
दक्षिण लेबनान में इजरायली सेना की स्थायी तैनाती का एलान, हिजबुल्लाह का विरोध
अमेरिका-ईरान के बीच हुए समझौते के बावजूद, इजरायल ने दक्षिण लेबनान के सुरक्षा क्षेत्र में सेना बनाए रखने की घोषणा की; हिजबुल्लाह ने हर उल्लंघन का मुकाबला करने की चेतावनी दी।
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार को कहा कि उनकी सेना दक्षिण लेबनान के सुरक्षा क्षेत्र में “जब तक जरूरी हो” बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि उत्तरी इजरायल के निवासियों की सुरक्षा के लिए यह प्रतिबद्धता अपरिवर्तनीय है। इसके जवाब में, हिजबुल्लाह प्रमुख नईम कासिम ने स्पष्ट किया कि इजरायल लेबनान में नहीं रह सकता और समूह हर उल्लंघन का मुकाबला करेगा। यह बयान अमेरिका और ईरान के बीच हुए उस समझौता-ज्ञापन के बाद आया जिसमें लेबनान में आक्रामकता पर तुरंत रोक लगाने का आह्वान किया गया था, लेकिन जमीनी हकीकत में लड़ाई जारी है।
इजरायली रक्षा मंत्री यिसराइल कात्स ने कहा कि सेना को खतरों को खत्म करने के लिए कोई सीमा नहीं है और सेना करीब 10 किलोमीटर के सुरक्षा क्षेत्र में तैनात रहेगी। इजरायली सैन्य सूत्रों के अनुसार, इस अभियान में हिजबुल्लाह को भारी नुकसान पहुँचा है और उसकी क्षमता बहाली को रोकना प्राथमिकता है। वहीं, हिजबुल्लाह से जुड़े लेबनानी सांसद हसन फदलल्लाह ने कहा कि प्रतिरोध और हथियार बने रहेंगे, चाहे सरकार हथियारों पर एकाधिकार की मांग करे। हिजबुल्लाह ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की निंदा करते हुए कहा कि वह इजरायली “कब्जे” का समर्थन कर रहे हैं, जबकि ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका को इजरायली हमलों की सीधी जिम्मेदारी लेनी होगी।
लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, 2 मार्च से अब तक इजरायली हमलों में 4 हजार से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और 12 हजार से अधिक घायल हैं, जिनमें चिकित्साकर्मी भी शामिल हैं। सेना ने नागरिकों से सीमावर्ती गाँवों में लौटने में सावधानी बरतने को कहा है, क्योंकि बमबारी के अविस्फोटित अवशेष और सुरक्षा खतरे बने हुए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने शुक्रवार को उम्मीद जताई थी कि सभी मोर्चों पर पूर्ण युद्धविराम लागू होगा, लेकिन इजरायली अधिकारियों का कहना है कि हिजबुल्लाह द्वारा हाल ही में किए गए हमलों के बाद जवाबी कार्रवाई में बड़े पैमाने पर ढाँचे को निशाना बनाया गया।
विश्लेषकों के अनुसार, दक्षिण लेबनान में इजरायली सैन्य उपस्थिति को लेकर जारी असहमति युद्धविराम की राह में सबसे बड़ी बाधा है। हिजबुल्लाह इसे संप्रभुता का हनन मानता है और वापसी के बिना किसी समझौते को अस्वीकार करता है। ईरान, जो हिजबुल्लाह का मुख्य समर्थक है, ने इस मुद्दे को अमेरिका के साथ परमाणु वार्ता से भी जोड़ दिया है। अब सबकी निगाहें स्विट्जरलैंड में चल रही वार्ताओं पर हैं, जहाँ कूटनीतिक कोशिशें जारी हैं, लेकिन जमीनी यथास्थिति से संकेत हैं कि निकट भविष्य में तनाव में कमी की संभावना कम है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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The Iranian press reports Netanyahu's statement with skepticism, framing it as a baseless claim. It highlights Hezbollah's rejection of any Israeli presence and portrays Israel as the aggressor. The narrative emphasizes Iran's warning about nuclear weapons and the need to resist occupation.
Israeli media highlight Hezbollah's threat to create 'no safe zone' for IDF soldiers, portraying the group as a dangerous aggressor. The demand for immediate withdrawal is presented as an unreasonable ultimatum. The coverage underscores the need for Israel to maintain security control in southern Lebanon to protect northern residents.
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