
लुकाशेंको ने ज़ेलेंस्की से माफ़ी मांगी, पर कहा: 'जैसा गाओगे, वैसा ही अंतिम संस्कार होगा'
बेलारूस के राष्ट्रपति ने यूक्रेन युद्ध में शामिल न होने की बात दोहराई, साथ ही 2022 में कीव से रूसी सेना हटाने के पीछे वैटिकन और इज़राइली षड्यंत्र का आरोप लगाया।
बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्ज़ांडर लुकाशेंको ने एक साथ दो विपरीत संदेश देते हुए यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की से माफ़ी मांगी और उन्हें कड़ी चेतावनी भी दी। अल अरबिया चैनल को दिए एक साक्षात्कार में लुकाशेंको ने स्वीकार किया कि ज़ेलेंस्की के प्रति उनके हालिया बयान शायद “ज़रूरत से ज़्यादा” थे, लेकिन साथ ही बेलारूस की लोकप्रिय कहावत दोहराई: “जैसा गाओगे, वैसा ही अंतिम संस्कार होगा।” यह टिप्पणी ज़ेलेंस्की की उस धमकी का सीधा जवाब थी, जिसमें कहा गया था कि यूक्रेन के पास बेलारूस में 500 लक्ष्य हैं और वह जानता है कि लुकाशेंको कहां हैं। लुकाशेंको ने ज़ेलेंस्की को “अनुभवहीन, गैर-सैन्य व्यक्ति” बताते हुए आगाह किया कि उन्हें अपने बयानों में सावधानी बरतनी चाहिए।
इसी बातचीत में लुकाशेंको ने स्पष्ट किया कि बेलारूस रूस-यूक्रेन संघर्ष में सैन्य रूप से शामिल नहीं होगा। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ कई बार इस पर चर्चा हुई और दोनों इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि बेलारूस की भागीदारी से फ़ायदे से ज़्यादा नुक़सान होगा। लुकाशेंको ने अपने देश की सैन्य दुर्बलता को रेखांकित किया: “बेलारूस यूक्रेनी सेना के लिए हथेली पर रखी चीज़ की तरह है। हमारे सभी अहम उत्पादन और आपूर्ति केंद्र निशाने पर आ जाएंगे।” यह स्वीकारोक्ति एक ऐसे नेता की विवशता दर्शाती है जो मास्को का निकटतम सहयोगी होते हुए भी अपनी धरती को युद्ध का मैदान बनने से रोकना चाहता है।
लुकाशेंको ने 2022 में कीव से रूसी सेना की वापसी को लेकर एक विस्फोटक दावा किया। उनके अनुसार, पुतिन ने “कुछ ख़ास राजनीतिक ताक़तों” के कहने पर आगे बढ़ती सेना को रोका, क्योंकि उन्होंने ज़ेलेंस्की की ओर से शांति वार्ता का आश्वासन दिया था। लुकाशेंको ने सीधे तौर पर वैटिकन और “यहूदी लॉबी, इज़राइलियों” पर धोखा देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अगर रूस ने आक्रमण जारी रखा होता, तो “वहां न ज़ेलेंस्की बचते, न कोई और।” यह बयान न केवल युद्ध के शुरुआती दौर की कूटनीतिक गुत्थियों को उजागर करता है, बल्कि मास्को के भीतर की उस नाराज़गी को भी दिखाता है जो पश्चिमी और ग़ैर-पश्चिमी मध्यस्थों पर भरोसा करने से उपजी।
इन तमाम तल्ख़ियों के बावजूद लुकाशेंको ने युद्ध के सैन्य समाधान को अवास्तविक बताया और दोनों पक्षों से समझौते की अपील की। उन्होंने कहा कि रूसी सेनाएं भले ही आगे बढ़ रही हों, लेकिन युद्धक्षेत्र में पूर्ण विजय किसी को नहीं मिल सकती। यह रुख़ वैश्विक दक्षिण के उस बढ़ते स्वर से मेल खाता है जो तत्काल युद्धविराम और बातचीत पर ज़ोर देता है। लुकाशेंको ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाक़ात की संभावना से भी इनकार नहीं किया, जो हाल के महीनों में वाशिंगटन के साथ बेलारूस के सुधरते संबंधों का संकेत है। साथ ही उन्होंने यूक्रेन के भविष्य को लेकर निराशाजनक भविष्यवाणी की, जिससे स्पष्ट है कि मिन्स्क की कूटनीतिक चालें मास्को के साथ तालमेल बनाए रखते हुए पश्चिम से जुड़ाव का संतुलन साधने की कोशिश हैं।
दक्षिण एशिया, विशेषकर भारत के लिए यह घटनाक्रम कई स्तरों पर प्रासंगिक है। भारत ने लगातार युद्धविराम और कूटनीति का समर्थन किया है, और लुकाशेंको का यह कहना कि सैन्य जीत असंभव है, नई दिल्ली के रुख़ को बल देता है। साथ ही, वैटिकन और इज़राइल जैसे ग़ैर-पारंपरिक मध्यस्थों की भूमिका का खुलासा यह सवाल उठाता है कि क्या भविष्य में भारत जैसे तटस्थ लेकिन प्रभावशाली देश शांति प्रक्रिया में अधिक सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं। लुकाशेंको का दोहरा संदेश—माफ़ी और चेतावनी—दरअसल एक ऐसे नेता की मजबूरी और चतुराई दोनों को रेखांकित करता है जो भू-राजनीतिक तूफ़ान में अपनी नैया बचाए रखना चाहता है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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लुकाशेंको, पुतिन के वफ़ादार सहयोगी, ने 2022 में वैटिकन और इज़राइली लॉबी द्वारा रचे गए उस धोखे का पर्दाफ़ाश किया जिसने मॉस्को को कीव से सेना हटाने पर मजबूर किया। वह ज़ेलेंस्की की धमकियों को अनुभवहीन बकवास बताकर खारिज करते हैं, बेलारूस के युद्ध में शामिल न होने की गारंटी देते हैं और अमेरिका के ईरान से टकराव को घातक भूल करार देते हैं।
बेलारूसी नेता रूस और यूक्रेन से समझौता करने का आग्रह करते हैं, यह स्वीकार करते हुए कि दोनों में से किसी के लिए भी सैन्य जीत अवास्तविक है। मिन्स्क वाशिंगटन के साथ संबंध सुधार रहा है और अमेरिकी राष्ट्रपति से मिलने की संभावना से इनकार नहीं करता, जो एक संभावित मध्यस्थ भूमिका का संकेत है।
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