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स्वास्थ्य और विज्ञानमंगलवार, 16 जून 2026

स्वस्थ दीर्घायु का नया मंत्र: बचपन की नींद से लेकर बुढ़ापे की कसरत तक, हर उम्र में रोकथाम जरूरी

वैश्विक विशेषज्ञों के अनुसार, लंबी और गुणवत्तापूर्ण जिंदगी का आधार केवल बुढ़ापे में नहीं, बल्कि 30-50 साल की उम्र से ही तय हो जाता है—ताकत प्रशिक्षण, गतिशीलता अभ्यास, पर्याप्त नींद और धूम्रपान से परहेज इसके प्रमुख स्तंभ हैं।

लंबी उम्र जीने की चाहत सदियों पुरानी है, लेकिन आधुनिक विज्ञान अब ‘हेल्थस्पैन’ यानी गुणवत्ता भरे जीवन-वर्षों पर केंद्रित हो गया है। हार्वर्ड के एक ताजा अध्ययन ने करीब डेढ़ लाख लोगों पर तीस साल तक नजर रखने के बाद पाया कि हर हफ्ते 90 से 119 मिनट का भारोत्तोलन या प्रतिरोध प्रशिक्षण सभी कारणों से होने वाली मृत्यु के जोखिम को घटा देता है, खासकर हृदय रोग और मनोभ्रंश से। कनाडा के मैकमास्टर विश्वविद्यालय के मांसपेशी विशेषज्ञ स्टुअर्ट फिलिप्स जोर देते हैं कि ताकत वह अनदेखी कड़ी है जो बुढ़ापे में आत्मनिर्भरता बचाए रखती है। दरअसल, 35 की उम्र से ही सार्कोपीनिया यानी मांसपेशियों का क्षरण शुरू हो जाता है—जो लोग नियमित शक्ति अभ्यास नहीं करते, वे हर साल आधा किलो तक मांसपेशी गंवा सकते हैं। सबसे उत्साहजनक बात यह है कि जो लोग पूरी तरह निष्क्रिय जीवन से निकलकर पहली बार वजन उठाना शुरू करते हैं, उन्हें सबसे बड़ा स्वास्थ्य लाभ मिलता है।

बैठकर बिताया गया लंबा समय भी एक गंभीर खतरा है। इंडोनेशिया के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. एर्ता प्रियादी वीराविजया चेतावनी देते हैं कि रोजाना छह से आठ घंटे से अधिक बैठना धूम्रपान जितना ही नुकसानदेह है—इससे चयापचय धीमा पड़ता है, रक्त संचार घटता है और थक्के जमने का खतरा बढ़ता है। इसीलिए विशेषज्ञ हर उम्र में गतिशीलता पर जोर देते हैं। पचास पार कर चुकी महिलाओं के लिए कोलेजन और एस्ट्रोजन की कमी से जोड़ों में जकड़न आम हो जाती है; एक साधारण पाँच मिनट की ‘कैट-काउ’ जैसी गतिशीलता दिनचर्या रीढ़ और घुटनों के दर्द को टाल सकती है। सत्तर साल के बाद रोजाना 20-30 मिनट की सैर हृदय, मांसपेशियों और भावनात्मक सेहत के लिए पर्याप्त है। यहाँ तक कि गर्भवती महिलाएँ भी, यदि कोई चिकित्सकीय जटिलता न हो, दूसरी तिमाही में सुरक्षित व्यायाम कर सकती हैं।

दीर्घायु की नींव बचपन में ही पड़ती है। बर्मिंघम विश्वविद्यालय के एक अध्ययन ने 15,000 बच्चों पर नजर रखी और पाया कि शैशवकाल से सात साल तक लगातार कम नींद लेने वाले बच्चों में किशोरावस्था में अवसाद का खतरा दोगुना हो जाता है। अर्जेंटीना के न्यूरोलॉजिस्ट कॉनराडो एस्टोल बताते हैं कि शुरुआती शिक्षा मनोभ्रंश के जोखिम को बड़े अनुपात में घटा देती है; लैंसेट आयोग के अनुसार 45 प्रतिशत डिमेंशिया मामले बदलाव लायक जोखिम कारकों से जुड़े हैं। इसी तरह, कभी-कभार धूम्रपान करने वाले भी सुरक्षित नहीं हैं—हर सिगरेट में मौजूद निकोटिन, कार्बन मोनोऑक्साइड और टार शरीर को तुरंत नुकसान पहुँचाते हैं और मूक रूप से गंभीर बीमारियों की जमीन तैयार करते हैं। रूस के सेचेनोव विश्वविद्यालय के रेक्टर पेत्र ग्लिबोच्को इस बात पर जोर देते हैं कि 120 साल तक जीना संभव है, बशर्ते 30-50 की उम्र से ही नियमित स्वास्थ्य निगरानी, मेटाबोलोमिक स्क्रीनिंग और एआई-सक्षम ईसीजी जैसी तकनीकों के जरिए जोखिमों की पहचान की जाए।

यह सारे साक्ष्य एक समेकित दृष्टिकोण की ओर इशारा करते हैं: बचपन की नींद, युवावस्था की शिक्षा, मध्य आयु में शक्ति प्रशिक्षण और बुढ़ापे तक गतिशीलता—ये सब मिलकर तय करते हैं कि हम कितने साल नहीं, बल्कि कितने सक्रिय साल जीते हैं। भारत और दक्षिण एशिया में बैठे रहने वाली नौकरियों, नींद की कमी और धूम्रपान की बढ़ती प्रवृत्ति के बीच यह संदेश और भी प्रासंगिक हो जाता है। विशेषज्ञों का साफ कहना है कि लंबी उम्र का राज किसी एक जादुई उपाय में नहीं, बल्कि रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतों—थोड़ी देर टहलना, कुछ वजन उठाना, अच्छी नींद लेना और तंबाकू से दूर रहना—में छिपा है। यही आदतें आने वाले दशकों में स्वस्थ वृद्धावस्था की गारंटी बन सकती हैं।

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

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61%
लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
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pragmatismodistacco

50 के बाद, विशेषज्ञ सरल दैनिक दिनचर्या की सलाह देते हैं: चलना, सीढ़ियाँ चढ़ना और शक्ति व्यायाम, जो गतिशीलता बनाए रखने, जकड़न रोकने और सक्रिय बुढ़ापा सुनिश्चित करने में मदद करते हैं। ये सुलभ गतिविधियाँ हृदय स्वास्थ्य, मांसपेशियों और समग्र कल्याण को बिना जिम के बढ़ावा देती हैं।

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बहुत देर तक बैठना धूम्रपान जितना खतरनाक है, इससे चयापचय और रक्त संचार धीमा हो जाता है। लेकिन कार्डियो के साथ प्रतिरोध प्रशिक्षण जोड़ने से बुढ़ापा अधिक सुखी और लंबा हो सकता है, विशेषज्ञों का कहना है।

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स्वस्थ दीर्घायु का नया मंत्र: बचपन की नींद से लेकर बुढ़ापे की कसरत तक, हर उम्र में रोकथाम जरूरी

वैश्विक विशेषज्ञों के अनुसार, लंबी और गुणवत्तापूर्ण जिंदगी का आधार केवल बुढ़ापे में नहीं, बल्कि 30-50 साल की उम्र से ही तय हो जाता है—ताकत प्रशिक्षण, गतिशीलता अभ्यास, पर्याप्त नींद और धूम्रपान से परहेज इसके प्रमुख स्तंभ हैं।

लंबी उम्र जीने की चाहत सदियों पुरानी है, लेकिन आधुनिक विज्ञान अब ‘हेल्थस्पैन’ यानी गुणवत्ता भरे जीवन-वर्षों पर केंद्रित हो गया है। हार्वर्ड के एक ताजा अध्ययन ने करीब डेढ़ लाख लोगों पर तीस साल तक नजर रखने के बाद पाया कि हर हफ्ते 90 से 119 मिनट का भारोत्तोलन या प्रतिरोध प्रशिक्षण सभी कारणों से होने वाली मृत्यु के जोखिम को घटा देता है, खासकर हृदय रोग और मनोभ्रंश से। कनाडा के मैकमास्टर विश्वविद्यालय के मांसपेशी विशेषज्ञ स्टुअर्ट फिलिप्स जोर देते हैं कि ताकत वह अनदेखी कड़ी है जो बुढ़ापे में आत्मनिर्भरता बचाए रखती है। दरअसल, 35 की उम्र से ही सार्कोपीनिया यानी मांसपेशियों का क्षरण शुरू हो जाता है—जो लोग नियमित शक्ति अभ्यास नहीं करते, वे हर साल आधा किलो तक मांसपेशी गंवा सकते हैं। सबसे उत्साहजनक बात यह है कि जो लोग पूरी तरह निष्क्रिय जीवन से निकलकर पहली बार वजन उठाना शुरू करते हैं, उन्हें सबसे बड़ा स्वास्थ्य लाभ मिलता है।

बैठकर बिताया गया लंबा समय भी एक गंभीर खतरा है। इंडोनेशिया के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. एर्ता प्रियादी वीराविजया चेतावनी देते हैं कि रोजाना छह से आठ घंटे से अधिक बैठना धूम्रपान जितना ही नुकसानदेह है—इससे चयापचय धीमा पड़ता है, रक्त संचार घटता है और थक्के जमने का खतरा बढ़ता है। इसीलिए विशेषज्ञ हर उम्र में गतिशीलता पर जोर देते हैं। पचास पार कर चुकी महिलाओं के लिए कोलेजन और एस्ट्रोजन की कमी से जोड़ों में जकड़न आम हो जाती है; एक साधारण पाँच मिनट की ‘कैट-काउ’ जैसी गतिशीलता दिनचर्या रीढ़ और घुटनों के दर्द को टाल सकती है। सत्तर साल के बाद रोजाना 20-30 मिनट की सैर हृदय, मांसपेशियों और भावनात्मक सेहत के लिए पर्याप्त है। यहाँ तक कि गर्भवती महिलाएँ भी, यदि कोई चिकित्सकीय जटिलता न हो, दूसरी तिमाही में सुरक्षित व्यायाम कर सकती हैं।

दीर्घायु की नींव बचपन में ही पड़ती है। बर्मिंघम विश्वविद्यालय के एक अध्ययन ने 15,000 बच्चों पर नजर रखी और पाया कि शैशवकाल से सात साल तक लगातार कम नींद लेने वाले बच्चों में किशोरावस्था में अवसाद का खतरा दोगुना हो जाता है। अर्जेंटीना के न्यूरोलॉजिस्ट कॉनराडो एस्टोल बताते हैं कि शुरुआती शिक्षा मनोभ्रंश के जोखिम को बड़े अनुपात में घटा देती है; लैंसेट आयोग के अनुसार 45 प्रतिशत डिमेंशिया मामले बदलाव लायक जोखिम कारकों से जुड़े हैं। इसी तरह, कभी-कभार धूम्रपान करने वाले भी सुरक्षित नहीं हैं—हर सिगरेट में मौजूद निकोटिन, कार्बन मोनोऑक्साइड और टार शरीर को तुरंत नुकसान पहुँचाते हैं और मूक रूप से गंभीर बीमारियों की जमीन तैयार करते हैं। रूस के सेचेनोव विश्वविद्यालय के रेक्टर पेत्र ग्लिबोच्को इस बात पर जोर देते हैं कि 120 साल तक जीना संभव है, बशर्ते 30-50 की उम्र से ही नियमित स्वास्थ्य निगरानी, मेटाबोलोमिक स्क्रीनिंग और एआई-सक्षम ईसीजी जैसी तकनीकों के जरिए जोखिमों की पहचान की जाए।

यह सारे साक्ष्य एक समेकित दृष्टिकोण की ओर इशारा करते हैं: बचपन की नींद, युवावस्था की शिक्षा, मध्य आयु में शक्ति प्रशिक्षण और बुढ़ापे तक गतिशीलता—ये सब मिलकर तय करते हैं कि हम कितने साल नहीं, बल्कि कितने सक्रिय साल जीते हैं। भारत और दक्षिण एशिया में बैठे रहने वाली नौकरियों, नींद की कमी और धूम्रपान की बढ़ती प्रवृत्ति के बीच यह संदेश और भी प्रासंगिक हो जाता है। विशेषज्ञों का साफ कहना है कि लंबी उम्र का राज किसी एक जादुई उपाय में नहीं, बल्कि रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतों—थोड़ी देर टहलना, कुछ वजन उठाना, अच्छी नींद लेना और तंबाकू से दूर रहना—में छिपा है। यही आदतें आने वाले दशकों में स्वस्थ वृद्धावस्था की गारंटी बन सकती हैं।

स्रोतों में मतभेद

स्वास्थ्य और विज्ञान · 6 स्रोत · 4 भाषाएँ

61%उच्च

स्रोत कैसे एक ही तथ्यों को अलग-अलग तरीके से बयाँ करते हैं।

विभाजन कैसे है

समर्थक50%
न्यूनत्र33%
निंदक17%

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 4 भाषाएँ

लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
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50 के बाद, विशेषज्ञ सरल दैनिक दिनचर्या की सलाह देते हैं: चलना, सीढ़ियाँ चढ़ना और शक्ति व्यायाम, जो गतिशीलता बनाए रखने, जकड़न रोकने और सक्रिय बुढ़ापा सुनिश्चित करने में मदद करते हैं। ये सुलभ गतिविधियाँ हृदय स्वास्थ्य, मांसपेशियों और समग्र कल्याण को बिना जिम के बढ़ावा देती हैं।

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allarmeurgenza

बहुत देर तक बैठना धूम्रपान जितना खतरनाक है, इससे चयापचय और रक्त संचार धीमा हो जाता है। लेकिन कार्डियो के साथ प्रतिरोध प्रशिक्षण जोड़ने से बुढ़ापा अधिक सुखी और लंबा हो सकता है, विशेषज्ञों का कहना है।

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