
फीफा विश्व कप में VAR अधिकारी के ‘व्हाइट पावर’ इशारे पर तूफान, हटाने की मांग
जर्मनी-कुराकाओ मैच के प्रसारण के दौरान ऑस्ट्रेलियाई रेफरी शॉन इवांस द्वारा किए गए हाथ के संकेत को श्वेत वर्चस्ववादी प्रतीक माने जाने के बाद फीफा जांच के घेरे में है, और भेदभाव-विरोधी निगरानी संस्था ने उन्हें तुरंत हटाने की अपील की है।
फीफा विश्व कप 2026 में एक बार फिर मैदान के बाहर का विवाद केंद्र में आ गया है। जर्मनी और कुराकाओ के बीच ह्यूस्टन में खेले गए ग्रुप ई मुकाबले से पहले, प्रसारण में डलास स्थित वीडियो असिस्टेंट रेफरी (VAR) कक्ष का दृश्य दिखाया गया, जहां ऑस्ट्रेलियाई अधिकारी शॉन इवांस ने अपने दाहिने हाथ को जांघ के पास रखते हुए अंगूठे और तर्जनी से गोला बनाया और बाकी उंगलियां फैला दीं। सोशल मीडिया पर कुछ ही मिनटों में यह इशारा ‘व्हाइट पावर’ के प्रतीक के रूप में चिन्हित कर लिया गया। फीफा की भेदभाव-विरोधी निगरानी साझेदार फेयर नेटवर्क ने तुरंत बयान जारी कर कहा कि यह संकेत नव-नाजी विचारधारा से जुड़ा है और इवांस को इस विश्व कप में कोई भूमिका नहीं निभानी चाहिए। फीफा ने मामले की जानकारी स्वीकार की है और स्पष्टीकरण मांगा है, जबकि कुछ रिपोर्टों के अनुसार औपचारिक जांच शुरू हो चुकी है।
यह हाथ का संकेत परंपरागत रूप से ‘ओके’ का इशारा माना जाता है, लेकिन 2018 के बाद से दक्षिणपंथी चरमपंथी समूहों ने इसे ‘श्वेत शक्ति’ के प्रतीक के रूप में अपना लिया है – तीन फैली उंगलियां ‘W’ और अंगूठे-तर्जनी का घेरा हाथ की स्थिति के साथ मिलकर ‘P’ का आभास देता है। अमेरिकी संस्था एंटी-डिफेमेशन लीग ने इसे घृणा प्रतीकों की सूची में शामिल किया है, लेकिन साथ ही यह भी रेखांकित किया है कि हर संदर्भ में इसका नस्लवादी अर्थ नहीं होता। 2019 में क्राइस्टचर्च मस्जिद हमलों के आरोपी ने अदालत में यही इशारा किया था, जिससे इसकी संवेदनशीलता और बढ़ गई। कुछ रिपोर्टों में इसे दोस्तों के बीच प्रचलित ‘सर्कल गेम’ की शरारत भी बताया गया, जिससे इरादे को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों की मीडिया प्रतिक्रिया इस वैश्विक संवेदनशीलता को दर्शाती है। जर्मन अखबारों ने इंटरनेट की बारीक निगरानी और त्वरित आरोपों की संस्कृति पर ध्यान केंद्रित किया, जबकि अरब मीडिया ने फीफा की चुप्पी और आरोपों की गंभीरता को रेखांकित किया। भारतीय समाचार आउटलेट्स ने इस घटना को फीफा के भेदभाव-विरोधी संदेश की कसौटी के रूप में देखा, वहीं ऑस्ट्रेलियाई प्रेस ने क्राइस्टचर्च कांड से जुड़े स्थानीय संदर्भ को उभारा। रूसी और इतालवी मीडिया ने फेयर नेटवर्क की मांग को प्रमुखता दी। इस बहुभाषी कवरेज से साफ है कि एक छोटा सा हाथ का इशारा किस तरह वैश्विक फुटबॉल की साख को चुनौती दे सकता है।
आगे का विश्लेषण इस बात पर टिका है कि फीफा की जांच किस नतीजे पर पहुंचती है। यह प्रकरण महज एक रेफरी के भविष्य का नहीं, बल्कि खेल में बढ़ते ध्रुवीकरण और प्रतीकों की राजनीति का मामला है। दक्षिण एशिया समेत उन बाजारों में जहां फुटबॉल की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है, ऐसे विवाद खेल की समावेशी छवि को नुकसान पहुंचा सकते हैं। फीफा को अब स्पष्ट दिशानिर्देश और शिक्षा के जरिए यह सुनिश्चित करना होगा कि अधिकारी सार्वजनिक मंच पर हर संकेत की वैश्विक व्याख्या के प्रति सचेत रहें। इवांस का मामला चाहे जानबूझकर उकसाने वाला हो या मासूम मजाक, इसने यह जरूर साबित कर दिया कि विश्व कप की हर फ्रेम अब बिना संदर्भ के नहीं देखी जाएगी।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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एक ऑस्ट्रेलियाई वीडियो सहायक रेफरी पर लाइव प्रसारण के दौरान एक हाथ का इशारा करने का आरोप लगा है, जिसे श्वेत वर्चस्ववादी प्रतीक से जोड़ा गया है। इस घटना ने यूरोपीय मीडिया में जबरदस्त आक्रोश पैदा कर दिया है और फीफा से तुरंत कार्रवाई की मांग उठ रही है।
एक ऑस्ट्रेलियाई रेफरी पर विश्व कप के प्रसारण के दौरान 'व्हाइट पावर' का इशारा करने का आरोप लगा, लेकिन एंग्लो-अमेरिकी मीडिया ने इस चिन्ह के दोहरे अर्थ पर प्रकाश डाला — परंपरागत रूप से यह 'ओके' है और हाल में कट्टरपंथियों ने इसे अपनाया। खबरों में भावनात्मक प्रतिक्रिया के बजाय तथ्य और प्रतीक के इतिहास पर ध्यान दिया गया।
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