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अर्थव्यवस्था और बाजाररविवार, 14 जून 2026

प्रोटीन की बढ़ती भूख से व्हे की किल्लत और दाम दोगुने

अमेरिकी सुपरमार्केट में 39,000 उत्पाद प्रोटीन का दावा कर रहे हैं, लेकिन व्हे प्रोटीन की आपूर्ति संकट में है और विशेषज्ञ आम लोगों के लिए इस जुनून पर सवाल उठा रहे हैं।

वैश्विक खाद्य बाज़ार में प्रोटीन-युक्त उत्पादों की मांग अप्रत्याशित रूप से बढ़ गई है, जिससे पनीर निर्माण के उप-उत्पाद व्हे प्रोटीन सांद्र की कीमतें पिछले एक साल में ढाई गुना तक उछल गई हैं और आपूर्ति श्रृंखला पर गंभीर दबाव बन रहा है। अमेरिकी सुपरमार्केट में अब औसतन 39,000 से अधिक उत्पाद अपने लेबल पर प्रोटीन की मात्रा का विज्ञापन करते हैं—नाश्ते के अनाज, पॉप-टार्ट्स, आलू के चिप्स, बैगल्स, टॉर्टिला और स्टारबक्स पेय तक। यह संख्या दर्शाती है कि प्रोटीन अब केवल जिम जाने वालों या बुज़ुर्गों का पोषक तत्व नहीं रहा, बल्कि रोज़मर्रा के उपभोक्ता के लिए एक आकर्षक विपणन दावा बन चुका है।

हालांकि, यह प्रोटीन क्रांति डेयरी उद्योग को अप्रत्याशित चुनौती दे रही है। व्हे प्रोटीन सांद्र मुख्यतः पनीर उत्पादन से बचे तरल को सुखाकर बनाया जाता है, और इसकी आपूर्ति पनीर की मांग से जुड़ी है। जब खाद्य कंपनियाँ हर संभव उत्पाद में व्हे मिला रही हैं, तब डेयरी क्षेत्र—खासकर अमेरिका में—मांग पूरी करने के लिए संघर्ष कर रहा है। बाज़ार आँकड़ों के अनुसार, 80 प्रतिशत प्रोटीन वाले व्हे सांद्रण की कीमत एक वर्ष में 250 प्रतिशत बढ़ चुकी है। यह संकट केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है; यूरोप और एशिया के बाज़ार भी इस वैश्विक प्रोटीन लालसा से प्रभावित हो रहे हैं, जहाँ वज़न घटाने वाली दवाओं के बढ़ते उपयोग ने उच्च-प्रोटीन आहार की मांग को और हवा दी है।

इसी बीच, पोषण विशेषज्ञ एक अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं। पंजीकृत पोषण विशेषज्ञ सोफ़ी गैस्टमैन का कहना है कि अधिकांश लोग बिना किसी अतिरिक्त प्रयास के पर्याप्त प्रोटीन खा लेते हैं, और मैक्रोज़ गिनने या हाइपर-फोकस करने से अधिक नुकसान हो सकता है। सक्रिय व्यक्तियों के लिए प्रति पाउंड शरीर भार 0.7 से 1 ग्राम प्रोटीन की सिफारिश की जाती है, जो संतुलित भोजन से आसानी से प्राप्त हो सकता है। गैस्टमैन का सुझाव है कि प्रोटीन ट्रैकिंग के बजाय सब्ज़ियों, फलियों और स्वस्थ वसा से भरपूर भोजन पर ध्यान देना अधिक लाभकारी है। यह दृष्टिकोण सोशल मीडिया पर ‘प्रोटीन मैक्सिंग’ की प्रवृत्ति और बाज़ार के प्रोटीन-फोर्टिफाइड उत्पादों की बाढ़ के बीच एक संतुलित आवाज़ है।

भारत और दक्षिण एशिया के संदर्भ में यह वैश्विक प्रोटीन संकट दोहरे अर्थ रखता है। एक ओर, भारत में कुपोषण और प्रोटीन की कमी अब भी एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती है, जहाँ बड़ी आबादी दालों और दुग्ध उत्पादों पर निर्भर है। व्हे प्रोटीन की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय कीमतें भारतीय डेयरी उद्योग के लिए निर्यात के अवसर तो पैदा कर सकती हैं, लेकिन घरेलू स्तर पर पौष्टिक पूरक आहारों की लागत बढ़ा सकती हैं। दूसरी ओर, शहरी भारत में जिम संस्कृति और सोशल मीडिया के प्रभाव से प्रोटीन सप्लीमेंट का बाज़ार तेज़ी से फैल रहा है, जो वैश्विक मांग में योगदान दे रहा है।

आगे देखें तो यह प्रोटीन संकट खाद्य उद्योग को वैकल्पिक स्रोतों की ओर धकेल सकता है। मटर, सोया और अन्य पादप-आधारित प्रोटीन पहले से ही लोकप्रिय हो रहे हैं, और व्हे की कमी इस बदलाव को तेज़ करेगी। साथ ही, उपभोक्ता शिक्षा की भूमिका भी बढ़ेगी—विशेषज्ञों का मानना है कि प्रोटीन की गुणवत्ता और वास्तविक ज़रूरत पर बातचीत ज़रूरी है, न कि हर पैकेट पर लिखी संख्या पर। बाज़ार की मौजूदा उथल-पुथल एक सुधार की ओर ले जा सकती है, जहाँ प्रोटीन संवर्धन सोच-समझकर किया जाएगा और आपूर्ति श्रृंखलाएँ अधिक टिकाऊ बनेंगी।

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

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लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
Stampa europea continentaleStampa atlantica / anglosfera
Stampa europea continentale/ nordica
pragmatismodistacco

प्रोटीन-युक्त खाद्य पदार्थों की वैश्विक मांग बढ़ने से कीमतें आसमान छू रही हैं, खासकर व्हे प्रोटीन की। अमेरिका में डेयरी उद्योग आपूर्ति बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहा है, क्योंकि अब केवल एथलीट ही नहीं, बल्कि वजन घटाने की दवाएं लेने वाले भी सांद्र प्रोटीन का सेवन कर रहे हैं। बाजार आंकड़े बताते हैं कि व्हे कॉन्संट्रेट की कीमत एक साल में 250 प्रतिशत बढ़ गई है, और औसत अमेरिकी दुकान में अब लगभग 39,000 उत्पाद अपनी प्रोटीन सामग्री का विज्ञापन करते हैं।

Stampa atlantica / anglosfera/ economica
scetticismopragmatismo

एक पोषण विशेषज्ञ का सुझाव है कि अधिकांश लोग पहले से ही पर्याप्त प्रोटीन खा लेते हैं, उन्हें मैक्रोज़ पर जुनूनी नज़र रखने की ज़रूरत नहीं है। संख्याओं पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, वह भोजन में सब्ज़ियों, बीन्स और स्वस्थ वसा के साथ उच्च-प्रोटीन सामग्री शामिल करने की सलाह देती हैं। सोशल मीडिया पर प्रोटीन-मैक्सिंग का चलन औसत व्यक्ति के लिए अनावश्यक माना जाता है और इससे अति-चिंतन हो सकता है।

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जर्मनी-आइवरी कोस्ट भिड़ंत: विश्व कप 2026 के अंतिम-16 में सीधी एंट्री के लिए शनिवार का निर्णायक मुकाबला·कनाडा: खदान विस्तार को मंजूरी, स्ट्रोनाच दोषी, और मृत्युदंड पर जनमत·जियो प्लेटफॉर्म्स का ऐतिहासिक आईपीओ: भारत में अब तक की सबसे बड़ी शेयर बिक्री की तैयारी·वेनिस में पर्यटक प्रवेश शुल्क 50 यूरो तक बढ़ाने की योजना, ईरान में बस-हवाई किराए ने मध्य वर्ग की यात्रा छीनी·विश्व कप का 1000वां मुकाबला: जापान और ट्यूनीशिया के बीच ऐतिहासिक भिड़ंत, समूह एफ में किस्मत का फैसला·मेक्सिको ने सबसे पहले पक्की की नॉकआउट सीट, कनाडा को विश्व कप में ऐतिहासिक पहली जीत·लूला का तंज: नीमार बने 'दुनिया के पहले होम ऑफिस फुटबॉलर'·लेबनान में बढ़ती हिंसा के बीच अमेरिका-ईरान वार्ता स्थगित, अंतरिम समझौते पर संकट·जर्मनी-आइवरी कोस्ट भिड़ंत: विश्व कप 2026 के अंतिम-16 में सीधी एंट्री के लिए शनिवार का निर्णायक मुकाबला·कनाडा: खदान विस्तार को मंजूरी, स्ट्रोनाच दोषी, और मृत्युदंड पर जनमत·जियो प्लेटफॉर्म्स का ऐतिहासिक आईपीओ: भारत में अब तक की सबसे बड़ी शेयर बिक्री की तैयारी·वेनिस में पर्यटक प्रवेश शुल्क 50 यूरो तक बढ़ाने की योजना, ईरान में बस-हवाई किराए ने मध्य वर्ग की यात्रा छीनी·विश्व कप का 1000वां मुकाबला: जापान और ट्यूनीशिया के बीच ऐतिहासिक भिड़ंत, समूह एफ में किस्मत का फैसला·मेक्सिको ने सबसे पहले पक्की की नॉकआउट सीट, कनाडा को विश्व कप में ऐतिहासिक पहली जीत·लूला का तंज: नीमार बने 'दुनिया के पहले होम ऑफिस फुटबॉलर'·लेबनान में बढ़ती हिंसा के बीच अमेरिका-ईरान वार्ता स्थगित, अंतरिम समझौते पर संकट·
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प्रोटीन की बढ़ती भूख से व्हे की किल्लत और दाम दोगुने

अमेरिकी सुपरमार्केट में 39,000 उत्पाद प्रोटीन का दावा कर रहे हैं, लेकिन व्हे प्रोटीन की आपूर्ति संकट में है और विशेषज्ञ आम लोगों के लिए इस जुनून पर सवाल उठा रहे हैं।

वैश्विक खाद्य बाज़ार में प्रोटीन-युक्त उत्पादों की मांग अप्रत्याशित रूप से बढ़ गई है, जिससे पनीर निर्माण के उप-उत्पाद व्हे प्रोटीन सांद्र की कीमतें पिछले एक साल में ढाई गुना तक उछल गई हैं और आपूर्ति श्रृंखला पर गंभीर दबाव बन रहा है। अमेरिकी सुपरमार्केट में अब औसतन 39,000 से अधिक उत्पाद अपने लेबल पर प्रोटीन की मात्रा का विज्ञापन करते हैं—नाश्ते के अनाज, पॉप-टार्ट्स, आलू के चिप्स, बैगल्स, टॉर्टिला और स्टारबक्स पेय तक। यह संख्या दर्शाती है कि प्रोटीन अब केवल जिम जाने वालों या बुज़ुर्गों का पोषक तत्व नहीं रहा, बल्कि रोज़मर्रा के उपभोक्ता के लिए एक आकर्षक विपणन दावा बन चुका है।

हालांकि, यह प्रोटीन क्रांति डेयरी उद्योग को अप्रत्याशित चुनौती दे रही है। व्हे प्रोटीन सांद्र मुख्यतः पनीर उत्पादन से बचे तरल को सुखाकर बनाया जाता है, और इसकी आपूर्ति पनीर की मांग से जुड़ी है। जब खाद्य कंपनियाँ हर संभव उत्पाद में व्हे मिला रही हैं, तब डेयरी क्षेत्र—खासकर अमेरिका में—मांग पूरी करने के लिए संघर्ष कर रहा है। बाज़ार आँकड़ों के अनुसार, 80 प्रतिशत प्रोटीन वाले व्हे सांद्रण की कीमत एक वर्ष में 250 प्रतिशत बढ़ चुकी है। यह संकट केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है; यूरोप और एशिया के बाज़ार भी इस वैश्विक प्रोटीन लालसा से प्रभावित हो रहे हैं, जहाँ वज़न घटाने वाली दवाओं के बढ़ते उपयोग ने उच्च-प्रोटीन आहार की मांग को और हवा दी है।

इसी बीच, पोषण विशेषज्ञ एक अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं। पंजीकृत पोषण विशेषज्ञ सोफ़ी गैस्टमैन का कहना है कि अधिकांश लोग बिना किसी अतिरिक्त प्रयास के पर्याप्त प्रोटीन खा लेते हैं, और मैक्रोज़ गिनने या हाइपर-फोकस करने से अधिक नुकसान हो सकता है। सक्रिय व्यक्तियों के लिए प्रति पाउंड शरीर भार 0.7 से 1 ग्राम प्रोटीन की सिफारिश की जाती है, जो संतुलित भोजन से आसानी से प्राप्त हो सकता है। गैस्टमैन का सुझाव है कि प्रोटीन ट्रैकिंग के बजाय सब्ज़ियों, फलियों और स्वस्थ वसा से भरपूर भोजन पर ध्यान देना अधिक लाभकारी है। यह दृष्टिकोण सोशल मीडिया पर ‘प्रोटीन मैक्सिंग’ की प्रवृत्ति और बाज़ार के प्रोटीन-फोर्टिफाइड उत्पादों की बाढ़ के बीच एक संतुलित आवाज़ है।

भारत और दक्षिण एशिया के संदर्भ में यह वैश्विक प्रोटीन संकट दोहरे अर्थ रखता है। एक ओर, भारत में कुपोषण और प्रोटीन की कमी अब भी एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती है, जहाँ बड़ी आबादी दालों और दुग्ध उत्पादों पर निर्भर है। व्हे प्रोटीन की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय कीमतें भारतीय डेयरी उद्योग के लिए निर्यात के अवसर तो पैदा कर सकती हैं, लेकिन घरेलू स्तर पर पौष्टिक पूरक आहारों की लागत बढ़ा सकती हैं। दूसरी ओर, शहरी भारत में जिम संस्कृति और सोशल मीडिया के प्रभाव से प्रोटीन सप्लीमेंट का बाज़ार तेज़ी से फैल रहा है, जो वैश्विक मांग में योगदान दे रहा है।

आगे देखें तो यह प्रोटीन संकट खाद्य उद्योग को वैकल्पिक स्रोतों की ओर धकेल सकता है। मटर, सोया और अन्य पादप-आधारित प्रोटीन पहले से ही लोकप्रिय हो रहे हैं, और व्हे की कमी इस बदलाव को तेज़ करेगी। साथ ही, उपभोक्ता शिक्षा की भूमिका भी बढ़ेगी—विशेषज्ञों का मानना है कि प्रोटीन की गुणवत्ता और वास्तविक ज़रूरत पर बातचीत ज़रूरी है, न कि हर पैकेट पर लिखी संख्या पर। बाज़ार की मौजूदा उथल-पुथल एक सुधार की ओर ले जा सकती है, जहाँ प्रोटीन संवर्धन सोच-समझकर किया जाएगा और आपूर्ति श्रृंखलाएँ अधिक टिकाऊ बनेंगी।

स्रोतों में मतभेद

अर्थव्यवस्था और बाजार · 4 स्रोत · 2 भाषाएँ

0%कम

स्रोत कैसे एक ही तथ्यों को अलग-अलग तरीके से बयाँ करते हैं।

विभाजन कैसे है

न्यूनत्र100%

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 2 भाषाएँ

लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
Stampa europea continentaleStampa atlantica / anglosfera
Stampa europea continentale/ nordica
pragmatismodistacco

प्रोटीन-युक्त खाद्य पदार्थों की वैश्विक मांग बढ़ने से कीमतें आसमान छू रही हैं, खासकर व्हे प्रोटीन की। अमेरिका में डेयरी उद्योग आपूर्ति बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहा है, क्योंकि अब केवल एथलीट ही नहीं, बल्कि वजन घटाने की दवाएं लेने वाले भी सांद्र प्रोटीन का सेवन कर रहे हैं। बाजार आंकड़े बताते हैं कि व्हे कॉन्संट्रेट की कीमत एक साल में 250 प्रतिशत बढ़ गई है, और औसत अमेरिकी दुकान में अब लगभग 39,000 उत्पाद अपनी प्रोटीन सामग्री का विज्ञापन करते हैं।

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एक पोषण विशेषज्ञ का सुझाव है कि अधिकांश लोग पहले से ही पर्याप्त प्रोटीन खा लेते हैं, उन्हें मैक्रोज़ पर जुनूनी नज़र रखने की ज़रूरत नहीं है। संख्याओं पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, वह भोजन में सब्ज़ियों, बीन्स और स्वस्थ वसा के साथ उच्च-प्रोटीन सामग्री शामिल करने की सलाह देती हैं। सोशल मीडिया पर प्रोटीन-मैक्सिंग का चलन औसत व्यक्ति के लिए अनावश्यक माना जाता है और इससे अति-चिंतन हो सकता है।

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