
पोप का लाम्पेदुसा दौरा: अमेरिकी स्वतंत्रता दिवस पर प्रवासियों के लिए प्रार्थना और राजनीतिक संदेश
पोप लियो चौदहवें ने 4 जुलाई को इटली के लाम्पेदुसा द्वीप पर प्रवासियों की कब्रों पर श्रद्धांजलि अर्पित की और यूरोपीय संघ व अमेरिका की प्रवासन नीतियों को चुनौती दी।
पोप लियो चौदहवें ने शनिवार को इटली के लाम्पेदुसा द्वीप का दौरा किया, जो अफ्रीका से यूरोप पहुंचने वाले प्रवासियों के लिए प्रमुख प्रवेश बिंदु है। अमेरिकी स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर किए गए इस दौरे में पोप ने पहले अज्ञात प्रवासियों की कब्रों पर फूल चढ़ाए और प्रार्थना की, फिर 'यूरोप के द्वार' स्मारक पर अकेले समुद्र की ओर चलकर मौन रहे। इसके बाद उन्होंने पोप फ्रांसिस के नाम पर एक घाट की पट्टिका का अनावरण किया और खुले मैदान में सामूहिक प्रार्थना सभा आयोजित की। यह यात्रा ऐसे समय हुई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप वाशिंगटन में भव्य समारोह के साथ 250वीं स्वतंत्रता वर्षगांठ मना रहे थे, जबकि पोप ने प्रवासन संकट की अग्रिम पंक्ति पर खड़े होकर एक भिन्न राजनीतिक संदेश दिया।
वैटिकन सूत्रों के अनुसार, पोप लियो ने अपने पूर्ववर्ती फ्रांसिस की तरह प्रवासियों की रक्षा को अपने पोपकाल का केंद्रीय स्तंभ बनाया है। उन्होंने अमेरिकी प्रशासन द्वारा बड़े पैमाने पर निर्वासन को "अमानवीय" करार दिया था और शुक्रवार को एक संदेश में कहा कि "प्रवासियों की लहरों ने अमेरिका के भविष्य को आकार दिया।" वहीं, यूरोपीय संघ ने हाल ही में नए प्रवासन नियमों को मंजूरी दी है, जिनमें हिरासत की व्यापक शक्तियां और संघ की सीमाओं के बाहर निर्वासन केंद्र बनाने का प्रावधान है। इतालवी सरकार लाम्पेदुसा पर ही एक नया सैन्य क्षेत्राधिकार वाला केंद्र तैयार कर रही है, जिसका उपयोग अंतरराष्ट्रीय संरक्षण के अधिकार से वंचित प्रवासियों को वापस भेजने के लिए किया जाएगा। एल मुंडो अखबार के अनुसार, यह पहली बार होगा जब लाम्पेदुसा से प्रवासियों को उसी मार्ग से वापस भेजा जा सकेगा जिससे वे आए थे।
संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (यूएनएचसीआर) के प्रवक्ता फिलिपो उन्गारो ने कहा कि पोप की उपस्थिति "एक स्पष्ट संदेश देती है, जब वैश्विक राजनीतिक बहस सीमाओं और रोकथाम पर केंद्रित है, न कि संरक्षण और साझा जिम्मेदारी पर।" अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (आईओएम) के आंकड़ों के अनुसार, उत्तरी अफ्रीका से मध्य भूमध्यसागरीय मार्ग दुनिया का सबसे घातक प्रवास मार्ग बना हुआ है, जहां पिछले वर्ष लगभग 1,330 लोगों की मौत या लापता होने की घटनाएं दर्ज की गईं। इस वर्ष इटली पहुंचने वालों की संख्या आधी रह गई है, लेकिन मौतों में 57% की वृद्धि हुई है, जिसका कारण प्रतिकूल मौसम और तस्करों द्वारा जोखिम भरी नौकाएं भेजना है। लाम्पेदुसा के स्थानीय निवासी लंबे समय से प्रवासियों के प्रति सहानुभूति दिखाते रहे हैं, लेकिन मानवाधिकार कार्यकर्ता द्वीप के हॉटस्पॉट केंद्र को हिरासत सुविधा जैसा बताते हैं, जहां लोगों को सीमांत प्रक्रियाओं के नाम पर रोका जाता है।
यह दौरा 2013 में पोप फ्रांसिस की पहली यात्रा की याद दिलाता है, जब उन्होंने "उदासीनता के वैश्वीकरण" की निंदा की थी। पोप लियो ने पिछले माह स्पेन के कैनरी द्वीपसमूह का भी दौरा किया था और मानव तस्करी की आलोचना की थी। विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिकी मूल के पोप का अपने देश के राष्ट्रीय पर्व पर प्रवासियों के बीच जाना, ट्रंप प्रशासन की संप्रभुतावादी नीतियों के प्रति प्रतीकात्मक चुनौती है। सिसिली के धर्माध्यक्ष मोनसिन्योर अंतोनिनो रासपांती ने कहा कि यह यात्रा "ऐतिहासिक, भू-राजनीतिक और सामाजिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है।" पोप ने प्रवासियों से मेजबान देश की भाषा सीखने और कानूनों का सम्मान करने का भी आग्रह किया है।
पोप की इस यात्रा के बाद, यूरोपीय संघ के नए प्रवासन समझौते के कार्यान्वयन पर बहस तेज होने की संभावना है। इटली का नया प्रत्यावर्तन केंद्र जल्द ही चालू होने वाला है, जबकि वैटिकन ने सुरक्षित और कानूनी प्रवासन मार्गों की वकालत जारी रखी है। फिलहाल, लाम्पेदुसा का हॉटस्पॉट 136 प्रवासियों को रखे हुए है, जिनमें 51 अकेले नाबालिग हैं, और समुद्री बचाव अभियान जारी हैं।
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| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | 0.00 | neutral |
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | +0.50 | aligned |
4 जुलाई को पोप लियो XIV की लैम्पेडुसा यात्रा एक अत्यंत प्रतीकात्मक कदम है: जहाँ संयुक्त राज्य अमेरिका में स्वतंत्रता दिवस धूमधाम से मनाया जा रहा है, वहीं पोंटिफ ने भूमध्यसागरीय सीमा को चुना, प्रवासियों की कब्रों पर प्रार्थना की और यूरोप के द्वार से गुज़रे, अपने पूर्ववर्ती के स्वागत संदेश को पुनर्जीवित किया।
पोप लियो XIV की लैम्पेडुसा यात्रा अमेरिकी और यूरोपीय संघ के नेताओं के लिए एक सीधा संदेश है: अमेरिकी स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ पर, पहले अमेरिकी पोप प्रवासन की अग्रिम पंक्ति में प्रवासियों का बचाव करने जाते हैं, ठीक उसी समय जब यूरोपीय संघ ने हिरासत की शक्तियों को बढ़ाने वाले नए नियमों को मंजूरी दी है।
ऐसे समय में जब यूरोप अपनी प्रवासन नीतियों को सख्त कर रहा है, पोप लियो XIV ने लैम्पेडुसा में भूमध्यसागरीय मार्ग के पीड़ितों को श्रद्धांजलि अर्पित की, प्रवासी कब्रिस्तान का दौरा किया और मास मनाया, सबसे कमजोर लोगों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की और नए नियमों की कठोरता की अप्रत्यक्ष रूप से निंदा की।
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