
सीरिया का हिजबुल्लाह से बातचीत का संकेत, लेबनान में गैर-हस्तक्षेप की नीति दोहराई
सीरियाई विदेश मंत्री असद अल-शिबानी की बेरूत यात्रा के दौरान दमिश्क ने हिजबुल्लाह से मुलाकात की संभावना जताई, लेकिन लेबनान में सैन्य हस्तक्षेप से इनकार किया और द्विपक्षीय सहयोग समिति के गठन पर सहमति बनी।
सीरिया के विदेश मंत्री असद अल-शिबानी ने बृहस्पतिवार को बेरूत की अपनी आधिकारिक यात्रा के दौरान कहा कि यदि राष्ट्रीय हितों की आवश्यकता हुई तो दमिश्क ईरान-समर्थित लेबनानी समूह हिजबुल्लाह से मुलाकात के लिए तैयार है। लेबनानी सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार, शिबानी ने यह भी स्पष्ट किया कि लेबनान में सीरिया का कोई सैन्य हस्तक्षेप नहीं होगा। उन्होंने राष्ट्रपति जोसेफ औन, प्रधानमंत्री नवाफ सलाम और हिजबुल्लाह के सहयोगी संसद अध्यक्ष नबीह बेरी से मुलाकात की, जिसमें द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया गया।
लेबनानी राष्ट्रपति कार्यालय के बयान के मुताबिक, सीरियाई राष्ट्रपति अहमद अल-शरा ने बार-बार आश्वासन दिया है कि सीरिया लेबनान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेगा और न ही उसकी सेना लेबनान में प्रवेश करेगी। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में सुझाव दिया था कि सीरिया हिजबुल्लाह से निपटने में इजरायल से बेहतर काम कर सकता है। रॉयटर्स की मार्च की एक रिपोर्ट के अनुसार, वाशिंगटन ने दमिश्क को पूर्वी लेबनान में सेना भेजने के लिए प्रोत्साहित किया था, लेकिन सीरिया ने क्षेत्रीय युद्ध में फंसने की आशंका से यह प्रस्ताव ठुकरा दिया। ट्रंप के सीरिया दूत ने इस रिपोर्ट को गलत बताया।
यात्रा के दौरान दोनों देशों ने एक उच्च-स्तरीय सहयोग एवं भागीदारी समिति के गठन पर हस्ताक्षर किए, जो बिजली ग्रिड जोड़ने, परिवहन, व्यापार और सीमा आवागमन जैसे क्षेत्रों में काम करेगी। शिबानी ने राष्ट्रपति औन को दमिश्क आने का निमंत्रण भी दिया, जो नई सीरियाई सरकार के सत्ता में आने के बाद किसी लेबनानी राष्ट्रपति की पहली यात्रा होगी। पिछले वर्ष अक्टूबर में शिबानी की पहली बेरूत यात्रा के दौरान सीरियाई बंदियों की अदला-बदली का रास्ता साफ हुआ था, जिसके तहत 250 से अधिक कैदियों को सीरिया भेजा गया।
सीरिया की नई सरकार में वे पूर्व विद्रोही और कमांडर शामिल हैं जिन्होंने बशर अल-असद शासन के समर्थन में सीरिया में तैनात हिजबुल्लाह लड़ाकों के खिलाफ वर्षों तक लड़ाई लड़ी। दमिश्क हिजबुल्लाह को राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी मानता है और उसने समूह की हथियार आपूर्ति लाइनें काटने के साथ ही कथित हिजबुल्लाह गुटों की गिरफ्तारियां भी की हैं। हालांकि, क्षेत्रीय विश्लेषकों के अनुसार, 14 वर्षों के गृहयुद्ध से उबर रहा सीरिया फिलहाल स्थिरता बनाए रखने और सांप्रदायिक तनाव से बचने के लिए सैन्य हस्तक्षेप से बचना चाहता है।
भारत जैसे दक्षिण एशियाई देशों के लिए, लेबनान-सीरिया संबंधों में स्थिरता पश्चिम एशिया में ऊर्जा आपूर्ति और प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। फिलहाल, दमिश्क और बेरूत के बीच उच्च-स्तरीय समिति के गठन और राष्ट्रपति औन की संभावित सीरिया यात्रा से संबंधों के पुनर्निर्धारण की प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
2 संपादकीय समूह · 3 भाषाएँ
During a visit to Beirut, the Syrian foreign minister said Damascus is open to meeting Hezbollah if national interests require it. The statement comes as Washington pressures Syria to take a more active role against the Iran-backed group. Talks with Lebanese leaders did not directly address the Hezbollah issue.
Damascus has expressed readiness to take part in a meeting with Hezbollah representatives if it serves Syrian interests. The statement came as President Trump criticized Israel's methods and suggested Syria could handle the group more effectively. The Syrian leadership, however, has no intention of military intervention in Lebanon.
अपना नज़रिया बढ़ाएँ
वैश्विक ऑटो बाजार में चीनी कंपनियों की धमक: BYD टेस्ला को पीछे छोड़ने को तैयार, यूरोपीय दिग्गज संकट में
3 भाषाएँ · 13 स्रोत
Technology सेभारत ने व्हाट्सएप का यूजरनेम फीचर रोका, टेलीग्राम और सिग्नल पर भी शिकंजा
4 भाषाएँ · 16 स्रोत
Science & Health सेनींद की अवधि और गुणवत्ता: कम या ज्यादा सोना दोनों ही बढ़ा सकते हैं जैविक उम्र और हृदय जोखिम
4 भाषाएँ · 6 स्रोत