
ईरान की अमेरिका को दो टूक: 'एकतरफा सौदों का दौर खत्म', होर्मुज संकट गहराया
ईरानी संसद अध्यक्ष ने इस्लामाबाद समझौते के उल्लंघन पर अमेरिका को आगाह करते हुए 'एकतरफा सौदों' को खारिज किया, और होर्मुज जलडमरूमध्य पर सैन्य तनाव के बीच उसे खोलने की ज़िम्मेदारी याद दिलाई।
ईरानी संसद अध्यक्ष और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर ग़ालीबाफ़ ने रविवार को चेतावनी दी कि "एकतरफा सौदों का दौर खत्म हो चुका है" और अमेरिका को इस्लामाबाद समझौते की शर्तों का पालन करना होगा, अन्यथा उसे परिणाम भुगतने होंगे। सोशल मीडिया प्लैटफ़ॉर्म एक्स पर पोस्ट किए गए बयान में उन्होंने 18 जून को हस्ताक्षरित इस समझौते की धारा पांच का हवाला दिया, जिसके तहत ईरान को 60 दिनों के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य से वाणिज्यिक जहाजों के सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था करनी थी। यह बयान उस समय आया जब अमेरिकी सेन्ट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने ईरान द्वारा जलडमरूमध्य को बंद करने और एक वाणिज्यिक जहाज पर गोलीबारी के बाद दक्षिणी ईरान में सैन्य ठिकानों पर हमले किए थे।
ईरानी सशस्त्र बलों ने शनिवार रात अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों पर समन्वित जवाबी कार्रवाई की। इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) के अनुसार, पहले चरण में जॉर्डन के प्रिंस हसन एयर बेस पर मिसाइल हमले हुए, फिर कतर के अल उदेद एयर बेस और ओमान के दुक़्म बंदरगाह पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं। ईरानी सेना ने कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन हमले किए, जिनमें वायु रक्षा, रडार और संचार प्रणालियों को निशाना बनाया गया। ईरानी सैन्य अधिकारियों ने कहा कि ये कार्रवाइयाँ अमेरिका द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य के दक्षिण में अवैध जहाज़ों की आवाजाही और ईरानी तटीय ठिकानों पर हमलों के जवाब में की गईं।
वाशिंगटन ने अपने हमलों को जलडमरूमध्य पर ईरान के नियंत्रण को कम करने और वाणिज्यिक नौवहन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उचित ठहराया। रूसी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस्लामाबाद समझौता केवल समुद्री आवागमन तक सीमित नहीं है; इसके तहत सैन्य कार्रवाइयों को स्थायी रूप से रोकने, समुद्री नाकेबंदी हटाने, ईरानी तेल निर्यात के लिए अमेरिकी अनुमति देने और जब्त ईरानी संपत्तियों को वापस करने जैसे प्रावधान शामिल हैं। अमेरिकी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि सैन्य हमले बड़े पैमाने की शत्रुता की बहाली का संकेत नहीं हैं और कूटनीति के साथ सैन्य दबाव भी जारी रहेगा।
यह तनाव पिछले कई वर्षों की घटनाओं की पृष्ठभूमि में उभरा है, जिसमें अमेरिका का 2018 में परमाणु समझौते से हटना, "अधिकतम दबाव" की नीति, ईरान द्वारा उच्च-संवर्धित यूरेनियम भंडार का विस्तार, और 2025 में इज़राइली हमले शामिल हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य, जिससे वैश्विक तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा गुज़रता है, के बंद होने से अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों पर असर पड़ रहा है। ईरान का कहना है कि जब तक क्षेत्र में अमेरिकी हस्तक्षेप जारी रहता है, यह मार्ग बंद रहेगा। फ़िलहाल, दोनों पक्षों के बीच समझौते की शर्तों पर असहमति बनी हुई है, और आगे की बातचीत या सैन्य कार्रवाइयाँ इस संकट की दिशा तय करेंगी।
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | −0.30 | critical |
|---|---|---|
| ईरानी और संबद्ध प्रेस | +0.70 | aligned |
| रूसी और सीआईएस प्रेस | +0.40 | aligned |
| दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस | 0.00 | neutral |
Ghalibaf's warning is a dangerous provocation that risks triggering conflict; Tehran must honor agreements, not threaten.
By linking the warning to US airstrikes, the bloc attributes escalation responsibility to Tehran, presenting the statement as a disproportionate reaction.
Atlantic outlets omit the specific reference to the Islamabad memorandum, which Iran uses to ground its demand for adherence to agreements.
The era of one-sided deals is over; the US has broken agreements and must now pay the price for its actions.
By citing the Islamabad memorandum, the bloc establishes a legal framework that legitimizes the Iranian warning, turning a threat into a demand for rule adherence.
Iranian outlets omit that the warning follows recent US airstrikes, presenting the statement as an autonomous initiative.
The United States has violated agreements and now Iran justly demands adherence; it is Washington that must pay the price for its unreliability.
By placing the news in a context of criticism of American unilateralism, the bloc strengthens solidarity with Iran and legitimizes its position.
Russian outlets omit mentioning the details of the Islamabad memorandum, focusing instead on American guilt.
Ghalibaf stated that the era of one-sided deals is over and warned the US; tensions in the Strait of Hormuz are rising.
By presenting the news without comment or contextualization that favors any side, the bloc preserves impartiality and leaves judgment to the reader.
Southeast Asian outlets omit the reference to the US airstrikes that preceded the warning, reducing the conflictual potential.
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