
ट्रंप की आलोचना पर मेर्ट्ज़ का पलटवार: जर्मनी की रक्षा बजट दोगुना करने की घोषणा
अंकारा में होने वाली नाटो शिखर बैठक से पहले जर्मन चांसलर ने अमेरिकी राष्ट्रपति के 'हास्यास्पद' वाले बयान को खारिज कर यूरोपीय रक्षा नेतृत्व का दावा पेश किया।
जर्मन चांसलर फ्रीडरिश मेर्ट्ज़ ने शुक्रवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस आलोचना का सीधा जवाब दिया जिसमें जर्मनी के पिछले रक्षा खर्च को 'हास्यास्पद' और अमेरिका तथा अन्य नाटो सहयोगियों की तुलना में 'बहुत कम' बताया गया था। मेर्ट्ज़ ने बर्लिन में पत्रकारों से कहा कि जर्मनी चार वर्षों के भीतर अपने रक्षा बजट को दोगुना कर रहा है और यह उसकी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने का अब तक का सबसे बड़ा प्रयास है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मामले में जर्मनी को किसी के सामने शर्मिंदा होने का कोई कारण नहीं है।
अमेरिकी प्रशासन की ओर से ट्रंप ने सोशल मीडिया पर तर्क दिया कि अमेरिका नाटो की रक्षा का असंगत रूप से बड़ा बोझ उठा रहा है और यह रिश्ता पारस्परिक नहीं है। उन्होंने 2014 से 2025 के बीच जर्मनी के खर्च को विशेष रूप से निशाना बनाते हुए इसे 'वास्तव में हास्यास्पद' करार दिया। इसके विपरीत, जर्मन सरकार का पक्ष है कि वह यूरोपीय संघ के सबसे बड़े सदस्य देश के रूप में महाद्वीप की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभा रही है और पिछले वर्ष हेग में तय 3.5 प्रतिशत जीडीपी खर्च के लक्ष्य को 2029 तक, यानी निर्धारित 2035 की समय-सीमा से काफी पहले, हासिल कर लेगी।
यूरोपीय सहयोगियों के बीच यह बहस ऐसे समय में तेज हुई है जब अगले सप्ताह अंकारा में नाटो शिखर बैठक होने वाली है। यूरोपीय नेता ईरान और ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप प्रशासन के साथ उपजे तनाव को पीछे छोड़ते हुए यह प्रदर्शित करना चाहते हैं कि वे महाद्वीप की रक्षा के लिए अपने प्रयास बढ़ा रहे हैं। मेर्ट्ज़ ने बाल्टिक देशों के नेताओं के साथ बैठक में रूस से उत्पन्न खतरे को गंभीरता से लेने और उसका मुकाबला करने के लिए हथियारबंद होने की बात भी दोहराई।
जर्मनी के भीतर इस रक्षा विस्तार की एक आंतरिक कीमत भी सामने आ रही है। सरकार सामाजिक कल्याण खर्च में कटौती कर सेना के आकार और क्षमताओं का विस्तार कर रही है, जिससे घरेलू नीतिगत संतुलन पर दबाव बढ़ सकता है। अंकारा बैठक में मेर्ट्ज़ का इरादा खुद को यूरोपीय सुरक्षा के अगुआ के रूप में पेश करने का है, जहां सदस्य देशों के बीच रक्षा योगदान को लेकर लंबे समय से चली आ रही खींचतान एक बार फिर गठबंधन की एकता की परीक्षा लेगी।
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | 0.00 | neutral |
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| ईरानी और संबद्ध प्रेस | 0.00 | neutral |
The NATO summit is portrayed as an unknown, with Europe forced to speak about Ukraine while the US takes a transactional approach.
Uncertainty and lack of coordination are emphasized, creating a cautious atmosphere without taking an explicit stance.
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