
रूसी युद्धपोत ने इंग्लिश चैनल में ब्रिटिश नौका पर चेतावनी गोलियां चलाईं
रूसी फ्रिगेट ने टकराव रोकने के लिए चेतावनी दी, लेकिन ब्रिटिश दंपति ने आरोपों को झूठा बताया; घटना ने यूरोपीय जलक्षेत्र में तनाव बढ़ा दिया।
मंगलवार सुबह इंग्लिश चैनल में उस समय सनसनी फैल गई जब रूसी नौसेना के फ्रिगेट 'एडमिरल ग्रिगोरोविच' ने एक ब्रिटिश नौका 'ब्राइट फ्यूचर' की दिशा में चेतावनी स्वरूप गोलियां दागीं। यह घटना आइल ऑफ वाइट से लगभग 37 किलोमीटर दक्षिण में, ब्रिटिश प्रादेशिक जल सीमा के बाहर हुई। नौका पर सवार 68 वर्षीय जेन केल्वी और 70 वर्षीय एलन केल्वी सुरक्षित रहे और किसी प्रकार की क्षति नहीं हुई। ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय ने इसे 'पृथक घटना' बताया और इसका संबंध रविवार को रॉयल मरीन द्वारा रूसी छाया टैंकर 'स्मिर्टोस' को जब्त करने की कार्रवाई से नकार दिया, फिर भी यह प्रकरण यूक्रेन युद्ध के चलते पश्चिम और मॉस्को के बीच बढ़ते समुद्री तनाव का ताजा संकेत बन गया।
घटना के बाद दो बिल्कुल अलग बयान सामने आए। रूसी रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि नौका इंजन चालू कर खतरनाक ढंग से युद्धपोत की ओर बढ़ रही थी और बार-बार रेडियो संपर्क तथा सिग्नल फ्लेयर की अनदेखी कर रही थी, जिसके चलते टकराव रोकने के लिए चेतावनी गोलियां चलानी पड़ीं। दूसरी ओर, केल्वी दंपति ने रूसी दावों को 'झूठ' करार दिया। उन्होंने बताया कि उन्होंने केवल दो बार पांच-पांच हॉर्न की आवाजें सुनीं, लेकिन कोई फ्लेयर या रेडियो कॉल नहीं आया। उनका कहना था कि वे कोई गलत काम नहीं कर रहे थे और यह अनुभव 'डरावना' था। मरीन ट्रैफिक डेटा के अनुसार नौका लिमिंगटन से फ्रांस के शेरबूर बंदरगाह की ओर जा रही थी और चेतावनी के बाद भी अपनी यात्रा पूरी की।
ब्रिटिश प्रतिक्रिया सतर्क और संतुलित रही। रक्षा मंत्रालय ने जांच शुरू की और बताया कि घटना के समय रॉयल नेवी का गश्ती जहाज एचएमएस मर्सी पहले से ही रूसी फ्रिगेट की निगरानी कर रहा था, जबकि एचएमएस टाइन ने नौका के चालक दल का हालचाल जानने के लिए एक सीबोट भेजी। यूरोपीय मीडिया में इस घटना को लेकर चिंता दिखी—इटली, फ्रांस, स्वीडन और स्पेन के समाचार पत्रों ने इसे रूस-पश्चिम तनाव के संदर्भ में रखा। मॉस्को में विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़ाखारोवा ने व्यंग्य करते हुए पूछा कि क्या फ्रिगेट मॉस्को स्थित ब्रिटिश दूतावास के पास से गुजरेगी, जिससे कूटनीतिक कटाक्ष की एक और परत जुड़ गई।
यह घटना ऐसे समय हुई जब इंग्लिश चैनल दुनिया के सबसे व्यस्त जलमार्गों में से एक है और रूसी युद्धपोतों का यहां से गुजरना नियमित है, हालांकि हर बार रॉयल नेवी उनकी निगरानी करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि छोटी नौकाओं और बड़े सैन्य जहाजों के बीच संचार विफलता गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है। दक्षिण एशिया के लिए यह प्रकरण हिंद महासागर में बढ़ती नौसैनिक गतिविधियों और चीन जैसी शक्तियों के साथ समुद्री आचार संहिता की आवश्यकता को रेखांकित करता है। भारत जैसे देश, जो ऊर्जा आयात के लिए समुद्री लेन पर निर्भर हैं, ऐसे तनावों से सीख ले सकते हैं कि कैसे स्पष्ट प्रोटोकॉल और क्षेत्रीय सहयोग से अनचाहे टकराव को रोका जा सकता है।
फिलहाल दोनों पक्षों ने घटना को बढ़ाने से परहेज किया है, लेकिन यह स्पष्ट है कि यूरोपीय जलक्षेत्र में रूस और नाटो देशों के बीच विश्वास का स्तर बेहद कम है। आगे का रास्ता कूटनीतिक संवाद और समुद्री सुरक्षा समझौतों को मजबूत करने से ही निकल सकता है, ताकि एक चेतावनी गोली कभी वास्तविक संघर्ष में न बदल जाए।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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रूसी युद्धपोत ने इंग्लिश चैनल में एक ब्रिटिश नौका पर चेतावनी के तौर पर गोलियां चलाईं, जिससे उसमें सवार एक सेवानिवृत्त दंपति दहशत में आ गए। यह घटना ब्रिटिश कमांडो द्वारा रूसी शैडो फ्लीट के एक टैंकर को जब्त करने के कुछ दिनों बाद हुई, जिससे तनाव और बढ़ गया। लंदन जांच कर रहा है, लेकिन इस प्रकरण को यूरोपीय जलक्षेत्र में मास्को की एक और उकसाने वाली कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।
रूसी युद्धपोत एडमिरल ग्रिगोरोविच ने इंग्लिश चैनल में खतरनाक तरीके से पास आ रही एक ब्रिटिश नौका पर चेतावनी के तौर पर गोलियां चलाईं। ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय जांच कर रहा है, जबकि मास्को ने कहा कि टक्कर रोकने के लिए गोलियां चलाना ज़रूरी था। कोई घायल या नुकसान नहीं हुआ और घटना ब्रिटिश क्षेत्रीय जल के बाहर हुई।
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