
लक्सर की धूल के नीचे से निकला तीन हज़ार साल पुराना चेहरा
मिस्र के शेख़ अब्द अल-क़ुरना क़ब्रिस्तान में पुरातत्वविदों को रामेसीद काल की एक निजी क़ब्र मिली, जिसकी दीवारों पर पासर और उनकी पत्नी की जीवंत तस्वीरें अब भी चमक रही हैं।
ब्रश का एक हल्का सा स्पर्श, और सदियों से जमी धूल की पतली परत धीरे-धीरे हटने लगी। नीचे से रंग उभरे—गेरुआ, नीला, और सुनहरा। एक आदमी देवताओं के सामने श्रद्धा से झुका हुआ था, और ठीक बगल में, वह अपनी पत्नी के साथ चढ़ावे की मेज़ के सामने बैठा दिखाई दिया। यह दृश्य कोई ताज़ा पेंटिंग नहीं, बल्कि तीन हज़ार साल पुरानी कहानी थी, जो लक्सर के पश्चिमी तट पर एक क़ब्र के भीतर सहेजी गई थी।
यह खोज नीदरलैंड के लाइडन विश्वविद्यालय की एक पुरातत्व टीम ने की, जो 2018 से शेख़ अब्द अल-क़ुरना इलाक़े में काम कर रही है। मिस्र के पर्यटन एवं पुरावशेष मंत्रालय के अनुसार, क़ब्र एक ऐसे व्यक्ति की है जिसका नाम ‘पासर’ था। दीवारों पर उकेरे गए चित्रों की कलात्मक शैली से विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह रामेसीद काल (1292-1077 ई.पू.) की है, जब मिस्र पर 19वें और 20वें राजवंशों का शासन था। क़ब्र की बनावट उस दौर की निजी थीबाई क़ब्रों की पारंपरिक योजना को दोहराती है: एक खुला आंगन, उल्टे ‘T’ आकार की चट्टान में काटी गई पूजा-स्थली, और ज़मीन के नीचे दफ़न कक्ष।
थीब्स का यह क़ब्रिस्तान सदियों से नए साम्राज्य के अभिजात वर्ग की अंतिम विश्राम-स्थली रहा है। ऐसी क़ब्रें सिर्फ़ शवों को रखने की जगह नहीं थीं, बल्कि मृतक की सामाजिक हैसियत और धार्मिक आस्था का स्थायी बयान थीं। पासर की क़ब्र के आंगन में कच्ची ईंटों का एक चबूतरा मिला है, जिसके बीच में एक आला शव-स्तंभ रखने के लिए बना था। वहीं से सीढ़ियाँ नीचे की ओर जाती हैं, जिनके दोनों ओर ढलानें हैं—मानो ज़िंदा दुनिया से मृतकों की दुनिया में उतरने का कोई गंभीर रास्ता।
मिस्र के अधिकारियों के लिए यह खोज सिर्फ़ ऐतिहासिक दस्तावेज़ नहीं है; यह पर्यटन को गति देने की एक उम्मीद भी है। लक्सर पहले से ही दुनिया भर के यात्रियों—जिनमें बड़ी संख्या में भारतीय पर्यटक भी शामिल हैं—के लिए प्राचीन सभ्यता का एक प्रमुख केंद्र है। पिछले साल ही पास की एक फ़ैरोनी क़ब्र बीस साल की मरम्मत के बाद दोबारा खोली गई थी, और इसी साल उत्तर में बेहीरा प्रांत में यूनानी-रोमन क़ब्रिस्तान से 2,300 साल पुरानी कलाकृतियाँ मिली थीं। पासर की क़ब्र इसी कड़ी में एक ताज़ा अध्याय जोड़ती है, जो बताती है कि लक्सर की धरती अब भी कितने रहस्य समेटे हुए है।
फ़िलहाल, पुरातत्वविदों का काम जारी है। दीवारों पर जमी धूल की पतली परत के नीचे अभी और चित्र छिपे हो सकते हैं। टीम अगले सीज़नों में क़ब्र के संरचनात्मक सुदृढ़ीकरण और रंगीन सज्जा के संरक्षण पर ध्यान देगी। आंगन में रखी वह सीढ़ी, जिसके दोनों ओर ढलानें हैं, अब भी एक प्रवेश द्वार की तरह खड़ी है—एक ऐसा मौन प्रवेश द्वार, जो तीन हज़ार साल बाद भी किसी अनजान कहानी की ओर इशारा कर रहा है।
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मिस्र का पर्यटन क्षेत्र इस खोज को एक आर्थिक जीवन रेखा के रूप में देखता है, प्राचीन विरासत को सीधे भविष्य के राजस्व से जोड़ता है।
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टी-आकार के चैपल का वास्तुशिल्प विवरण और विशिष्ट रामेसाइड काल को छोड़ दिया गया है, इसके बजाय पर्यटन क्षमता पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
मिस्र इस खोज को अपनी प्राचीन और आधुनिक महानता के प्रमाण के रूप में मनाता है, अधिकारी मिशन की प्रशंसा करते हैं और पर्यटन लाभों पर प्रकाश डालते हैं।
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टी-आकार के चैपल का विशिष्ट वास्तुशिल्प विवरण और यह तथ्य कि कब्र एक निजी दफन है (शाही नहीं) को छोड़ दिया गया है, इसके बजाय मिस्र की सभ्यता की भव्य कथा पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
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