
यूरोपीय देशों ने साइबर हमलों के आरोप में रूसी राजदूतों को तलब किया, प्रतिबंध लगाए
फ्रांस, जर्मनी और नीदरलैंड ने एफएसबी द्वारा संचालित कथित साइबर अभियान के विरोध में रूसी राजदूतों को बुलाया; यूरोपीय संघ और ब्रिटेन ने भी नए प्रतिबंधों की घोषणा की।
फ्रांस, जर्मनी और नीदरलैंड ने सोमवार को रूसी राजदूतों को तलब करने की घोषणा की, जिसके पीछे यूरोपीय देशों पर बड़े पैमाने पर साइबर हमलों का आरोप है। फ्रांसीसी विदेश मंत्री ज्यां-नोएल बारो के अनुसार, यह अभियान रूस की संघीय सुरक्षा सेवा (एफएसबी) द्वारा संचालित किया गया और इसका उद्देश्य तोड़फोड़ और जासूसी करना था। हमलों में मंत्रालयों, कंपनियों और सेवा संचालकों को निशाना बनाया गया, जिनमें पोलैंड का रेल बुनियादी ढांचा भी शामिल था। इसी क्रम में यूरोपीय संघ (ईयू) और ब्रिटेन ने भी रूसी साइबर नेटवर्कों पर नए प्रतिबंध लगाए, जिनमें जीआरयू के वरिष्ठ अधिकारी और साइबर अपराधी शामिल हैं।
यूरोपीय पक्ष ने इन कार्रवाइयों को रूस की ‘दुर्भावनापूर्ण साइबर पारिस्थितिकी’ का हिस्सा बताया। ईयू के एक बयान के अनुसार, एफएसबी विभिन्न साइबर खतरा समूहों को नियंत्रित करती है और सरकारी नेटवर्कों में घुसपैठ तथा महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुँचाने जैसी गतिविधियों में लिप्त है। ब्रिटिश सरकार ने कहा कि उसके प्रतिबंध 24 व्यक्तियों और संस्थाओं पर लगाए गए हैं, जो रूसी खुफिया सेवाओं से जुड़े प्रॉक्सी नेटवर्कों के लिए जिम्मेदार हैं। फ्रांस ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने इन हमलों का पता लगाने की क्षमता विकसित कर ली है और अपनी साइबर सुरक्षा को काफी मजबूत किया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ जब पेरिस में यूक्रेन के सहयोगियों के ‘इच्छुक गठबंधन’ का शिखर सम्मेलन चल रहा था।
मॉस्को ने इन आरोपों को खारिज किया है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने उक्त गठबंधन को ‘जंग भड़काने वालों का समूह’ बताते हुए कहा कि ये देश रूस के खिलाफ शत्रुतापूर्ण कार्रवाइयाँ कर रहे हैं। रूसी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पहले ही ऐसे आरोपों को यूरोपीय देशों द्वारा रूस के विरुद्ध अपनी आक्रामक योजनाओं को लागू करने का प्रयास बता चुके हैं। लेंटा.आरयू जैसे मीडिया ने फ्रांस के आरोपों को ‘बिना सबूत’ वाला बताया। रूसी विदेश मंत्रालय की ओर से अभी तक राजदूतों को तलब किए जाने पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
यह कूटनीतिक टकराव यूरोप में रूस के खिलाफ पहले से जारी हाइब्रिड युद्ध के आरोपों की श्रृंखला को आगे बढ़ाता है। इससे पहले स्वीडन, पोलैंड, नॉर्वे और डेनमार्क भी महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर साइबर हमलों की चेतावनी दे चुके हैं। ईयू पहले ही रूस पर 21वें प्रतिबंध पैकेज को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहा है, और सोमवार को और नाम जोड़े जाने की संभावना थी। वैश्विक स्तर पर, राज्य-प्रायोजित साइबर अभियानों का यह मामला डिजिटल बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को लेकर चिंताएँ बढ़ाता है, जिसका दक्षिण एशिया पर भी प्रभाव पड़ सकता है, जहाँ भारत समेत कई देश इसी तरह के खतरों का सामना कर रहे हैं। आने वाले दिनों में फ्रांस, जर्मनी और नीदरलैंड में रूसी राजदूतों को बुलाए जाने की प्रक्रिया पूरी होगी, और ईयू तथा ब्रिटेन के नए प्रतिबंध लागू होंगे।
| रूसी और सीआईएस प्रेस | −0.70 | critical |
|---|---|---|
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | −0.80 | critical |
रूस निराधार आरोपों को खारिज करता है और सबूतों की कमी की निंदा करता है, खुद को पश्चिमी दुष्प्रचार का शिकार बताता है।
रूसी ब्लॉक आरोप को उलटने और रूस को एक समन्वित बदनामी अभियान के लक्ष्य के रूप में पेश करने के लिए सबूतों की अनुपस्थिति पर जोर देता है।
रूसी ब्लॉक कथित साइबर गतिविधियों के विशिष्ट विवरण और कई यूरोपीय देशों की समन्वित प्रतिक्रिया को छोड़ देता है।
यूरोप रूसी साइबर खतरे के खिलाफ मजबूती से कार्य करता है, अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा करता है।
अटलांटिक ब्लॉक आरोपों को स्थापित तथ्यों के रूप में प्रस्तुत करता है और प्रतिबंधों को आवश्यक और आनुपातिक बताने के लिए समन्वित प्रतिक्रिया पर जोर देता है।
अटलांटिक ब्लॉक रूसी इनकार और सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत सबूतों की कमी को छोड़ देता है, आरोपों को निर्विवाद मानता है।
अपना नज़रिया बढ़ाएँ
वैश्विक ऑटो बाजार में विपरीत रुझान: ब्राजील 12 साल बाद 30 लाख बिक्री की ओर, अर्जेंटीना-इटली में गिरावट
4 भाषाएँ · 8 स्रोत
Technology सेरूसी सोयुज से अंतरिक्ष पहुंचे अनिल मेनन, आठ महीने के शोध मिशन की शुरुआत
3 भाषाएँ · 9 स्रोत
Science & Health सेअंतरिक्ष में पहली बार मिली शुद्ध शर्करा, साथ ही जीवाश्मों और महासागरों से जुड़ी तीन अन्य बड़ी खोजों ने जीवन के रहस्यों पर डाली रोशनी
4 भाषाएँ · 5 स्रोत