
जर्मनी से 7-1 की करारी हार के बाद भी कुराकाओ के कोच डिक एडवोकेट का गर्व और उम्मीद बरकरार
विश्व कप में पदार्पण कर रहे कुराकाओ की ऐतिहासिक हार के बावजूद 78 वर्षीय कोच ने टीम का हौसला बढ़ाया और कहा कि वे अभी भी टूर्नामेंट में सरप्राइज़ दे सकते हैं।
किसी भी अंडरडॉग टीम के लिए विश्व कप का पदार्पण सपनों और चुनौतियों का मिश्रण होता है, लेकिन कुराकाओ के लिए रविवार का दिन एक कठोर सबक लेकर आया। ह्यूस्टन के एनआरजी स्टेडियम में खेले गए ग्रुप ई के मुकाबले में चार बार की विश्व विजेता जर्मनी ने कॅरिबियाई राष्ट्र को 7-1 से रौंद दिया। हालाँकि, इस करारी शिकस्त के बाद भी टीम के मुख्य कोच डिक एडवोकेट ने निराशा में डूबने से इनकार करते हुए एक सकारात्मक और गर्व से भरा रुख अपनाया, जिसकी गूँज एशिया से लेकर दक्षिण अमेरिका तक के मीडिया में सुनाई दी।
भारतीय, इंडोनेशियाई और ब्राजीलियाई समाचार आउटलेट्स ने एक सुर में इस ऐतिहासिक मैच और एडवोकेट की प्रतिक्रिया को प्रमुखता दी। दरअसल, विश्व कप के इतिहास में सबसे उम्रदराज कोच बनने का रिकॉर्ड बनाने वाले 78 वर्षीय डच रणनीतिकार खुद भी मैच से पहले भावुक हो उठे थे। मैच में कुराकाओ ने तब उम्मीद जगाई जब लिवानो कोमेनेनसिया ने फेलिक्स एनमेचा के शुरुआती गोल के जवाब में बराबरी का गोल दागा। लेकिन इसके बाद जर्मनी की गुणवत्ता हावी हो गई और निको श्लोटरबेक, काई हैवर्ट्ज (दो गोल), जमाल मुसियाला, नथानिएल ब्राउन और डेनिज उंडाव ने एक के बाद एक गोल करके स्कोर 7-1 कर दिया।
हार के बावजूद, एडवोकेट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह परिणाम शर्मिंदा होने वाला नहीं है। इंडोनेशिया और ब्राजील से प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने जोर देकर कहा, "अंततः हम दुनिया के सबसे बड़े फुटबॉल टूर्नामेंट का हिस्सा बनकर खुश हैं। हमें इसे एक खूबसूरत विश्व कप में बदलना होगा।" यह बयान न केवल कुराकाओ के खिलाड़ियों के मनोबल को बनाए रखने की कोशिश थी, बल्कि एक ऐसे देश की आवाज़ भी था जिसने पहली बार इस मंच पर कदम रखा है। भारतीय और दक्षिण-पूर्व एशियाई मीडिया ने इस जज़्बे को रेखांकित करते हुए बताया कि एडवोकेट ने टीम के बुनियादी स्तर पर हुई गलतियों को स्वीकार किया, लेकिन साथ ही यह भी दोहराया कि उनकी टीम अभी भी दूसरे और तीसरे मैच में सरप्राइज़ दे सकती है।
यह हार निस्संदेह कुराकाओ के लिए एक कड़वी हकीकत है, लेकिन वैश्विक परिप्रेक्ष्य में यह खेल के अप्रत्याशित सौंदर्य को भी दर्शाती है। लैटिन अमेरिकी और एशियाई विशेषज्ञों का मानना है कि जर्मनी जैसी महाशक्ति के खिलाफ एक गोल करना ही अपने आप में इस छोटे से देश के लिए एक उपलब्धि है। एडवोकेट का यह कहना कि "हमें शर्मिंदा होने की कोई ज़रूरत नहीं है," इसी भावना का प्रतीक है। कोच और खिलाड़ियों की नज़रें अब बाकी बचे ग्रुप मैचों पर हैं, जहाँ एक जीत या ड्रॉ उनके अभियान को एक यादगार मोड़ दे सकता है।
आगे का रास्ता बेहद कठिन है, मगर कुराकाओ की कहानी केवल स्कोरलाइन से नहीं आँकी जा सकती। एक ऐसे देश के लिए जिसने पहली बार विश्व कप के फाइनल्स में जगह बनाई, हर मिनट एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। एडवोकेट का आत्मविश्वास और सकारात्मक रवैया इस अभियान को एक सुंदर अंत की ओर ले जाने की संभावना को ज़िंदा रखता है। अगर टीम अपनी गलतियों से सीखकर अगले मैचों में अपनी असली क्षमता दिखा पाई, तो यह 7-1 की हार विश्व कप के इतिहास में एक सीख और प्रेरणा दोनों के रूप में दर्ज हो सकती है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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क्यूरासाओ का विश्व कप में पदार्पण जर्मनी के हाथों 7-1 की करारी हार के साथ हुआ, लेकिन कोच डिक एडवोकेट, जो मैच से पहले भावुक होकर रो पड़े थे, का मानना है कि टीम अभी भी चौंका सकती है। कैरेबियाई टीम के पास निराश होने का कोई कारण नहीं है।
जर्मनी ने डेब्यू कर रहे क्यूरासाओ को 7-1 से ध्वस्त कर दिया, जिससे विश्व कप की उन बदनाम हार की यादें ताज़ा हो गईं। मानशाफ्ट की बेरहमी ने वर्ग के अंतर को उजागर कर दिया और अनुभवी कोच के मैच-पूर्व आंसू महज़ एक फुटनोट बनकर रह गए।
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