
स्पेन सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री राजोय की टिप्पणी को नस्लवादी बताया, फ्रांस से माफी मांगी
विश्व कप सेमीफाइनल से पहले फ्रांसीसी टीम पर विवादित लेख के बाद मैड्रिड ने कूटनीतिक स्तर पर खेद व्यक्त किया, दोनों देशों के खिलाड़ियों और नेताओं ने विविधता का समर्थन किया।
स्पेन सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री मारियानो राजोय के उस लेख पर कड़ी आपत्ति जताई है जिसमें उन्होंने फ्रांस की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम को “बिना फ्रांसीसियों वाली” बताया था। मंगलवार को हुई प्रेस वार्ता में स्पेन की सरकारी प्रवक्ता एल्मा साइज़ ने राजोय के बयानों को “नस्लवादी, गैर-जिम्मेदाराना और पूर्व प्रधानमंत्री के लिए अनुपयुक्त” करार देते हुए कहा कि वे अब तक माफी न मांगने पर हैरान हैं। इसी दिन विदेश मंत्री होज़े मानुएल अल्बारेस ने अपने फ्रांसीसी समकक्ष को बताया कि राजोय की टिप्पणियां “असहनीय” हैं और “नस्लवाद व विदेशी-द्वेष का ज़हर” लिए हुए हैं, तथा ये अधिकांश स्पेनियों की राय नहीं दर्शातीं।
स्पेन के राजनीतिक और खेल जगत से प्रतिक्रियाएं तीखी रहीं। प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज़ ने सोशल मीडिया पर लिखा कि कुछ लोग राष्ट्रीयता उपनाम, जन्मस्थान या त्वचा के रंग से मापते हैं, जबकि अन्य इसे देश के प्रति लगाव और योगदान से आंकते हैं। स्पेनिश खिलाड़ियों ने भी मोर्चा खोला: 19 वर्षीय स्टार लामिने यामल ने कहा कि फुटबॉल समाज को जोड़ने का काम करता है और इसके लिए फ्रांस और स्पेन से बेहतर उदाहरण नहीं हैं। डिफेंडर पाउ कुबारसी ने राष्ट्रीय पहचान को त्वचा के रंग या पारिवारिक मूल से न जोड़ने की अपील की।
फ्रांस में राजोय की टिप्पणी पर दुर्लभ सर्वदलीय निंदा देखी गई। विदेश मंत्री ज्यां-नोएल बारो ने कहा कि “फ्रांस की कोई त्वचा का रंग नहीं है” और ऐसा कोई भी बयान मूर्खता या नस्लवाद का प्रमाण है। गृह मंत्री लोरां नुनेज़ ने इसे “बिल्कुल अस्वीकार्य” बताया। यहां तक कि धुर-दक्षिणपंथी दल नेशनल रैली के प्रवक्ता जूलियन ओडूल ने भी राजोय को “नस्लवादी” करार दिया। यह विवाद ऐसे समय उभरा जब कुछ दिन पहले पैराग्वे की सीनेटर सेलेस्ते अमारिल्या ने फ्रांसीसी कप्तान किलियन एमबाप्पे को “उपनिवेशित कैमरूनियाई” कहकर नस्लीय हमला किया था, जिस पर फ्रांसीसी फुटबॉल महासंघ ने आपराधिक शिकायत दर्ज कराई है।
फीफा के अनुसार, इस विश्व कप के दौरान सोशल मीडिया पर नस्लवादी हमलों में भारी वृद्धि हुई है—पहले चरण में 89,000 आपत्तिजनक पोस्ट दर्ज की गईं, जो 2022 के मुकाबले 13 गुना अधिक हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर धुर-दक्षिणपंथी राजनीति के उभार ने ऐसी अभिव्यक्तियों को बढ़ावा दिया है। दोनों टीमों की संरचना ही इस बहस को व्यापक अर्थ देती है: स्पेनिश टीम में मोरक्को, इक्वेटोरियल गिनी और घाना मूल के खिलाड़ी हैं, जबकि फ्रांस के 26 में से 23 खिलाड़ी फ्रांस में जन्मे नागरिक हैं।
राजोय ने अब तक सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। उनकी पार्टी पीपुल्स पार्टी के प्रवक्ता ने इस लेख को व्यंग्य बताते हुए कहा कि इसमें कोई दुर्भावना नहीं थी। स्पेन-फ्रांस सेमीफाइनल निर्धारित समय पर खेला गया, लेकिन कूटनीतिक स्तर पर मैड्रिड पहले ही सफाई दे चुका है। फ्रांसीसी सरकार ने स्पेनिश विदेश मंत्री के बयान का स्वागत किया है, हालांकि राजोय की ओर से व्यक्तिगत माफी का मुद्दा अब भी लंबित है।
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | −0.70 | critical |
|---|---|---|
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | +0.20 | neutral |
| उप-सहारा अफ़्रीकी प्रेस | −0.60 | critical |
| अरब लेवांत-मगरिब प्रेस | +0.10 | neutral |
Latin America condemns Rajoy's remarks as racist and irresponsible, and demands an immediate apology.
By using strong moral condemnation and framing the issue as a clear-cut case of racism, the narrative leaves no room for nuance, making the demand for apology the only acceptable response.
This frame omits the positive integration message from Spanish player Yamal and the diplomatic apology from Prime Minister Sanchez, which could soften the criticism.
Continental Europe highlights the integrative power of football and the positive response from young Yamal.
By focusing on a young player's uplifting statement, the narrative shifts attention from the racist remarks to the unifying potential of sport, making the controversy seem less divisive.
This frame omits the strong condemnation from the Spanish government and the official apology to France, which would emphasize the severity of the incident.
Sub-Saharan Africa denounces the racism and reports Spain's official apology.
By treating the remarks as a diplomatic offense requiring an official state apology, the narrative elevates the incident to a matter of international relations, reinforcing the seriousness of racism.
This frame omits the domestic political context in Spain (the government vs Rajoy) and the positive response from Spanish players, which could show a more complex picture.
The Arab world highlights the gesture of shame and apology by Sanchez as a diplomatic act.
By focusing on the personal apology of the prime minister and the photo opportunity, the narrative personalizes the state's response, making the apology appear sincere and decisive.
This frame omits the actual content of Rajoy's remarks and the domestic criticism in Spain, which would show the controversy's roots.
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