
पुतिन-ट्रंप वार्ता के बाद नाटो शिखर सम्मेलन से पहले यूक्रेन संकट पर कूटनीतिक हलचल
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और यूक्रेन के नेताओं से अलग-अलग फोन पर बातचीत की, जिसे क्रेमलिन ने अपनी स्थिति स्पष्ट करने का अवसर बताया; अब नाटो शिखर सम्मेलन में ट्रंप-ज़ेलेंस्की मुलाकात पर सबकी निगाहें हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 4 जुलाई को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से लगभग डेढ़ घंटे तक फोन पर बातचीत की, जिसके बाद दोनों पक्षों ने निकट भविष्य में संपर्क जारी रखने पर सहमति जताई। क्रेमलिन के अनुसार, यह कॉल अमेरिकी पक्ष की पहल पर हुई और इसमें यूक्रेन संकट के समाधान पर चर्चा हुई। व्हाइट हाउस ने पुष्टि की है कि ट्रंप 7-8 जुलाई को अंकारा में होने वाले नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की से अलग से मुलाकात करेंगे। यह कूटनीतिक गतिविधि ऐसे समय में हुई है जब युद्ध चार वर्षों से अधिक समय से जारी है और हाल ही में क्रीमिया पर यूक्रेनी बमबारी में एक व्यक्ति की मौत की खबरें आई हैं।
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने इस वार्ता को “अच्छा अवसर” बताया जिसके ज़रिए रूस अपनी स्थिति सीधे अमेरिकी राष्ट्रपति तक पहुंचा सका। पेस्कोव के अनुसार, ट्रंप का रुख “लगातार एक जैसा” है और वह पुतिन से मिलने वाली जानकारी को सुनने के लिए तैयार हैं। मॉस्को का आरोप है कि यूक्रेन और उसके यूरोपीय सहयोगी संघर्ष को लंबा खींच रहे हैं, जबकि रूसी सेनाएं पूर्वी यूक्रेन में आगे बढ़ रही हैं। दूसरी ओर, यूक्रेनी राष्ट्रपति कार्यालय के बयान में कहा गया कि ज़ेलेंस्की ने ट्रंप के साथ युद्ध के मोर्चे की स्थिति पर चर्चा की और यह आकलन पेश किया कि यदि अमेरिका सक्रिय मध्यस्थता की भूमिका बनाए रखता है तो युद्ध समाप्त करने की वास्तविक संभावना है।
इस कूटनीतिक आदान-प्रदान के बीच, ज़मीनी स्तर पर तनाव बरकरार है। रूस समर्थित प्रशासन ने क्रीमिया पर हमले में एक नागरिक की मौत और दो के घायल होने की सूचना दी, जबकि कीव ने रूसी सेना की पूर्वी मोर्चे पर बढ़त के दावे को खारिज किया है। नाटो शिखर सम्मेलन का आयोजन तुर्की में होना इस मायने में महत्वपूर्ण है कि अंकारा ने पहले भी रूस और यूक्रेन के बीच मध्यस्थता के प्रयास किए हैं। व्हाइट हाउस ने संकेत दिया है कि ट्रंप ज़ेलेंस्की के अलावा सीरिया के अंतरिम राष्ट्रपति से भी मुलाकात कर सकते हैं, जिससे शिखर सम्मेलन का एजेंडा व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों से जुड़ सकता है।
दक्षिण एशियाई विश्लेषकों के अनुसार, चार वर्षों से अधिक लंबा यह युद्ध वैश्विक ऊर्जा और खाद्य आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित कर रहा है, जिसका सीधा प्रभाव भारत जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ता है। भारत ने लगातार बातचीत के ज़रिए समाधान का समर्थन किया है और क्षेत्रीय स्थिरता को प्राथमिकता दी है। क्रेमलिन ने स्पष्ट किया है कि पुतिन और ट्रंप के बीच संपर्क जल्द ही फिर से होगा, संभवतः नाटो बैठक के बाद, जबकि अमेरिकी पक्ष ने अभी तक इस पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं की है।
फिलहाल, सभी की निगाहें बुधवार को होने वाली ट्रंप-ज़ेलेंस्की मुलाकात पर टिकी हैं, जिसके नतीजे आगे की कूटनीतिक दिशा तय कर सकते हैं। क्रेमलिन का कहना है कि वह किसी भी समझौते के लिए अपनी शर्तों पर कायम है, जबकि कीव अमेरिकी भागीदारी को युद्धविराम की कुंजी मानता है। इस बीच, यूरोपीय संघ की भूमिका को लेकर मास्को का संदेह बना हुआ है, जिससे बहुपक्षीय कूटनीति की राह आसान नहीं दिखती।
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | 0.00 | neutral |
|---|---|---|
| रूसी और सीआईएस प्रेस | +0.70 | aligned |
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | +0.60 | aligned |
A balanced picture is drawn: Putin and Zelensky move their pieces with Trump, while the conflict continues with casualties and bombings.
Kremlin statements and reports of attacks are alternated, creating an effect of objectivity that favors neither side.
Russia projects the dialogue as a successful direct channel: Putin lays out Russia's position and Trump listens, proving himself consistent and open.
Peskov's statements are repeated without counterpoint, turning the call into evidence of American willingness to accommodate Russian demands.
It omits the Ukrainian perspective, the fact that Zelensky spoke with Trump, and the context of ongoing attacks, present in Latin American press.
The Kremlin projects the dialogue as a successful direct channel: Putin lays out Russia's position and Trump listens, proving himself consistent and open.
Peskov's statements are repeated without counterpoint, turning the call into evidence of American willingness to accommodate Russian demands.
It omits the Ukrainian perspective, the fact that Zelensky spoke with Trump, and the context of ongoing attacks, present in Latin American press.
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