
ईरान ने अमेरिका से शांति की संभावना 10% आंकी, फिर भी कूटनीति जारी रखने का एलान
ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि युद्ध टालने के लिए हर संभव वार्ता का प्रयास किया जाएगा, भले ही सफलता की गुंजाइश न्यूनतम हो।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सार्वजनिक रूप से अमेरिका के साथ शांति की संभावना मात्र 10 प्रतिशत बताई है, लेकिन साथ ही यह स्पष्ट किया कि तेहरान कूटनीतिक रास्ता नहीं छोड़ेगा। एक प्रकाशित साक्षात्कार में अराघची ने कहा कि बातचीत के कई उद्देश्य हैं, जिनमें ईरान की मांगों को हासिल करने का रास्ता खोजना भी शामिल है, और यह अवसर गंवाया नहीं जाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि बातचीत के जरिए युद्ध के अलावा किसी नतीजे पर पहुंचने की 10 प्रतिशत भी गुंजाइश है, तो उसका पूरा उपयोग किया जाना चाहिए।
तेहरान के शीर्ष राजनयिक के अनुसार, यह रुख केवल सैद्धांतिक नहीं है, बल्कि पिछले कुछ महीनों में क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे में आए बुनियादी बदलावों से उपजा है। उन्होंने बताया कि फरवरी में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर संयुक्त सैन्य कार्रवाई शुरू करने के बाद ईरान ने जवाबी हमलों में खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। अराघची के मुताबिक, क्षेत्रीय देशों को यह भरोसा नहीं था कि ईरान पूरे क्षेत्र में इस तरह हमले करेगा और वे प्रभावी ढंग से जवाब नहीं दे पाएंगे, जिसने क्षेत्र की सुरक्षा संरचना को बदल दिया।
ईरानी पक्ष के बयानों से यह भी संकेत मिलता है कि वाशिंगटन के साथ वार्ता का मूल विवाद 'शून्य संवर्धन' की अमेरिकी मांग पर केंद्रित रहा। अराघची ने बताया कि अमेरिकी वार्ताकारों ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि ईरान को यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह बंद करना होगा, अन्यथा सैन्य कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। ईरानी विदेश मंत्री के अनुसार, तेहरान ने इस 'गैरकानूनी और अनुचित' मांग को ठुकरा दिया, जिसके बाद अमेरिका और इजरायल ने बातचीत छोड़ युद्ध का रास्ता चुना। उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिकी पक्ष ने बिजली संयंत्र और बुनियादी ढांचे के निर्माण का प्रलोभन दिया, लेकिन ईरान ने 'न रिश्वत, न धमकी' की नीति पर कायम रहते हुए इसे अस्वीकार कर दिया।
पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुए एक संक्षिप्त समझौता ज्ञापन के बावजूद, होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ने से स्थिति फिर बिगड़ गई और दोनों पक्षों के बीच आपसी हमले शुरू हो गए। अराघची ने स्वीकार किया कि ईरानी सशस्त्र बलों और उन्हें पहले से ही युद्ध की आशंका थी, लेकिन बातचीत इसलिए जारी रखी गई ताकि बाद में कोई यह न कह सके कि 'यदि आपने बातचीत की होती तो युद्ध नहीं होता'। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कूटनीति विफल भी होती है, तो कम से कम ईरान ने दुश्मन, अंतरराष्ट्रीय समुदाय और अपनी जनता के सामने यह साबित कर दिया होगा कि उसने हर संभव शांतिपूर्ण रास्ता आजमाया।
फिलहाल, किसी नई वार्ता की तारीख या रूपरेखा सार्वजनिक नहीं हुई है, लेकिन ईरानी विदेश मंत्री के बयान से स्पष्ट है कि तेहरान कूटनीतिक खिड़की को पूरी तरह बंद नहीं मान रहा। क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे में आए बदलाव और दोनों पक्षों की सैन्य तैयारियों को देखते हुए, आने वाले दिनों में या तो कोई नई मध्यस्थता की पहल सामने आ सकती है या फिर टकराव के और गहराने की आशंका बनी रहेगी।
| दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस | 0.00 | neutral |
|---|---|---|
| ईरानी और संबद्ध प्रेस | +0.80 | aligned |
| भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस | +0.50 | aligned |
Iran puts the chance of peace at 10%, but does not give up dialogue: every opportunity must be seized to avoid war.
The news is presented as a factual statement, without emphasizing the low percentage as a sign of weakness, but rather as a reason to insist on diplomacy. It normalizes the idea that even a minimal probability justifies negotiation efforts.
The context of recent Iranian military strikes and US demands for zero enrichment is omitted, which could have made the statement appear as a tactical move.
Iran struck across the entire region and no one could respond: this is the new strategic reality.
The statement about 10% peace chance is almost ignored; the focus is shifted to Iran's military capabilities and their strategic impact. An image of power is built that makes the low probability of peace irrelevant.
The very statement of 10% peace chance is omitted, as well as the negotiation context and US demands.
Iran does not bow to illegal demands: the US wanted war because they did not get zero enrichment.
The statement about 10% peace chance is reinterpreted as proof of Iranian determination: despite low odds, Iran resisted. A moral contrast is created between reasonable Iran and unreasonable US.
The fact that the 10% estimate comes from Iran itself is omitted, and no mention is made of Iranian military actions that may have influenced the talks.
अपना नज़रिया बढ़ाएँ
होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव से तेल 90 डॉलर के पार, वैश्विक आपूर्ति पर संकट
8 भाषाएँ · 21 स्रोत
Technology सेOpenAI के AI मॉडलों ने सुरक्षा परीक्षण के दौरान खुद ही हैक किया Hugging Face
9 भाषाएँ · 50 स्रोत
Science & Health सेअमेरिका में साइक्लोस्पोरा का रिकॉर्ड प्रकोप: 12,000 से अधिक मामले, स्रोत अब भी अज्ञात
4 भाषाएँ · 10 स्रोत