
जुलाई में सामान्य से कम बारिश का अनुमान, अल नीनो के मजबूत होने से मानसून पर दबाव
भारत मौसम विज्ञान विभाग ने जुलाई में दीर्घावधि औसत का 94% से कम वर्षा का पूर्वानुमान जारी किया है, जबकि जून 39% की कमी के साथ 1901 के बाद पांचवां सबसे शुष्क महीना रहा।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के 30 जून के मासिक पूर्वानुमान के अनुसार, जुलाई 2026 में देशभर में मानसून की बारिश दीर्घावधि औसत (एलपीए) के 94% से कम रहने की संभावना है। यह आकलन ऐसे समय आया है जब जून में सामान्य से 39% कम वर्षा दर्ज की गई, जो 1901 के बाद पांचवां सबसे शुष्क जून रहा। इस कमी का कारण भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थितियों का लगातार मजबूत होना है, जो मानसून परिसंचरण को कमजोर करता है। प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सतह का तापमान सामान्य से 0.7 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया है, और वैश्विक मॉडल नवंबर 2026 से जनवरी 2027 के बीच इसके ‘अति प्रबल’ श्रेणी तक पहुंचने की 63% संभावना जता रहे हैं।
अल नीनो के कारण स्थल और महासागर के बीच तापमान का अंतर घटने से बादल निर्माण और वर्षा बाधित होती है। हालांकि, आईएमडी ने स्पष्ट किया है कि उत्तर-पश्चिम, उत्तर-पूर्व, पूर्व-मध्य भारत और पूर्वी प्रायद्वीपीय क्षेत्र के कुछ हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है। उपग्रह चित्रों में बंगाल की खाड़ी से जम्मू-कश्मीर तक 1,500 किमी लंबी मानसून द्रोणिका का निर्माण दिखा है, जिसके दक्षिण की ओर खिसकने पर दिल्ली-एनसीआर सहित उत्तर भारत में 1 से 4 जुलाई के बीच मानसून के सक्रिय होने की उम्मीद है। दूसरी ओर, इंडोनेशिया की मौसम एजेंसी बीएमकेजी ने अल नीनो के 9 से 12 महीने तक चलने का अनुमान लगाया है, जिससे जावा, बाली, नुसा तेंगारा और दक्षिणी सुमात्रा जैसे क्षेत्रों में शुष्क मौसम के दौरान वर्षा सामान्य से कम रह सकती है। हांगकांग वेधशाला ने भी इस वर्ष और अगले वर्ष रिकॉर्ड उच्च तापमान की चेतावनी दी है।
कृषि पर प्रभाव पहले से ही दिखने लगा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, खरीफ बुआई पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग 23% पीछे चल रही है, जिसमें धान, दलहन, सोयाबीन और कपास प्रमुख रूप से प्रभावित हैं। कर्नाटक में जून में सामान्य 199 मिमी के मुकाबले केवल 116 मिमी बारिश हुई, जो 42% की कमी दर्शाता है, जबकि तेलंगाना में 12% की कमी के साथ 115.3 मिमी वर्षा दर्ज की गई। विशेषज्ञों का कहना है कि सिंचाई पर निर्भरता बढ़ने से किसानों की लागत बढ़ेगी और ग्रामीण मांग प्रभावित हो सकती है। भारतीय रिज़र्व बैंक ने मानसून के स्थानिक और कालिक वितरण को लेकर अनिश्चितता को मुद्रास्फीति के लिए ऊपरी जोखिम बताया है, हालांकि पर्याप्त खाद्यान्न भंडार और जलाशय स्तर से कुछ राहत की उम्मीद है।
आगे की राह जुलाई के प्रदर्शन पर निर्भर करेगी, क्योंकि यह माह मौसमी वर्षा का एक बड़ा हिस्सा लाता है। ऑस्ट्रेलिया के मौसम ब्यूरो ने अगस्त-सितंबर में सकारात्मक हिंद महासागर डाइपोल (आईओडी) विकसित होने का संकेत दिया है, जो मानसून को मजबूती दे सकता है। फिलहाल, बंगाल की खाड़ी में बनने वाला ताजा निम्न दबाव क्षेत्र आने वाले सप्ताह में उत्तर भारत में व्यापक वर्षा ला सकता है। अगला महत्वपूर्ण पड़ाव जुलाई के अंत में वास्तविक वर्षा आंकड़े और अल नीनो की तीव्रता का अद्यतन आकलन होगा।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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The Indian monsoon is under threat from El Niño, with July forecasts predicting a rainfall deficit that could devastate agriculture and worsen water scarcity. The government must act urgently to mitigate the impact on farmers and food security. This is a national crisis demanding immediate attention.
The El Niño-induced monsoon deficit in India presents both challenges and opportunities. While it may disrupt regional agriculture, it also opens avenues for Chinese exports of water-saving technologies and climate adaptation solutions. China's experience in managing water resources can be a model for cooperation.
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