
रुई के फाहे से भी हल्के, बृहस्पति जितने बड़े: खगोलविदों ने खोजे दो 'सुपर-पफ' ग्रह
लगभग 1,110 प्रकाश-वर्ष दूर स्थित ये दोनों ग्रह आकार में बृहस्पति के समान हैं, लेकिन इनका घनत्व शेविंग फोम जितना कम है, जो ग्रह निर्माण की मौजूदा समझ को चुनौती देता है।
नासा के ट्रांज़िटिंग एक्सोप्लैनेट सर्वे सैटेलाइट (TESS) की मदद से खगोलविदों ने दो विशालकाय ग्रहों की पहचान की है, जिनका घनत्व रुई के फाहे या शेविंग फोम से भी कम है। TOI-791 b और TOI-791 c नामक ये ग्रह पृथ्वी से लगभग 1,110 प्रकाश-वर्ष दूर दक्षिणी तारामंडल वोलैंस में सूर्य जैसे एक तारे की परिक्रमा करते हैं। आकार में बृहस्पति के समान होने के बावजूद, TOI-791 b का द्रव्यमान बृहस्पति का मात्र 3.0 प्रतिशत और TOI-791 c का 5.9 प्रतिशत है। ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय के जॉर्ज ड्रैंसफ़ील्ड के नेतृत्व में हुए इस अध्ययन के अनुसार, ये अब तक ज्ञात अपने आकार के सबसे हल्के ग्रह हैं।
ये दोनों ग्रह 'सुपर-पफ' नामक दुर्लभ श्रेणी में आते हैं, जिनके बारे में माना जाता है कि ये नवजात तारों के चारों ओर गैस-प्रधान डिस्क में बनते हैं, जहाँ धूल की तुलना में गैस की मात्रा अधिक होती है। समय के साथ ये अपना अधिकांश पदार्थ खो देते हैं, जिससे इनका घनत्व अत्यंत कम रह जाता है। इनके वायुमंडल में मुख्यतः हाइड्रोजन और हीलियम होने की संभावना है, हालाँकि सटीक रासायनिक संरचना की पुष्टि के लिए जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप से अनुवर्ती अवलोकन आवश्यक होंगे। इनकी कक्षाएँ असामान्य रूप से लंबी हैं—एक 139 दिन और दूसरा 232 दिन में तारे का चक्कर पूरा करता है—और ये गुरुत्वीय रूप से जुड़ी हुई हैं, जिससे पारगमन समय में आने वाले बदलावों के आधार पर इनके द्रव्यमान की सटीक गणना संभव हुई।
नासा एम्स रिसर्च सेंटर के विज्ञान संचालन केंद्र के प्रमुख जॉन जेनकिंस ने कहा कि ऐसे ग्रहों का दिखना अपेक्षित नहीं था और ये इस पहेली का हिस्सा हैं कि बृहस्पति जैसे विशाल ग्रह और सुपर-पफ कैसे बनते हैं। अब तक पुष्टि किए जा चुके लगभग 6,300 बाह्यग्रहों में से 40 से भी कम सुपर-पफ हैं। तारा TOI-791 सूर्य के समान भौतिक गुणों वाला है, जो परिचित विकिरणीय परिस्थितियों में ग्रहीय विकास के अध्ययन का अवसर देता है। तुलना के लिए, हमारे सौरमंडल का बृहस्पति इन दोनों ग्रहों से 35 गुना अधिक सघन है।
इस खोज ने ग्रह निर्माण के सैद्धांतिक मॉडलों के लिए नए सवाल खड़े कर दिए हैं। अगला महत्वपूर्ण कदम जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप द्वारा इन ग्रहों के वायुमंडल की रासायनिक जाँच होगी, जिससे यह स्पष्ट होगा कि इनमें हाइड्रोजन-हीलियम के अलावा अन्य यौगिक मौजूद हैं या नहीं। वैज्ञानिकों का मानना है कि ऐसे विचित्र ग्रहीय तंत्रों का अध्ययन ब्रह्मांड में हमारी स्थिति को समझने की दिशा में एक और कड़ी जोड़ेगा।
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