
अमेरिकी सीनेट में इज़रायल-ईरान नीति के प्रभावशाली चेहरे लिंडसे ग्राहम का निधन
71 वर्षीय सीनेटर के अचानक निधन से रिपब्लिकन पार्टी और अमेरिकी विदेश नीति को एक अनुभवी नेतृत्व खोना पड़ा, जिसका मध्य पूर्व और यूक्रेन पर प्रभाव पड़ेगा।
अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम का शनिवार 11 जुलाई 2026 की शाम अचानक और संक्षिप्त बीमारी के बाद निधन हो गया। 71 वर्षीय ग्राहम दक्षिण कैरोलिना से रिपब्लिकन सीनेटर थे और विदेश नीति, रक्षा व सुरक्षा मामलों में सीनेट के सर्वाधिक प्रभावशाली सदस्यों में गिने जाते थे। उनके कार्यालय द्वारा जारी वक्तव्य में निधन की पुष्टि करते हुए परिवार ने गोपनीयता का अनुरोध किया। अपनी मृत्यु से ठीक पहले ग्राहम ने कीव और बेरूत की यात्राएं की थीं, जो अमेरिकी विदेश नीति में उनकी सक्रिय भूमिका दर्शाती हैं।
मध्य पूर्व में ग्राहम की विरासत को लेकर प्रतिक्रियाएं उनके लंबे समय से चले आ रहे रुख को दर्शाती हैं। इजरायली रक्षा मंत्री यिसराइल काट्ज़ ने शोक व्यक्त करते हुए ग्राहम को इजरायल का कठिन समय में साथ देने वाला सहयोगी बताया। इजरायली नेतृत्व के अनुसार, ग्राहम कांग्रेस में इजरायल के लिए सैन्य सहायता के निरंतर पैरोकार रहे। दूसरी ओर, ईरानी राजनीतिक हलकों में ग्राहम को परमाणु समझौते (जेसीपीओए) का विरोधी और ईरान पर हमले का समर्थक माना जाता था। दिसंबर 2025 के विरोध प्रदर्शनों के दौरान उन्होंने प्रदर्शनकारियों का खुलकर समर्थन किया और म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में विपक्षी प्रतीकों के साथ मंच साझा किया था। लेबनान में उनकी हालिया यात्रा वहां की सेना के सुदृढ़ीकरण और हिजबुल्लाह के निरस्त्रीकरण पर केंद्रित थी, जो क्षेत्र में उनकी नीतिगत प्राथमिकताओं को इंगित करती है।
अमेरिकी राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार, ग्राहम का राजनीतिक सफर रिपब्लिकन पार्टी में व्यापक बदलावों का प्रतीक था। 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप के कटु आलोचक रहे ग्राहम बाद में व्हाइट हाउस में उनके विश्वसनीय सहयोगी बन गए। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर उन्हें "महान अमेरिकी देशभक्त" बताया। सीनेट में वे बजट, विनियोग और न्यायपालिका जैसी महत्वपूर्ण समितियों के सदस्य थे और हाल ही में बजट समिति की अध्यक्षता कर रहे थे। उनके निधन से सीनेट में शक्ति संतुलन पर तत्काल प्रभाव पड़ने की संभावना कम है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि इससे रिपब्लिकन पार्टी के भीतर विदेश नीति की आक्रामक धारा को एक अनुभवी नेतृत्व खोना पड़ेगा।
ग्राहम की मृत्यु उस अनौपचारिक समूह के अंतिम सदस्य का भी अंत है जिसे "तीन दोस्त" कहा जाता था—जॉन मैक्केन और जो लीबरमैन का पहले ही निधन हो चुका है। दक्षिण कैरोलिना के गवर्नर अब उनके सीनेट स्थान पर एक अंतरिम सीनेटर नियुक्त करेंगे, जिसके बाद एक विशेष चुनाव होगा। संवैधानिक प्रक्रिया के तहत यह चुनाव नवंबर 2026 में होने की संभावना है, जब ग्राहम स्वयं पुनर्निर्वाचन की तैयारी कर रहे थे। इस बीच, अमेरिकी विदेश विभाग के सूत्रों के अनुसार, मध्य पूर्व और यूक्रेन संबंधी नीतियों पर ग्राहम के लंबे अनुभव का स्थानापन्न ढूंढना चुनौतीपूर्ण रहेगा।
| ईरानी और संबद्ध प्रेस | −0.90 | critical |
|---|---|---|
| इज़राइली प्रेस | +0.30 | aligned |
| अरब लेवांत-मगरिब प्रेस | −0.40 | critical |
We, the Iranian press, state that Lindsey Graham, a sworn enemy of the Islamic Republic, has died. We highlight his extremist positions and his role as a key supporter of hostile actions against Iran.
By labeling him an 'extremist' and 'vehement opponent of Iran', the narrative reduces his entire political career to his anti-Iran stance, thereby framing his death as a victory for Iran's interests.
Omit his broader legislative record, such as his work on immigration, judiciary, and veterans' affairs, which would soften the image of him as a single-issue antagonist.
We, the Israeli press, announce the passing of a senior Republican senator. We focus on the official statement and the family's request for privacy, avoiding any judgment on his policies.
By sticking to the official announcement and omitting any reference to his controversial stances, the narrative depoliticises the event and presents it as a purely human loss.
Omit his specific pro-Israel activism and his role in pushing for military action against Iran, which could be seen as polarizing.
We, the Arab press, note the death of a US senator who was one of the biggest supporters of Israel. We recall his visit to Beirut and his alignment with Israeli interests, implying that his legacy is tied to his unconditional support for Israel.
By repeatedly highlighting his support for Israel and his visit to Beirut, the narrative frames his entire career through the lens of the Arab-Israeli conflict, making his death relevant to regional grievances.
Omit his broader foreign policy work beyond the Middle East and his domestic legislative achievements, which would provide a more balanced portrait.
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