संयोजन की सुविधा होगी, लेकिन तेहरान ने कभी भी निरीक्षकों को वहाँ पहुँच नहीं दी। अमेरिकी खुफिया आकलनों में आशंका जताई गई है कि यह स्थल गुप्त यूरेनियम संवर्धन या उच्च-संवर्धित यूरेनियम के भंडारण के लिए बनाया जा रहा है।
यह धमकी ऐसे समय आई है जब अमेरिकी सेनाएँ लगातार तीसरी रात ईरान पर हमले कर रही हैं और वाशिंगटन ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य में नौसैनिक नाकेबंदी फिर से लागू करने की घोषणा की है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, इन हमलों का उद्देश्य 'ईरानी बलों को भारी क्षति पहुँचाना और निर्दोष नागरिकों तथा वाणिज्यिक जहाज़ों पर हमला करने की उनकी क्षमता को कम करना' है। दूसरी ओर, ईरान ने सप्ताहांत में होर्मुज़ जलडमरूमध्य को 'बंद' घोषित कर दिया था और सुरक्षा सूत्र ने कहा कि 'ईरान ईरानी जनता के अधिकारों की रक्षा से पीछे नहीं हटेगा' तथा ट्रंप के पिकैक्स पर हमले का निर्णय 'होर्मुज़ जलडमरूमध्य के संबंध में ईरान की व्यवस्थाओं के कार्यान्वयन में कोई अंतर नहीं लाएगा।'
उपग्रह चित्रों के विश्लेषण से पता चलता है कि जून 2025 में अमेरिकी हमलों के बाद भी पिकैक्स माउंटेन पर निर्माण कार्य जारी रहा है। इंस्टीट्यूट फॉर साइंस एंड इंटरनेशनल सिक्योरिटी ने फरवरी 2026 की उच्च-रिज़ॉल्यूशन तस्वीरों में सुरंग प्रवेश द्वारों पर ताज़ा कंक्रीट और निर्माण वाहनों की मौजूदगी की पहचान की है, जो स्थल की सुरक्षा को और मज़बूत करने के प्रयासों का संकेत देती है। यह गतिविधि अमेरिका और ईरान के बीच 17 जून 2025 को हस्ताक्षरित ज्ञापन का उल्लंघन हो सकती है, जिसमें तेहरान को अपने परमाणु कार्यक्रम की यथास्थिति बनाए रखने और नए निर्माण से बचने का निर्देश दिया गया था। फिलहाल, ट्रंप ने किसी भी संभावित समझौते से पहले आईएईए निरीक्षण की मांग का समर्थन किया है, जबकि ईरानी पक्ष ने किसी भी सैन्य कार्रवाई को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया की चेतावनी दोहराई है।
| भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस | 0.00 | neutral |
|---|---|---|
| अरब खाड़ी प्रेस | −0.20 | neutral |
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | 0.00 | neutral |
India observes Trump's threat as a technical-military fact, without alarmism. The US president speaks of a 'nice big fat shot' and Space Force keeps an eye on the site. There is no room for the Iranian reaction.
Credibility is built by reporting only Trump's words and citing Space Force as the guarantor of surveillance, omitting the Iranian response to maintain a detached and reassuring tone.
The Iranian threat of a 'devastating response', present in the Gulf and Latin American blocs, is missing, which would have increased narrative tension.
The Arab Gulf gives voice to the Iranian threat: if Trump attacks, the response will be devastating and will hit US soldiers and regional partners. Iran is presented as determined to retaliate, not as a victim.
Plausibility is reinforced by citing an anonymous but high-level Iranian security source, lending authority to the threat, and using direct language ('devastating response') that creates urgency.
Trump's claim that a peace deal is still possible, present in the European bloc, is missing, which would have softened the confrontation.
Continental Europe describes the ongoing attacks and the context of the nuclear site, reporting both Trump's statements about a possible deal and the Iranian threat. The narrative is balanced and analytical.
Credibility is built through detailed description of the site (depth, location) and citation of multiple sources (Trump, Iranian source), offering an overview that appears objective.
अपना नज़रिया बढ़ाएँ
Apple ने Nvidia को पछाड़कर दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनी का खिताब वापस लिया
9 भाषाएँ · 22 स्रोत
Technology सेस्पेसएक्स का स्टारशिप परीक्षण अंतिम क्षण में रद्द, इंजन विफलता से शेयर बाजार पर असर
9 भाषाएँ · 16 स्रोत
Science & Health सेप्लास्टिक सर्जरी में देरी और जोखिम पर वैश्विक चिंता, कोलंबिया की अदालत ने दिया ऐतिहासिक आदेश
3 भाषाएँ · 6 स्रोत