
माली में समन्वित हमले: अज़ावाद मोर्चे ने कई शहरों पर हमला, रूसी हेलीकॉप्टर गिराने का दावा
शनिवार तड़के माली के उत्तर और मध्य क्षेत्रों में एक साथ हुए हमलों में अज़ावाद लिबरेशन फ्रंट ने सैन्य ठिकानों पर कब्ज़ा, सैनिकों को बंदी बनाने और रूसी अफ्रीका कोर के हेलीकॉप्टर को मार गिराने का दावा किया, जबकि सेना ने स्थिति नियंत्रण में होने की बात कही।
5 जुलाई 2026 को माली में तड़के करीब 4-5 बजे शुरू हुए समन्वित हमलों ने उत्तरी शहरों गाओ, अनेफिस, अगुएलहोक और मध्यवर्ती सेवारे के साथ-साथ राजधानी बमाको से 70 किलोमीटर दूर स्थित केनिएरोबा जेल परिसर को निशाना बनाया। माली सेना ने पुष्टि की कि उसके पाँच ठिकानों पर "हमले के प्रयास" हुए और बताया कि सेना जवाबी कार्रवाई कर रही है। अज़ावाद लिबरेशन फ्रंट (एफएलए) के प्रवक्ता मोहम्मद एलमाउलूद रमादान ने एएफपी को बताया कि उनके लड़ाकों ने अनेफिस में प्रवेश कर लिया है और "कई सैन्य ठिकाने गिर चुके हैं, लेकिन शहर के अंदर अब भी लड़ाई जारी है।" एफएलए ने माली सेना के जवानों को बंदी बनाने और एक रूसी अफ्रीका कोर के हेलीकॉप्टर को मार गिराने का भी दावा किया।
स्थानीय निवासियों और सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, गाओ में सेना के शिविर के पास गोलीबारी और "तेज़ धमाके" सुने गए, जबकि सेवारे में विस्फोटों के बाद कई विमानों को उड़ान भरते देखा गया। केनिएरोबा जेल में बंद एक कैदी ने एएफपी को बताया, "हम अपने बिस्तरों के नीचे हैं, गोलीबारी जारी है।" माली सेना ने संक्षिप्त बयान में कहा कि स्थिति पर नज़र रखी जा रही है। एफएलए ने अनेफिस में एक बीटीआर-प्रकार की बख्तरबंद गाड़ी पर कब्ज़ा करने की भी सूचना दी। हालाँकि, रूसी हेलीकॉप्टर गिराए जाने के दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है, और माली सरकार या रूसी पक्ष की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
ये हमले अप्रैल 2026 के अंत में हुए उस बड़े हमले के दो महीने से अधिक समय बाद हुए हैं, जिसमें रक्षा मंत्री सादियो कामारा की मौत हो गई थी और किदाल क्षेत्र का रणनीतिक शहर किदाल एफएलए के नियंत्रण में चला गया था। क्षेत्रीय सुरक्षा विश्लेषकों के अनुसार, अनेफिस और अगुएलहोक किदाल क्षेत्र में माली सेना की अंतिम उपस्थिति वाले स्थान हैं, जिससे इन पर हमला सैन्य शासन के लिए एक और बड़ा झटका है। हमलों का भौगोलिक विस्तार—सुदूर उत्तर से लेकर मध्य माली और राजधानी के निकट तक—यह दर्शाता है कि एफएलए और अल-कायदा से जुड़े जेएनआईएम जैसे समूह अपनी परिचालन क्षमता बढ़ा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा आकलनों के अनुसार, सैन्य शासन द्वारा पश्चिमी साझेदारों की जगह रूस से सहयोग लेने के बाद से माली में आतंकवादी हमलों की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई है।
दक्षिण एशिया के संदर्भ में, सहेल क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता वैश्विक आतंकी नेटवर्कों के विस्तार और प्रवासन संकट को गहरा सकती है, हालाँकि इसका प्रत्यक्ष प्रभाव सीमित है। भारत ने पहले भी माली में शांति स्थापना के लिए संयुक्त राष्ट्र मिशनों में योगदान दिया है और क्षेत्रीय स्थिरता पर नज़र रखता है। फिलहाल, माली सेना ने किसी बड़े जवाबी अभियान की घोषणा नहीं की है, और अनेफिस में लड़ाई जारी रहने की खबरें हैं। आने वाले दिनों में सैन्य शासन की प्रतिक्रिया और रूसी भागीदारी की सीमा पर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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समन्वित हमलों को एक बड़ी वृद्धि के रूप में रिपोर्ट किया गया है, जिसमें अज़ावाद मुक्ति मोर्चा ने सैनिकों को पकड़ने और शहरों में प्रवेश करने का दावा किया है। कथा हमलों की एक साथ प्रकृति और विद्रोही समूह की सैन्य सफलताओं पर केंद्रित है, बिना राजनीतिक संदर्भ या जुंटा की कमजोरियों में जाए।
हमलों को एक नई लहर के रूप में प्रस्तुत किया गया है जो सैन्य जुंटा को और कमजोर करती है, जो पहले से ही पिछले हमलों से कमजोर हो चुका है। विशेषज्ञ विश्लेषण से पता चलता है कि कुछ लक्ष्य विचलित करने वाले हैं, जो एक रणनीतिक विद्रोही अभियान का संकेत देते हैं। कथा जुंटा की भेद्यता और विद्रोहियों की समन्वित योजना पर जोर देती है।
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