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न्याय और कानूनशुक्रवार, 10 जुलाई 2026

गलत आरोप में जेल काटने पर अर्जेंटीना की अदालत ने राज्य को 12.68 करोड़ पेसो का मुआवज़ा देने का आदेश दिया

ब्यूनस आयर्स की एक अदालत ने झूठी गवाही के आधार पर दो साल से अधिक जेल में रही महिला को ऐतिहासिक मुआवज़ा देने का आदेश दिया, जबकि अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में घरेलू हिंसा के मामलों में जाँच जारी है।

अर्जेंटीना की एक सिविल अदालत ने ब्यूनस आयर्स प्रांत को एक महिला को 12.68 करोड़ पेसो (लगभग 1.26 लाख अमेरिकी डॉलर) का भुगतान करने का आदेश दिया है, जिसे 2013 में अपने साथी की हत्या की साजिश रचने के आरोप में दो साल से अधिक समय तक गलत तरीके से हिरासत में रखा गया था। मर्सिडीज की अपील अदालत की सिविल और वाणिज्यिक साला I ने पैट्रीशिया मिरियम लारोज़ा की याचिका पर यह फैसला सुनाया, जिन्हें अगस्त 2013 में गिरफ्तार किया गया था और अक्टूबर 2015 में मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष द्वारा आरोप वापस लेने के बाद बरी कर दिया गया था। अदालत ने पाया कि लारोज़ा के खिलाफ एकमात्र गवाह एक ऐसे संगठन का हिस्सा था जो झूठे आपराधिक मामले गढ़ता था, और जाँचकर्ताओं ने उसके दावों की पुष्टि के लिए न्यूनतम कदम नहीं उठाए थे।

अदालत के अनुसार, लारोज़ा की प्री-ट्रायल हिरासत उचित समय सीमा से अधिक थी और ठोस आधार के बिना लगाई गई थी। मुआवज़े की राशि में मानसिक क्षति के लिए 2.68 करोड़ पेसो और नैतिक क्षति के लिए 10 करोड़ पेसो शामिल हैं, साथ ही गिरफ्तारी की तारीख 26 अगस्त 2013 से 6% वार्षिक ब्याज भी देय होगा। अदालत ने इस बात पर प्रकाश डाला कि लारोज़ा चार बच्चों की माँ हैं, जिनमें से एक हाइड्रोसिफ़लस से पीड़ित है और उसे निरंतर देखभाल की आवश्यकता थी, जो वह जेल में रहते हुए प्रदान नहीं कर सकीं। यह मामला राज्य की जवाबदेही पर एक महत्वपूर्ण मिसाल कायम करता है, क्योंकि अदालत ने माना कि मनमानी हिरासत के लिए राज्य को वित्तीय रूप से जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब विभिन्न देशों में घरेलू हिंसा और आपराधिक न्याय प्रणालियों की जाँच की प्रक्रियाएँ सुर्खियों में हैं। अमेरिका के वाशिंगटन राज्य में, बेलेव्यू पुलिस ने तेलंगाना के एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर अविनाश नार्ने को अपनी पत्नी रजिता सब्बिनेनी की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया है। जाँचकर्ताओं के अनुसार, शव-परीक्षा में गला घोंटकर हत्या की पुष्टि हुई, और आरोप है कि नार्ने ने घटना के दिन भारत में एक अन्य महिला को कई कॉल किए तथा पत्नी के शव की तस्वीर भेजी। पीड़िता ने मृत्यु से पहले दोस्तों को बताया था कि उसके पति द्वारा बनाई गई स्मूदी का स्वाद कड़वा था। इसी तरह, ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में, श्रीनिवास अचंता पर अपनी पत्नी लावण्या की चाकू मारकर हत्या करने का आरोप है, जिसके समय घर में उनके दो बच्चे मौजूद थे। पुलिस के अनुसार, बच्चे शारीरिक रूप से सुरक्षित हैं और आरोपी को हिरासत में लेकर अदालत में पेश किया गया है।

अर्जेंटीना के मामले में, राज्य के खिलाफ मुआवज़े का आदेश अंतिम है, हालाँकि प्रांत सरकार उच्च न्यायालय में अपील कर सकती है। अमेरिकी मामले में, नार्ने को अदालत में पेश किया गया है और जाँच जारी है, जबकि ऑस्ट्रेलियाई मामले में आरोपी को 7 नवंबर को अगली सुनवाई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। ये तीनों मामले न्याय प्रणालियों के समक्ष मौजूद चुनौतियों को रेखांकित करते हैं—एक ओर जहाँ अर्जेंटीना की अदालत ने गलत कारावास के लिए राज्य को उत्तरदायी ठहराया, वहीं अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में जाँच एजेंसियाँ हिंसक अपराधों के आरोपों की पुष्टि के लिए फोरेंसिक साक्ष्यों और गवाहों के बयानों पर निर्भर हैं।

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गलत आरोप में जेल काटने पर अर्जेंटीना की अदालत ने राज्य को 12.68 करोड़ पेसो का मुआवज़ा देने का आदेश दिया

ब्यूनस आयर्स की एक अदालत ने झूठी गवाही के आधार पर दो साल से अधिक जेल में रही महिला को ऐतिहासिक मुआवज़ा देने का आदेश दिया, जबकि अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में घरेलू हिंसा के मामलों में जाँच जारी है।

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अदालत के अनुसार, लारोज़ा की प्री-ट्रायल हिरासत उचित समय सीमा से अधिक थी और ठोस आधार के बिना लगाई गई थी। मुआवज़े की राशि में मानसिक क्षति के लिए 2.68 करोड़ पेसो और नैतिक क्षति के लिए 10 करोड़ पेसो शामिल हैं, साथ ही गिरफ्तारी की तारीख 26 अगस्त 2013 से 6% वार्षिक ब्याज भी देय होगा। अदालत ने इस बात पर प्रकाश डाला कि लारोज़ा चार बच्चों की माँ हैं, जिनमें से एक हाइड्रोसिफ़लस से पीड़ित है और उसे निरंतर देखभाल की आवश्यकता थी, जो वह जेल में रहते हुए प्रदान नहीं कर सकीं। यह मामला राज्य की जवाबदेही पर एक महत्वपूर्ण मिसाल कायम करता है, क्योंकि अदालत ने माना कि मनमानी हिरासत के लिए राज्य को वित्तीय रूप से जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब विभिन्न देशों में घरेलू हिंसा और आपराधिक न्याय प्रणालियों की जाँच की प्रक्रियाएँ सुर्खियों में हैं। अमेरिका के वाशिंगटन राज्य में, बेलेव्यू पुलिस ने तेलंगाना के एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर अविनाश नार्ने को अपनी पत्नी रजिता सब्बिनेनी की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया है। जाँचकर्ताओं के अनुसार, शव-परीक्षा में गला घोंटकर हत्या की पुष्टि हुई, और आरोप है कि नार्ने ने घटना के दिन भारत में एक अन्य महिला को कई कॉल किए तथा पत्नी के शव की तस्वीर भेजी। पीड़िता ने मृत्यु से पहले दोस्तों को बताया था कि उसके पति द्वारा बनाई गई स्मूदी का स्वाद कड़वा था। इसी तरह, ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में, श्रीनिवास अचंता पर अपनी पत्नी लावण्या की चाकू मारकर हत्या करने का आरोप है, जिसके समय घर में उनके दो बच्चे मौजूद थे। पुलिस के अनुसार, बच्चे शारीरिक रूप से सुरक्षित हैं और आरोपी को हिरासत में लेकर अदालत में पेश किया गया है।

अर्जेंटीना के मामले में, राज्य के खिलाफ मुआवज़े का आदेश अंतिम है, हालाँकि प्रांत सरकार उच्च न्यायालय में अपील कर सकती है। अमेरिकी मामले में, नार्ने को अदालत में पेश किया गया है और जाँच जारी है, जबकि ऑस्ट्रेलियाई मामले में आरोपी को 7 नवंबर को अगली सुनवाई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। ये तीनों मामले न्याय प्रणालियों के समक्ष मौजूद चुनौतियों को रेखांकित करते हैं—एक ओर जहाँ अर्जेंटीना की अदालत ने गलत कारावास के लिए राज्य को उत्तरदायी ठहराया, वहीं अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में जाँच एजेंसियाँ हिंसक अपराधों के आरोपों की पुष्टि के लिए फोरेंसिक साक्ष्यों और गवाहों के बयानों पर निर्भर हैं।

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